कच्चा हरा नारियल फल है, सूख गया तो क्या? इस पर लगने वाले टैक्स को लेकर सुप्रीम ने सब कर दिया क्लियर

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नई दिल्ली: हमारे देश में किसी भी ताजे और हरे फल व सब्जी पर किसी भी प्रकार का कोई टैक्स नहीं लगता है। वहीं जब फल का रंग-रूप बदल जाता है, तो टैक्स संबंधी नियम बदल जाते हैं। कई बार इन नियमों को लेकर लड़ाई कोर्ट तक भी पहुंच जाती है। ताजा मामला नारियल से जुड़ा है। गुजरात में ऐसी ही मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। विवाद इस बात को लेकर था कि क्या नारियल को 'ताजे हरे फल' की श्रेणी में रखकर टैक्स से छूट दी जा सकती है।
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कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?मामला अहमदाबाद नगर निगम के ऑक्ट्रॉय यानी चुंगी टैक्स नियमों से जुड़ा था। निगम के नियमों के तहत कुछ जरूरी वस्तुओं को ऑक्ट्रॉय से पूरी तरह छूट दी गई थी। इनमें 'ग्रीन/फ्रेश फ्रूट्स' यानी हरे या ताजे फल भी शामिल थे।

शुरुआत में शहर की सीमा में लाए जाने वाले नारियल पर 100 किलो के लिए 1 रुपये का मामूली टैक्स लगाया जाता था। बाद में जब यह दर बढ़ाकर 5 रुपये प्रति 100 किलो कर दी गई, तो नारियल कारोबारियों ने इसका विरोध किया। कारोबारियों का तर्क था कि नारियल ताजा कृषि उपज है और इसे 'ग्रीन फ्रूट' की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। इसलिए इस पर ऑक्ट्रॉय टैक्स नहीं लगना चाहिए। नगर निगम ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और मामला अदालत पहुंच गया।


हाई कोर्ट से भी नहीं मिली राहतगुजरात हाई कोर्ट ने कारोबारियों की दलील को खारिज करते हुए माना कि पका हुआ भूरा नारियल 'ग्रीन फ्रूट' की श्रेणी में नहीं आता। इसके बाद कारोबारियों ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह था कि टैक्स कानून में नारियल को किस श्रेणी में रखा जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया 'कॉमन पार्लेंस टेस्ट'सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केवल वनस्पति विज्ञान की तकनीकी परिभाषा को आधार नहीं बनाया। अदालत ने 'कॉमन पार्लेंस टेस्ट' यानी आम बोलचाल और बाजार में किसी वस्तु की सामान्य पहचान को महत्वपूर्ण माना।

अदालत ने इस बात पर विचार किया कि अगर किसी व्यक्ति को बाजार से ताजे फल या सब्जियां खरीदने के लिए भेजा जाए, तो क्या वह सामान्य तौर पर भूरे छिलके वाला पका नारियल लेकर लौटेगा? अदालत का निष्कर्ष था कि रोजमर्रा के व्यावसायिक इस्तेमाल में पके हुए भूरे नारियल को सामान्य तौर पर ताजे खाने वाले फल या घरेलू सब्जी के रूप में नहीं देखा जाता।

आखिर नारियल है क्या?वनस्पति विज्ञान की दृष्टि से नारियल एक फल है। इसे तकनीकी रूप से 'ड्रूप' कहा जाता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टैक्स कानून में किसी वस्तु की श्रेणी तय करते समय केवल उसकी वैज्ञानिक या वनस्पति संबंधी परिभाषा ही निर्णायक नहीं होती।

बाजार में पके हुए नारियल का इस्तेमाल तेल निकालने, किराना उत्पाद के तौर पर और धार्मिक कार्यों में भी होता है। इसलिए इसे 'ताजे फल' की टैक्स छूट वाली श्रेणी में रखना उचित नहीं माना गया।

क्या नारियल 'ड्राई फ्रूट' है?कारोबारियों की ओर से एक वैकल्पिक दलील यह भी दी गई कि अगर नारियल को ताजा फल नहीं माना जाता, तो इसे ड्राई फ्रूट की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। अदालत ने इस तर्क को भी स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने माना कि ड्राई फ्रूट एक अलग श्रेणी है और पके हुए नारियल को केवल ताजे फल की श्रेणी से बाहर होने के कारण ड्राई फ्रूट नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?सुप्रीम कोर्ट ने कारोबारियों की अपील खारिज कर दी। यानी पके हुए नारियल को 'ग्रीन/फ्रेश फ्रूट' की टैक्स छूट वाली श्रेणी में नहीं माना गया और उस पर लागू बिक्री कर तथा ऑक्ट्रॉय से संबंधित नियमों को बरकरार रखा गया।

फलों और सब्जियों पर टैक्स नियम क्या?भारत में ताजे, बिना पैक और प्रिजर्व्ड फलों व सब्जियों पर किसी भी प्रकार का कोई टैक्स नहीं लगता। वहीं ड्राई फ्रूट्स, नट्स, फ्रोजन फ्रूट्स पर 5 फीसदी जीएसटी लगता है। वहीं जैम, पल्प और जूस पर भी 5 फीसदी जीएसटी है। सब्जियों की बात करें तो प्रोसेस्ड, प्रिपेयर्ड और प्रिजर्व्ड (जैसे डिब्बाबंद या अचार वाली सब्जियां) सब्जियों पर 5 फीसदी जीएसटी देना होता है।