Indian Mangoes Export: गाइज, भारतीय आम का क्रेज छा गया है... विदेशों में बढ़ रही फलों के राजा की डिमांड, अल्फांसो का राज बरकरार
नई दिल्ली: भारतीय आम एक बार फिर वैश्विक बाजारों में धूम मचा रहे हैं। बढ़ते एक्सपोर्ट, प्रीमियम कीमतों और विदेशों में बसे भारतीयों के साथ-साथ विदेशी उपभोक्ताओं के बीच बढ़ती लोकप्रियता ने भारतीय आम के एक्सपोर्ट को नई बुलंदियों पर पहुंचा दिया है। खाड़ी देशों से लेकर यूरोप, सिंगापुर और अमेरिका तक भारतीय आमों को 'प्रीमियम सीजनल फ्रूट' के रूप में हाथों-हाथ लिया जा रहा है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है, जो वैश्विक उत्पादन में लगभग आधी हिस्सेदारी रखता है। बिजनेस टुडे के मुताबिक देश की बड़ी आबादी खुद इस फसल का एक बड़ा हिस्सा खा जाती है। इसके बाद भी हाल के वर्षों में बेहतर लॉजिस्टिक्स, इरेडिएशन सुविधाओं और कोल्ड-चेन नेटवर्क के सुधरने से निर्यात में जबरदस्त तेजी आई है।
कमाई का नया रिकॉर्डएग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी ( APEDA ) के डेटा के अनुसार, भारत ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 29,938 मीट्रिक टन ताजे आमों का एक्सपोर्ट किया, जिससे 470 करोड़ रुपये से अधिक का एक्सपोर्ट रेवेन्यू हासिल हुआ।
विदेशी बाजारों में भारी डिमांड सिंगापुर में मची होड़
यूएई सबसे बड़ा खरीदार
अल्फांसो बना पहली पसंदमहाराष्ट्र का अल्फांसो आम अपनी बेहतरीन सुगंध और मखमली बनावट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब भी 'आमों का राजा' बना हुआ है। एक्सपोर्टर्स का कहना है कि अब वैश्विक खरीदार दूसरी किस्मों को भी तरजीह दे रहे हैं। गुजरात का केसर, दक्षिण भारत का तोतापरी और उत्तर भारत का लंगड़ा व चौसा विदेशी उपभोक्ताओं को खूब पसंद आ रहा है।
कैसे बदला पूरा एक्सपोर्ट इकोसिस्टम?पिछले एक दशक में भारत का आम निर्यात इकोसिस्टम काफी आधुनिक हुआ है। भारतीय निर्यातक अब बेहतर पैकेजिंग, पकाने के बुनियादी ढांचे और पश्चिमी देशों द्वारा मांगे जाने वाले सख्त फाइटोसैनिटरी मानकों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं।
विदेशों में मौजूद भारतीय दूतावासों और APEDA ने फूड फेस्टिवल्स और बड़े रिटेल स्टोर्स के साथ टाइ-अप करके विदेशी सुपरमार्केटों में भारतीय आमों की ब्रांडिंग मजबूत की है। इस भारी मांग के बावजूद निर्यातकों को आम की फसल का छोटा सीजन, हवाई माल ढुलाई की ऊंची लागत और कुछ देशों के कड़े आयात नियमों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है, जो वैश्विक उत्पादन में लगभग आधी हिस्सेदारी रखता है। बिजनेस टुडे के मुताबिक देश की बड़ी आबादी खुद इस फसल का एक बड़ा हिस्सा खा जाती है। इसके बाद भी हाल के वर्षों में बेहतर लॉजिस्टिक्स, इरेडिएशन सुविधाओं और कोल्ड-चेन नेटवर्क के सुधरने से निर्यात में जबरदस्त तेजी आई है।
कमाई का नया रिकॉर्डएग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी ( APEDA ) के डेटा के अनुसार, भारत ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 29,938 मीट्रिक टन ताजे आमों का एक्सपोर्ट किया, जिससे 470 करोड़ रुपये से अधिक का एक्सपोर्ट रेवेन्यू हासिल हुआ।
विदेशी बाजारों में भारी डिमांड सिंगापुर में मची होड़
- हाल ही में भारत में सिंगापुर उच्चायोग के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने इस उत्साह को बयां किया।
- पोस्ट में लिखा है, 'गाइज, सिंगापुर में भारतीय आम का क्रेज छा गया है। भारत के विभिन्न राज्यों के आम सिंगापुर के सुपरमार्केट्स से फटाफट गायब हो रहे हैं।'
यूएई सबसे बड़ा खरीदार
- खाड़ी देशों में भारतीय आमों की मांग सबसे ज्यादा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सबसे बड़ा खरीदार है।
- APEDA के अनुसार, अकेले साल 2024 में भारत ने यूएई को 20 मिलियन डॉलर की कीमत के 12,000 मीट्रिक टन से अधिक आम निर्यात किए थे।
- खाड़ी देशों के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, कतर, कुवैत आदि देशों में भी मांग तेजी से बढ़ी है।
अल्फांसो बना पहली पसंदमहाराष्ट्र का अल्फांसो आम अपनी बेहतरीन सुगंध और मखमली बनावट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब भी 'आमों का राजा' बना हुआ है। एक्सपोर्टर्स का कहना है कि अब वैश्विक खरीदार दूसरी किस्मों को भी तरजीह दे रहे हैं। गुजरात का केसर, दक्षिण भारत का तोतापरी और उत्तर भारत का लंगड़ा व चौसा विदेशी उपभोक्ताओं को खूब पसंद आ रहा है।
- APEDA के मुताबिक, केसर जैसी किस्में उन इंटरनेशनल मार्केट में काफी लोकप्रिय हो रही हैं जो कीमत को लेकर संवेदनशील हैं, क्योंकि ये प्रीमियम अल्फांसो के मुकाबले काफी किफायती हैं।
- प्रीमियम जीआई-टैग्ड (GI-tagged) आमों को भी विदेशों में जमकर प्रमोट किया जा रहा है।
- जुलाई 2025 में APEDA ने अबू धाबी में 'इंडियन मैंगो मेनिया 2025' का आयोजन किया था, जहां वैश्विक उपभोक्ताओं के सामने भारत के प्रीमियम आमों की प्रदर्शनी लगाई गई थी।
कैसे बदला पूरा एक्सपोर्ट इकोसिस्टम?पिछले एक दशक में भारत का आम निर्यात इकोसिस्टम काफी आधुनिक हुआ है। भारतीय निर्यातक अब बेहतर पैकेजिंग, पकाने के बुनियादी ढांचे और पश्चिमी देशों द्वारा मांगे जाने वाले सख्त फाइटोसैनिटरी मानकों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं।
विदेशों में मौजूद भारतीय दूतावासों और APEDA ने फूड फेस्टिवल्स और बड़े रिटेल स्टोर्स के साथ टाइ-अप करके विदेशी सुपरमार्केटों में भारतीय आमों की ब्रांडिंग मजबूत की है। इस भारी मांग के बावजूद निर्यातकों को आम की फसल का छोटा सीजन, हवाई माल ढुलाई की ऊंची लागत और कुछ देशों के कड़े आयात नियमों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
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