India Influence Explained: भारत पर रखिए नजर, अमेरिका हो या ईरान सभी से रिश्ते, कियोसाकी ने समझाया नई दिल्ली का किरदार
नई दिल्ली: जाने-माने लेखक और दिग्गज निवेशक रॉबर्ट कियोसाकी ने बदलते भू-राजनीतिक हालातों में भारत के किरदार को समझाया है। उन्होंने भारत के बढ़ते महत्व पर जोर देते हुए दुनिया से इस पर करीब से नजर रखने की अपील की है। रिच डैड पुअर डैड के लेखक ने बताया है कि आखिर ईरान में जारी संघर्ष के बीच नई दिल्ली ग्लोबल डिप्लोमेसी में क्यों लगातार केंद्रीय भूमिका निभा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हाल ही में हुई फोन कॉल के बाद उन्होंने अपनी राय जाहिर की।

कियोसाकी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया। इसमें कियोसाकी ने कहा कि ट्रंप-मोदी के बीच यह बातचीत लगभग 40 मिनट तक चली। इस साल इन दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी बातचीत थी। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद से यह दूसरी थी।
उन्होंने आगे कहा कि यह बातचीत बहुत ही सौहार्दपूर्ण माहौल में समाप्त हुई। ट्रंप के शब्दों को कोट करते हुए बताया, 'मैं बस आपको यह बताना चाहता हूं कि हम सभी आपसे बहुत प्यार करते हैं।'
ईरान-इजरायल दोनों में भारत की मौजूदगीकियोसाकी ने ईरान और इजरायल दोनों में अपनी आर्थिक माजूदगी के जरिये भारत की अद्वितीय स्थिति को हाईलाइट किया। ईरान और इजरायल दोनों ही इस संघर्ष में आमने-सामने हैं।
ईरान में भारत ओमान की खाड़ी में स्थित चाबहार बंदरगाह के 'शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल' को ऑपरेट करता है। इस परियोजना में 55 करोड़ डॉलर से अधिक का निवेश किया गया है। इसके संचालन के लिए 10 साल का समझौता है। यह बंदरगाह सेंट्रल एशिया तक भारत की व्यापक कनेक्टिविटी योजनाओं का भी एक हिस्सा है।
इजरायल में अडानी ग्रुप ने 1.2 अरब डॉलर में हाइफा बंदरगाह का अधिग्रहण किया है। भूमध्य सागर पर स्थित यह बंदरगाह पूरी तरह से चालू है। इस क्षेत्र में इसे एक प्रमुख रणनीतिक संपत्ति के रूप में देखा जाता है।
संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से भारत के रिश्तेकियोसाकी के अनुसार, भारत का प्रभाव इस बात से दिखता है कि वह इस संघर्ष में शामिल लगभग सभी पक्षों के साथ कामकाजी संबंध बनाए रखने में सक्षम है। इनमें अमेरिका, ईरान, इजरायल, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, रूस और चीन शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि संकट के शुरुआती 48 घंटों में मोदी ने कूटनीतिक स्तर पर जोरदार सक्रियता दिखाई। उन्होंने पश्चिम एशिया के कई नेताओं से बातचीत की। इसके बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से और बाद में ट्रंप से भी बातचीत की।
कियोसाकी ने मोदी और पेजेश्कियन के बीच हुई बातचीत का भी जिक्र किया। इसमें भारत ने ईरान के साथ अपने संबंधों की दोबारा पुष्टि की थी। उन्होंने बताया कि तेहरान ने भारत के 'संतुलित और रचनात्मक रुख' की सराहना की। नई दिल्ली को ब्रिक्स में अपनी नेतृत्वकारी भूमिका का फायदा उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
वर्तमान में ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है। यह वैश्विक स्तर पर समीकरणों में आ रहे बदलावों के इस दौर में भारत की कूटनीतिक स्थिति को और भी अधिक मजबूत बनाता है।
सोच-समझकर अपनाया है नपा-तुला रुखव्यापक जुड़ाव के बावजूद भारत ने सार्वजनिक तौर पर एक नपा-तुला रुख बनाए रखा है। कियोसाकी ने गौर किया कि नई दिल्ली ने शांति और बातचीत का आह्वान किया है। आम नागरिकों के हताहत होने पर चिंता जताई है। लेकिन, उसने न तो अमेरिका की कार्रवाई की निंदा की है और न ही ईरान के जवाबी हमले की। उन्होंने तर्क दिया कि यह जान-बूझकर अपनाई गई तटस्थता भारत को सभी पक्षों के लिए विश्वसनीय मध्यस्थ बने रहने में मदद करती है।
कियोसाकी ने लिखा, 'कूटनीति में जो देश कुछ नहीं कहता और अपने सभी दरवाजे खुले रखता है, वह अक्सर उस कमरे में सबसे ज्यादा अहमियत रखने वाला देश होता है।'
ट्रंप-मोदी की बातचीत की टाइमिंग पर डाली रोशनीट्रंप और मोदी के बीच हुई बातचीत के समय ने भी सबका ध्यान खींचा। कियोसाकी के अनुसार, यह बातचीत अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू किए जाने के ठीक एक दिन बाद हुई, जो बढ़ते भू-राजनीतिक दांव-पेच का संकेत था।
उन्होंने आगे कहा कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच बातचीत अभी भी जारी है। ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में संभावित सहयोग पर भी विचार किया जा रहा है।
कियोसाकी ने बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत के बढ़ते महत्व पर जोर देते हुए अपनी बात समाप्त की- भारत पर बारीकी से नजर रखें।
कियोसाकी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया। इसमें कियोसाकी ने कहा कि ट्रंप-मोदी के बीच यह बातचीत लगभग 40 मिनट तक चली। इस साल इन दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी बातचीत थी। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद से यह दूसरी थी।
उन्होंने आगे कहा कि यह बातचीत बहुत ही सौहार्दपूर्ण माहौल में समाप्त हुई। ट्रंप के शब्दों को कोट करते हुए बताया, 'मैं बस आपको यह बताना चाहता हूं कि हम सभी आपसे बहुत प्यार करते हैं।'
ईरान-इजरायल दोनों में भारत की मौजूदगीकियोसाकी ने ईरान और इजरायल दोनों में अपनी आर्थिक माजूदगी के जरिये भारत की अद्वितीय स्थिति को हाईलाइट किया। ईरान और इजरायल दोनों ही इस संघर्ष में आमने-सामने हैं।
ईरान में भारत ओमान की खाड़ी में स्थित चाबहार बंदरगाह के 'शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल' को ऑपरेट करता है। इस परियोजना में 55 करोड़ डॉलर से अधिक का निवेश किया गया है। इसके संचालन के लिए 10 साल का समझौता है। यह बंदरगाह सेंट्रल एशिया तक भारत की व्यापक कनेक्टिविटी योजनाओं का भी एक हिस्सा है।
इजरायल में अडानी ग्रुप ने 1.2 अरब डॉलर में हाइफा बंदरगाह का अधिग्रहण किया है। भूमध्य सागर पर स्थित यह बंदरगाह पूरी तरह से चालू है। इस क्षेत्र में इसे एक प्रमुख रणनीतिक संपत्ति के रूप में देखा जाता है।
संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से भारत के रिश्तेकियोसाकी के अनुसार, भारत का प्रभाव इस बात से दिखता है कि वह इस संघर्ष में शामिल लगभग सभी पक्षों के साथ कामकाजी संबंध बनाए रखने में सक्षम है। इनमें अमेरिका, ईरान, इजरायल, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, रूस और चीन शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि संकट के शुरुआती 48 घंटों में मोदी ने कूटनीतिक स्तर पर जोरदार सक्रियता दिखाई। उन्होंने पश्चिम एशिया के कई नेताओं से बातचीत की। इसके बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से और बाद में ट्रंप से भी बातचीत की।
कियोसाकी ने मोदी और पेजेश्कियन के बीच हुई बातचीत का भी जिक्र किया। इसमें भारत ने ईरान के साथ अपने संबंधों की दोबारा पुष्टि की थी। उन्होंने बताया कि तेहरान ने भारत के 'संतुलित और रचनात्मक रुख' की सराहना की। नई दिल्ली को ब्रिक्स में अपनी नेतृत्वकारी भूमिका का फायदा उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
वर्तमान में ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है। यह वैश्विक स्तर पर समीकरणों में आ रहे बदलावों के इस दौर में भारत की कूटनीतिक स्थिति को और भी अधिक मजबूत बनाता है।
सोच-समझकर अपनाया है नपा-तुला रुखव्यापक जुड़ाव के बावजूद भारत ने सार्वजनिक तौर पर एक नपा-तुला रुख बनाए रखा है। कियोसाकी ने गौर किया कि नई दिल्ली ने शांति और बातचीत का आह्वान किया है। आम नागरिकों के हताहत होने पर चिंता जताई है। लेकिन, उसने न तो अमेरिका की कार्रवाई की निंदा की है और न ही ईरान के जवाबी हमले की। उन्होंने तर्क दिया कि यह जान-बूझकर अपनाई गई तटस्थता भारत को सभी पक्षों के लिए विश्वसनीय मध्यस्थ बने रहने में मदद करती है।
कियोसाकी ने लिखा, 'कूटनीति में जो देश कुछ नहीं कहता और अपने सभी दरवाजे खुले रखता है, वह अक्सर उस कमरे में सबसे ज्यादा अहमियत रखने वाला देश होता है।'
ट्रंप-मोदी की बातचीत की टाइमिंग पर डाली रोशनीट्रंप और मोदी के बीच हुई बातचीत के समय ने भी सबका ध्यान खींचा। कियोसाकी के अनुसार, यह बातचीत अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू किए जाने के ठीक एक दिन बाद हुई, जो बढ़ते भू-राजनीतिक दांव-पेच का संकेत था।
उन्होंने आगे कहा कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच बातचीत अभी भी जारी है। ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में संभावित सहयोग पर भी विचार किया जा रहा है।
कियोसाकी ने बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत के बढ़ते महत्व पर जोर देते हुए अपनी बात समाप्त की- भारत पर बारीकी से नजर रखें।
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