ATM से उड़ गए ₹80000, SBI नहीं दे पाया CCTV फुटेज, कंज्यूमर कोर्ट का आदेश- ग्राहक को ₹1.30 लाख लौटाओ
नई दिल्ली: दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Delhi State Consumer Commission) ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने जिला कंज्यूमर फोरम के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें एसबीआई को पीड़ित ग्राहक को 1.30 लाख रुपये का भुगतान 6% ब्याज के साथ करने का निर्देश दिया गया था।
साल 2018 में ग्राहक के बैंक अकाउंट से बिना अनुमति के चार बार में 80,000 रुपये की एटीएम निकासी और 50,000 रुपये का ऑनलाइन ट्रांसफर हुआ था। बैंक न तो इन लेनदेन का प्रमाण दे सका और न ही एटीएम का सीसीटीवी फुटेज पेश कर पाया।

मामला है पूरा मामला?सरकारी स्कूल में लैब असिस्टेंट के पद पर कार्यरत ग्राहक का साल 2002 से एसबीआई में बैंक अकाउंट था। 11 अक्टूबर 2018 को सैलरी आने के बाद उनके खाते में कुल 1,30,012 रुपये का बैलेंस था। 22 अक्टूबर 2018 को जब उन्होंने एटीएम से पैसे निकालने की कोशिश की, तो बैलेंस कम होने के कारण ट्रांजेक्शन फेल हो गया।
जब उन्होंने पासबुक अपडेट कराई तो बैंक अकाउंट से निकले पैसों के बारे में पता चला। 12 अक्टूबर 2018 को एटीएम से 20-20 हजार रुपये करके 4 बार में कुल 80 हजार रुपये निकाले गए थे। उसी दिन किसी सोनू नाम के व्यक्ति के खाते में 40,000 रुपये और 10,000 रुपये (कुल 50,000 रुपये) ट्रांसफर किए गए थे।
बैंक में दर्ज कराई शिकायतपीड़ित ने 22 अक्टूबर को ही तुरंत बैंक में लिखित शिकायत दर्ज कराई और मयूर विहार फेज-I थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई। लेकिन बैंक और पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद ग्राहक ने उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया।
SBI की अपील हुई खारिज
साल 2018 में ग्राहक के बैंक अकाउंट से बिना अनुमति के चार बार में 80,000 रुपये की एटीएम निकासी और 50,000 रुपये का ऑनलाइन ट्रांसफर हुआ था। बैंक न तो इन लेनदेन का प्रमाण दे सका और न ही एटीएम का सीसीटीवी फुटेज पेश कर पाया।
मामला है पूरा मामला?सरकारी स्कूल में लैब असिस्टेंट के पद पर कार्यरत ग्राहक का साल 2002 से एसबीआई में बैंक अकाउंट था। 11 अक्टूबर 2018 को सैलरी आने के बाद उनके खाते में कुल 1,30,012 रुपये का बैलेंस था। 22 अक्टूबर 2018 को जब उन्होंने एटीएम से पैसे निकालने की कोशिश की, तो बैलेंस कम होने के कारण ट्रांजेक्शन फेल हो गया।
जब उन्होंने पासबुक अपडेट कराई तो बैंक अकाउंट से निकले पैसों के बारे में पता चला। 12 अक्टूबर 2018 को एटीएम से 20-20 हजार रुपये करके 4 बार में कुल 80 हजार रुपये निकाले गए थे। उसी दिन किसी सोनू नाम के व्यक्ति के खाते में 40,000 रुपये और 10,000 रुपये (कुल 50,000 रुपये) ट्रांसफर किए गए थे।
बैंक में दर्ज कराई शिकायतपीड़ित ने 22 अक्टूबर को ही तुरंत बैंक में लिखित शिकायत दर्ज कराई और मयूर विहार फेज-I थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई। लेकिन बैंक और पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद ग्राहक ने उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया।
SBI की अपील हुई खारिज
- कंज्यूमर कोर्ट ने बैंक की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि समय पर लिखित शिकायत मिलने के बावजूद बैंक ने न तो संबंधित एटीएम का CCTV फुटेज सुरक्षित रखा और न ही कोर्ट के सामने पेश किया।
- बैंक के पास इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन लॉग, एटीएम जर्नल और स्विच रिकॉर्ड होते हैं। लेकिन बैंक यह साबित नहीं कर सका कि यह लेन-देन असली ग्राहक द्वारा ही अधिकृत था।
- ग्राहक का डेबिट कार्ड कभी खोया नहीं था और न ही उन्होंने इसे किसी को दिया था। ऐसे में बैंक को यह स्पष्ट करना चाहिए था कि क्या कार्ड की क्लोनिंग या स्किमिंग हुई थी।
- बैंक यह भी नहीं बता पाया कि 50,000 रुपये का फंड ट्रांसफर किसके कहने पर और कैसे हुआ, क्योंकि ग्राहक ने बैंक ब्रांच जाने या कोई ट्रांसफर वाउचर भरने से साफ इनकार किया था।
Next Story