Fuel Price Hike: इन 3F पर निर्मला सीतारमण ने की फोकस करने की अपील, 1 लाख करोड़ के नुकसान का फैक्टर बताया

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नई दिल्‍ली: पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने से करीब 1 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू का नुकसान होगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को यह बात कही। उन्होंने लोगों में भरोसा जगाने की जरूरत पर भी जोर दिया। कहा कि भारत डर फैलाने वाली बातों को बर्दाश्त नहीं कर सकता। वित्त मंत्री ने 3F यानी फ्यूल, फर्टिलाइजर और फॉरेक्‍स (विदेशी मुद्रा) पर फोकस करने की अपील की है।
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क्यों महत्वपूर्ण है सीतारमण की यह प्रतिक्रिया?
  • सीतारमण का यह बयान तब आया जब ईंधन की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हुई।
  • यह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 10 दिनों में चौथी बढ़ोतरी थी।
  • सोमवार को पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया।
  • इससे घरेलू बजट और ट्रांसपोर्ट खर्च पर और दबाव बढ़ गया।

SIDBI की 37वीं वर्षगांठ पर पहुंची थीं सीतारमण
वित्त मंत्री भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) की 37वीं वर्षगांठ के मौके पर पहुंची थीं। सीतारमण ने उस बढ़ती 'निराशावादी सोच' की आलोचना की, जिसे उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद कुछ आलोचकों की ओर से फैलाया जा रहा बताया। उन्होंने कहा कि देश डर फैलाने वाली बातों को बर्दाश्त नहीं कर सकता। उन्‍होंने नागरिकों में शब्दों और कामों दोनों के जरिए भरोसा जगाने की जरूरत पर जोर दिया। पीएम मोदी ने हाल में लोगों से गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करने की अपील की थी।

3F पर की फोकस करने की अपील
मिडिल ईस्‍ट संकट तीन महीने पूरे होने के करीब पहुंच रहा है। इस देखते हुए वित्त मंत्री ने '3Fs' यानी फ्यूल, फर्टिलाइजर और फॉरेक्‍स (विदेशी मुद्रा) पर फोकस करने की अपील की। साथ ही यह भी कहा कि ग्‍लोबल अनिश्चितता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। वित्त मंत्री सीतारमण ने बढ़ते वैश्विक दबावों की ओर भी इशारा किया। कहा कि उर्वरक की कीमतें 'अकल्पनीय' स्तर तक पहुंच गई हैं। जबकि सोने की ऊंची कीमतें बाहरी मोर्चे पर 'कुछ चुनौतियां' पैदा कर रही हैं।

डर फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता भारत
वित्त मंत्री ने आगे कहा कि यह कदम बाहरी झटकों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यापक नजरिये के अनुरूप है। साथ ही, उन्होंने बढ़ा-चढ़ाकर फैलाई जा रही नकारात्मकता को भी खारिज कर दिया। कहा कि कुछ 'आलोचक' स्थिति को ऐसे दिखा रहे हैं जैसे सब कुछ 'बिखर रहा है'। जबकि उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है।

सीतारमण ने कहा, 'आम लोगों की ओर से जो भी अच्छा काम किया जा रहा है, उसे भुला दिया जाता है। एक निराशावादी, संशयवादी सोच पैदा की जाती है, जो बिल्कुल भी सही नहीं है।'

वित्त मंत्री बोलीं, 'हमें यह समझना चाहिए कि चुनौतियां ज्‍यादातर बाहरी कारणों से हैं। हमें यह भी मानना चाहिए कि भारत की घरेलू आर्थिक स्थिति आज भी सकारात्मक और मजबूत बनी हुई है।'

निर्मला सीतारमण के अनुसार, 'भारत डर फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता। हमें अपने शब्दों और अपने कामों से लोगों में भरोसा जगाना होगा।'

उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ लोग पश्चिम एशिया संकट से पैदा हुई चुनौतियों के बीच हमारी अपनी उपलब्धियों की बुराई करने की कोशिश कर रहे हैं।

MSME की चिंताओं पर दिया जोरसीतारमण ने MSME को देर से होने वाले भुगतानों में फंसे 8.1 लाख करोड़ रुपये पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे वर्किंग कैपिटल और विकास पर असर पड़ रहा है। उन्होंने पब्लिक सेक्टर की कंपनियों से अपील की कि वे यह सुनिश्चित करें कि MSME को 45 दिनों की समय सीमा के अंदर भुगतान कर दिया जाए।

हाल की कीमतों में बढ़ोतरी से पहले सरकार ने अपने फ्यूल ड्यूटी स्ट्रक्चर में बदलाव किया था। इसके तहत पेट्रोल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दी गई थी। डीजल पर इसे पूरी तरह से हटा दिया गया था। यह कदम मिडिल ईस्‍ट में जारी संघर्ष के कारण ग्लोबल तेल सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों के बीच उठाया गया है। इस संघर्ष के चलते होर्मुज स्ट्रेट के आस-पास तनाव बना हुआ है। इसका असर एनर्जी सप्लाई पर पड़ रहा है।

जब से 28 फरवरी को मिडिल ईस्‍ट संघर्ष शुरू हुआ है, तब से होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते होने वाली जरूरी एनर्जी सप्लाई में रुकावट बनी हुई है। इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।