Reliance New Project: अरबों डॉलर का प्रोजेक्ट खुद लीड कर रहे अंबानी, मस्क हैं इस खेल के सबसे बड़े खिलाड़ी, क्या है रिलायंस का प्लान?
नई दिल्ली: देश की सबसे वैल्यूएबल रिलायंस इंडस्ट्रीज सैटेलाइट कम्युनिकेशंस में बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। अब तक इसमें एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक, ऐमजॉन लियो और दूसरी विदेशी कंपनियों का दबदबा है। लेकिन मुकेश अंबानी इस सेक्टर में अरबों डॉलर निवेश करने पर विचार कर रहे हैं। रिलायंस सैटेलाइट स्पेस में अपना नाम बड़ी कंपनियों में शुमार करना चाहती है। उसकी नजर खासकर लो अर्थ ऑर्बिट सेगमेंट पर है जिसमें काफी संभावनाएं हैं।

ईटी ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। उनका कहना है कि रिलायंस की सैटेलाइट कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के अंडर होगी जो टेलीकॉम और डिजिटल बिजनेस देखती है। इस प्रोजेक्ट के विभिन्न पहलुओं पर काम करने के लिए छह टीमें बनाई गई हैं। इनमें सैटेलाइट, लॉन्च, पेलोड और यूजर टर्मिनल शामिल हैं। सरकार भी सैटकॉम बिजनेस में भारत की मौजूदगी चाहती है क्योंकि विदेशी कंपनियों पर निर्भरता से देश की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
मुकेश अंबानी कर रहे लीड
चीन ने 200,000 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजने के लिए इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) में दरखास्त दी है। कई और देश भी स्पेस सेगमेंट खासकर लो अर्थ ऑर्बिट में भारी निवेश कर रहे हैं। अब भारत की निजी सेक्टर भी इसमें दिलचस्पी दिखा रहा है। एक सूत्र ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। विभिन्न सैटलाइट टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ मीटिंग हो रही हैं जो रिलायंस को सैटेलाइट का बेड़ा तैयार करने में मदद कर सकती हैं।
सूत्रों का कहना है कि रिलायंस ने डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस के साथ भी संपर्क में है ताकि आईटीयू में ऑर्बिटल स्लॉट्स के लिए आवेदन किया जा सके। आईयूटी सैटेलाइट को ऑर्बिटल स्लॉट्स और रेडियो फ्रीक्वेंसी अलॉट करता है। इस प्रोजेक्ट की अगुवाई खुद मुकेश अंबानी कर रहे हैं। साथ ही दूसरे टॉप एग्जीक्यूटिव भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनमें रिलायंस के प्रेजिडेंट पीके भटनागर, जेपीएल के चीफ एग्जीक्यूटिव मैथ्यू ओमेन और जेपीएल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट आयुष भटनागर शामिल हैं। इस बारे में रिलायंस ने सवालों का जवाब नहीं दिया।
भारत का फायदा
एक सूत्र ने कहा कि कंपनी इनऑर्गेनिक ग्रोथ के विकल्प पर भी विचार कर रही है। इसमें ऐसी सैटेलाइट कंपनी को खरीदना शामिल है जिसके पास ऑर्बिटल स्लॉट और तैयार इन्फ्रास्ट्रक्चर हो। सभी तरह के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है क्योंकि जियो को जल्दी से जल्दी इस रेस में शामिल होना है। अभी इसमें एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक का दबदबा है और ऐमजॉन लियो भी तेजी से आगे बढ़ रही है।
इस सेक्टर की अन्य कंपनियों में Eutelsat OneWeb, AST SpaceMobile और Sateliot शामिल हैं। सुनील मित्तल के भारती ग्रुप की Eutelsat में दूसरी बड़ी हिस्सेदारी है। इसमें सबसे बड़ा स्टेक फ्रांसीसी सरकार की है। रिलायंस जियो ने मीडियम अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट फर्म SES के साथ पार्टनरशिप की है। सूत्रों का कहना है कि अभी यह प्रोजेक्ट शुरुआती दौर में है और आने वाले दिनों में इसमें स्थिति साफ हो सकती है। स्वदेशी सैटेलाइट का बेड़ा होने से भारत को विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
ईटी ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। उनका कहना है कि रिलायंस की सैटेलाइट कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के अंडर होगी जो टेलीकॉम और डिजिटल बिजनेस देखती है। इस प्रोजेक्ट के विभिन्न पहलुओं पर काम करने के लिए छह टीमें बनाई गई हैं। इनमें सैटेलाइट, लॉन्च, पेलोड और यूजर टर्मिनल शामिल हैं। सरकार भी सैटकॉम बिजनेस में भारत की मौजूदगी चाहती है क्योंकि विदेशी कंपनियों पर निर्भरता से देश की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
मुकेश अंबानी कर रहे लीड
चीन ने 200,000 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजने के लिए इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) में दरखास्त दी है। कई और देश भी स्पेस सेगमेंट खासकर लो अर्थ ऑर्बिट में भारी निवेश कर रहे हैं। अब भारत की निजी सेक्टर भी इसमें दिलचस्पी दिखा रहा है। एक सूत्र ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। विभिन्न सैटलाइट टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ मीटिंग हो रही हैं जो रिलायंस को सैटेलाइट का बेड़ा तैयार करने में मदद कर सकती हैं।
सूत्रों का कहना है कि रिलायंस ने डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस के साथ भी संपर्क में है ताकि आईटीयू में ऑर्बिटल स्लॉट्स के लिए आवेदन किया जा सके। आईयूटी सैटेलाइट को ऑर्बिटल स्लॉट्स और रेडियो फ्रीक्वेंसी अलॉट करता है। इस प्रोजेक्ट की अगुवाई खुद मुकेश अंबानी कर रहे हैं। साथ ही दूसरे टॉप एग्जीक्यूटिव भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनमें रिलायंस के प्रेजिडेंट पीके भटनागर, जेपीएल के चीफ एग्जीक्यूटिव मैथ्यू ओमेन और जेपीएल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट आयुष भटनागर शामिल हैं। इस बारे में रिलायंस ने सवालों का जवाब नहीं दिया।
भारत का फायदा
एक सूत्र ने कहा कि कंपनी इनऑर्गेनिक ग्रोथ के विकल्प पर भी विचार कर रही है। इसमें ऐसी सैटेलाइट कंपनी को खरीदना शामिल है जिसके पास ऑर्बिटल स्लॉट और तैयार इन्फ्रास्ट्रक्चर हो। सभी तरह के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है क्योंकि जियो को जल्दी से जल्दी इस रेस में शामिल होना है। अभी इसमें एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक का दबदबा है और ऐमजॉन लियो भी तेजी से आगे बढ़ रही है।
इस सेक्टर की अन्य कंपनियों में Eutelsat OneWeb, AST SpaceMobile और Sateliot शामिल हैं। सुनील मित्तल के भारती ग्रुप की Eutelsat में दूसरी बड़ी हिस्सेदारी है। इसमें सबसे बड़ा स्टेक फ्रांसीसी सरकार की है। रिलायंस जियो ने मीडियम अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट फर्म SES के साथ पार्टनरशिप की है। सूत्रों का कहना है कि अभी यह प्रोजेक्ट शुरुआती दौर में है और आने वाले दिनों में इसमें स्थिति साफ हो सकती है। स्वदेशी सैटेलाइट का बेड़ा होने से भारत को विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
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