India Crude Oil Production: लगातार 11वें साल कच्चे तेल का प्रोडक्शन फिसला, गैस के मोर्चे पर भी बुरा हाल, भारत के लिए मतलब

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नई दिल्‍ली: भारत का कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) उत्पादन 2025-26 में लगातार 11वें साल गिरा है। नैचुरल गैस प्रोडक्‍शन में भी लगातार दूसरे साल गिरावट आई है। उत्पादन में यह गिरावट मुख्य रूप से पुराने तेल क्षेत्रों के खाली होने और नए बड़े तेल क्षेत्रों की खोज न होने के कारण हुई है। यह आयात पर भारी निर्भरता को दिखाता है।

उत्‍पादन में इस गिरावट का मतलब
  • घरेलू उत्पादन में लगातार कमी के कारण आयात पर निर्भरता बढ़ गई है।
  • इस साल कच्चे तेल के लिए आयात पर निर्भरता बढ़कर 89 फीसदी हो गई।
  • वहीं, प्राकृतिक गैस की बात करें तो यह उसके लिए 51 फीसदी रही।

अमेरिका-ईरान युद्ध ने और बिगाड़ी स्थितिअमेरिका-ईरान युद्ध ने इस कमजोरी को और उजागर किया है। कारण है कि तेल की सप्‍लाई हासिल करना ज्‍यादा मुश्किल हो गया है। रिफाइनरियों को तेल के जहाजों के लिए ज्‍यादा कीमतें चुकानी पड़ी रही है। फिर भी मार्च में उन्हें तेल की कमी का सामना करना पड़ा।
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तेल और गैस प्रोडक्‍शन बढ़ाने में नाकामी क्‍यों?पिछले कुछ सालों में सरकार ने कई सुधार लागू किए हैं। इनका मकसद तेल की खोज से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इनमें एक राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक डेटा भंडार (नेशनल जियोलॉजिकल डेटा रिपॉजिटरी) स्थापित करना, नियामक और पर्यावरणीय मंजूरियों को आसान बनाना और ऐसे फाइनेंशियल फ्रेमवर्क पेश करना शामिल है जो तेल खोज करने वाली कंपनियों को मुनाफे में ज्‍यादा हिस्सा देते हैं।

हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद दुनिया भर की तेल कंपनियों ने इस क्षेत्र में बहुत कम दिलचस्पी दिखाई है। ये पूंजी और आधुनिक तकनीक दोनों लाने के लिए जानी जाती हैं। ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में हुए ज्‍यादातर लाइसेंसिंग राउंड में घरेलू सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का ही दबदबा रहा है।

2014-15 से 22% गिरावटपेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में कच्चे तेल का उत्पादन 2.5 फीसदी लुढ़का। यह लुढ़ककर 2.8 करोड़ टन रह गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2014-15 से अब तक कुल मिलाकर 22 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। तब उत्पादन में गिरावट का यह सिलसिला शुरू हुआ था।

देश में प्राकृतिक गैस का उत्पादन 2025-26 में 3.7 फीसदी गिरा है। यह गिरकर 34,776 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (mmscm) रह गया। लंबे समय के आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्पादन में लगातार गिरावट देखने को मिली है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से संचालित KG-D6 क्षेत्र से उत्पादन में अचानक आई गिरावट के कारण 2011-12 के 47,555 mmscm के स्तर से उत्पादन गिरकर 2020-21 में 28,672 mmscm रह गया। यह 40 फीसदी की गिरावट है।

हालांकि, उसी ब्लॉक में नए फील्ड्स के चालू होने से 2021–22 में राष्ट्रीय उत्पादन में साल-दर-साल 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। लेकिन, इन एसेट्स से उत्पादन तब से स्थिर हो गया है। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन की ओर से संचालित पुरानी फील्ड्स से घटते उत्पादन के साथ मिलकर इसने कुल गैस उत्पादन पर दबाव बनाए रखा है।

गिरावट की सबसे बड़ी वजहएक इंडस्ट्री एग्जीक्यूटिव ने इस लगातार गिरावट का मुख्य कारण पिछले एक दशक में किसी भी बड़ी खोज का न होना बताया। तेल और गैस के भंडार समय के साथ स्वाभाविक रूप से कम होते जाते हैं। जब तक नई खोजों को विकसित नहीं किया जाता, उत्पादन के स्तर को बनाए रखना लगातार मुश्किल होता जाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि कंपनियों ने उन संसाधनों का व्यवसायीकरण करने में पर्याप्त तेजी नहीं दिखाई है जिनकी पहचान वे पहले ही कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगर विकास कार्य तेजी से किया गया होता तो उत्पादन के स्तर को बनाए रखने में मदद मिल सकती थी।

एक अन्य इंडस्ट्री एग्जीक्यूटिव ने कहा कि नीतिगत अनिश्चितता को लेकर चिंताओं के साथ संसाधनों की अपेक्षाकृत सीमित संभावनाओं ने भी निवेश को हतोत्साहित किया है। उन्होंने आगे कहा कि भारत में तेल और गैस उत्पादन को फिर से पटरी पर लाने के लिए खोज कार्यों पर भारी मात्रा में नए निवेश की जरूरत होगी।