Ola Driver ने गलत रूट लिया, गंतव्य से 25 KM दूर हाईवे पर छोड़ दिया, कोर्ट ने दिलवाया 55000 का हर्जाना
नई दिल्ली: कहीं आने-जाने के लिए आप भी ओला (Ola Cabs) या किसी अन्य ऐप बेस्ड ऑटो-टैक्सी सेवा का उपयोग करते हैं तो आप इसे आसानी से समझ सकते हैं। आंध्र प्रदेश की एक महिला ने कहीं जाने के लिए ओला ऑटो (Ola Auto) की बुकिंग की। ड्राइवर ने सही जगह पहुंचाने के बजाय गंतव्य से करीब 25 किलोमीटर दूर हाईवे पर ले जा जाकर छोड़ दिया। उसने उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) का दरवाजा खटखटाया और वहां से न्याय हासिल किया।

क्या है मामला
हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की एक रिपोर्ट के अनुसार यह मामला आंध्र प्रदेश की रहने वाली उलाजी चेनम्मा (Ullaji Chennamma) से जुड़ा है। उसने 11 अक्टूबर 2025 को सुबह 07.08 बजे गुंटूर के पोट्टुर वारी थोट्टा (Pottur Vari Thota) से आचार्य नागार्जुन यूनिवर्सिटी तक जाने के लिए ओला ऑटो बुक (Ola Auto Booking) किया। वहां उन्हें स्टेट ज्यूडिशियल सर्विस का मेन्स एक्जाम देना था। उनके साथ उनकी मां भी थी। जब ड्राइवर ऑटो लेकर आया तो उसमें रजिस्ट्रेशन नंबर बुकिंग ऐप पर दिखाए गए नंबर से अलग था। इसके बावजूद ड्राइवर ने उन्हें राइड शुरू करने के लिए ओटीपी शेयर (OTP Share) करने को कहा। खैर, वह ऑटो में बैठ गई। लेकिन ड्राइवर ने सही रूट लेने के बजाय जान-बूझ कर गंतव्य से करीब 25 किलोमीटर दूर ले गया। वहां उनसे गंतव्य तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त राशि की मांग की। उस महिला ने ऐसा करने से मना किया तो उसे 07.28 बजे वहीं उतार दिया। यही नहीं, ड्रावइर ने राइड कैंसिल करने का भी दवाब डाला।
उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया
चेनम्मा ने इसके बाद कुरनूल के उपभोक्ता फोरम (District Consumer Disputes Redressal Commission) का दरवाजा खटखटाया। वहां ओला ने दलील दी कि वह इसके लिए जिम्मेदार नहीं है। वह सिर्फ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म चलाता है। सेवा देनेा वाला कोई स्वतंत्र थर्ड पार्टी ड्राइवर है। लेकिन फोरम ने इस दलील को खारिज करते हुए इसके लिए ओला कंपनी को ही जिम्मेदार ठहराया।
कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
क्या है मामला
हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की एक रिपोर्ट के अनुसार यह मामला आंध्र प्रदेश की रहने वाली उलाजी चेनम्मा (Ullaji Chennamma) से जुड़ा है। उसने 11 अक्टूबर 2025 को सुबह 07.08 बजे गुंटूर के पोट्टुर वारी थोट्टा (Pottur Vari Thota) से आचार्य नागार्जुन यूनिवर्सिटी तक जाने के लिए ओला ऑटो बुक (Ola Auto Booking) किया। वहां उन्हें स्टेट ज्यूडिशियल सर्विस का मेन्स एक्जाम देना था। उनके साथ उनकी मां भी थी। जब ड्राइवर ऑटो लेकर आया तो उसमें रजिस्ट्रेशन नंबर बुकिंग ऐप पर दिखाए गए नंबर से अलग था। इसके बावजूद ड्राइवर ने उन्हें राइड शुरू करने के लिए ओटीपी शेयर (OTP Share) करने को कहा। खैर, वह ऑटो में बैठ गई। लेकिन ड्राइवर ने सही रूट लेने के बजाय जान-बूझ कर गंतव्य से करीब 25 किलोमीटर दूर ले गया। वहां उनसे गंतव्य तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त राशि की मांग की। उस महिला ने ऐसा करने से मना किया तो उसे 07.28 बजे वहीं उतार दिया। यही नहीं, ड्रावइर ने राइड कैंसिल करने का भी दवाब डाला।
उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया
चेनम्मा ने इसके बाद कुरनूल के उपभोक्ता फोरम (District Consumer Disputes Redressal Commission) का दरवाजा खटखटाया। वहां ओला ने दलील दी कि वह इसके लिए जिम्मेदार नहीं है। वह सिर्फ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म चलाता है। सेवा देनेा वाला कोई स्वतंत्र थर्ड पार्टी ड्राइवर है। लेकिन फोरम ने इस दलील को खारिज करते हुए इसके लिए ओला कंपनी को ही जिम्मेदार ठहराया।
कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
- कोर्ट ने ओला कंपनी को आदेश दिया कि वह उस महिला यात्री को 50,000 रुपये का हर्जाना दे।
- वह ओला के ड्राइवर के कृत्य की वजह से रास्ते में फंस गई।
- उसे आंध्र प्रदेश जूनियर सिविल जज मेन्स परीक्षा में शाामिल होना था।
- कोर्ट ने ओला को मानसिक पीड़ा, भावनात्मक तनाव और कठिनाइयों के लिए 50,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
- इसके साथ ही मुकदमे की लागत के रूप में 5,000 रुपये भी देने को भी कहा।
- मतलब कि ओला को कुल 55,000 रुपये का फटका लगा।
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