India GDP Ranking: रफ्तार का बादशाह, फिर भी पीछे जा रहा है, भारत के फिसलकर छठे पायदान पर पहुंचने की कहानी
नई दिल्ली: 2025–26 की ग्लोबल जीडीपी रैंकिंग में भारत फिसलकर छठे स्थान पर आ गया है। यह और बात है कि वह अभी भी सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के ताजा अनुमानों से यह बात सामने आई है। यह बदलाव तब हुआ है जब पिछले साल भारत ने कुछ समय के लिए जापान को पीछे छोड़कर चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल कर लिया था। हालांकि, रैंकिंग में यह गिरावट आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती के कारण नहीं है। इसके बजाय सांख्यिकीय और बाहरी फैक्टर्स के कॉम्बिनेशन के कारण हुई है।

इस बदलाव की मुख्य वजह यह है कि ग्लोबल जीडीपी को किस तरह मापा जाता है।
रैंकिंंग में नीचे खिसकने की वजह
जापानी और ब्रिटेन के बाद आ गया है नंबर
इससे यह बात समझ में आती है कि भारत की जीडीपी अब ब्रिटेन के 4 ट्रिलियन डॉलर और जापान के 4.44 ट्रिलियन डॉलर से पीछे क्यों है। भारत का 2025 के लिए अनुमान 3.92 ट्रिलियन डॉलर है।
एक साल पहले भारत की 3.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था ब्रिटेन की 3.4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से बड़ी थी।
और कौन से फैक्टर जिन्होंने रैंकिंंग को पहुंचाई चोट
इस बदलाव के पीछे दूसरा फैक्टर भारत के जीडीपी डेटा में किया गया संशोधन है। इस साल की शुरुआत में आधार वर्ष को 2011–12 से बदलकर 2022–23 कर दिया गया। साथ ही कार्यप्रणाली में भी बदलाव किए गए। संशोधित सीरीज पहले के अनुमानों की तुलना में एक छोटी अर्थव्यवस्था को दर्शाती है।
उदाहरण के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए नॉमिनल जीडीपी को 357 ट्रिलियन डॉलर से घटाकर 345.5 ट्रिलियन डॉलर कर दिया गया। कुल मिलाकर आधिकारिक डेटा पिछले कुछ सालों के लिए 2.8% से 3.8% के बीच की गिरावट को दर्शाता है। इसका असर आईएमएफ के कम अनुमानों पर भी पड़ा है।
करेंसी के दबाव ने भी डाला असर
मुद्रा संबंधी दबावों ने भी रैंकिंग को और प्रभावित किया है। वैश्विक स्तर पर तेल की ऊंची कीमतों, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी पूंजी के आउटफ्लो के बीच रुपया लगातार दबाव में रहा है। हाल ही में यह 94–95 रुपये प्रति डॉलर के दायरे में कारोबार कर रहा था। अब 93.39 रुपये के आसपास स्थिर हो गया है। इसके उलट ब्रिटिश पाउंड काफी हद तक स्थिर रहा है। इससे ब्रिटेन को डॉलर के हिसाब से जीडीपी मापे जाने पर अपनी स्थिति बनाए रखने में मदद मिली है।
गिरावट के बावजूद सबसे तेज
मौजूदा गिरावट के बावजूद अनुमान बताते हैं कि यह बदलाव अस्थायी हो सकता है। आईएमएफ के अनुमानों के अनुसार, भारत 2026 में छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। लेकिन, 2027 तक चौथी स्थिति फिर से हासिल कर सकता है। कारण है कि इसकी जीडीपी बढ़कर 4.58 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी। यह ब्रिटेन से थोड़ा ही ज्यादा है। 2028 तक इसके जापान को भी पीछे छोड़ने की उम्मीद है। हालांकि यह अंतर बहुत कम है। विनिमय दर में उतार-चढ़ाव और विकास के रुझानों के प्रति संवेदनशील है।
भारत के अभी भी सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बने रहने का अनुमान है। 2030 तक इसकी जीडीपी के 6.17 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
इस बदलाव की मुख्य वजह यह है कि ग्लोबल जीडीपी को किस तरह मापा जाता है।
रैंकिंंग में नीचे खिसकने की वजह
- आईएमएफ अर्थव्यवस्थाओं को अमेरिकी डॉलर के हिसाब से रैंक करता है।
- इसका मतलब है कि स्थानीय करेंसी में हुए उत्पादन को मौजूदा विनिमय दरों के आधार पर बदला जाना चाहिए।
- जहां एक ओर भारत की अर्थव्यवस्था रुपये के हिसाब से मजबूती से बढ़ी।
- यानी नॉमिनल रूप से लगभग 9% की ग्रोथ हुई।
- वहीं दूसरी ओर रुपया 2024 में 84.6 प्रति डॉलर से कमजोर होकर 2025 में 88.5 पर पहुंच गया।
- नतीजतन, जब अर्थव्यवस्था के कुल आकार को डॉलर में व्यक्त किया गया तो वह छोटा दिखाई दिया।
जापानी और ब्रिटेन के बाद आ गया है नंबर
इससे यह बात समझ में आती है कि भारत की जीडीपी अब ब्रिटेन के 4 ट्रिलियन डॉलर और जापान के 4.44 ट्रिलियन डॉलर से पीछे क्यों है। भारत का 2025 के लिए अनुमान 3.92 ट्रिलियन डॉलर है।
एक साल पहले भारत की 3.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था ब्रिटेन की 3.4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से बड़ी थी।
और कौन से फैक्टर जिन्होंने रैंकिंंग को पहुंचाई चोट
इस बदलाव के पीछे दूसरा फैक्टर भारत के जीडीपी डेटा में किया गया संशोधन है। इस साल की शुरुआत में आधार वर्ष को 2011–12 से बदलकर 2022–23 कर दिया गया। साथ ही कार्यप्रणाली में भी बदलाव किए गए। संशोधित सीरीज पहले के अनुमानों की तुलना में एक छोटी अर्थव्यवस्था को दर्शाती है।
उदाहरण के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए नॉमिनल जीडीपी को 357 ट्रिलियन डॉलर से घटाकर 345.5 ट्रिलियन डॉलर कर दिया गया। कुल मिलाकर आधिकारिक डेटा पिछले कुछ सालों के लिए 2.8% से 3.8% के बीच की गिरावट को दर्शाता है। इसका असर आईएमएफ के कम अनुमानों पर भी पड़ा है।
करेंसी के दबाव ने भी डाला असर
मुद्रा संबंधी दबावों ने भी रैंकिंग को और प्रभावित किया है। वैश्विक स्तर पर तेल की ऊंची कीमतों, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी पूंजी के आउटफ्लो के बीच रुपया लगातार दबाव में रहा है। हाल ही में यह 94–95 रुपये प्रति डॉलर के दायरे में कारोबार कर रहा था। अब 93.39 रुपये के आसपास स्थिर हो गया है। इसके उलट ब्रिटिश पाउंड काफी हद तक स्थिर रहा है। इससे ब्रिटेन को डॉलर के हिसाब से जीडीपी मापे जाने पर अपनी स्थिति बनाए रखने में मदद मिली है।
गिरावट के बावजूद सबसे तेज
मौजूदा गिरावट के बावजूद अनुमान बताते हैं कि यह बदलाव अस्थायी हो सकता है। आईएमएफ के अनुमानों के अनुसार, भारत 2026 में छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। लेकिन, 2027 तक चौथी स्थिति फिर से हासिल कर सकता है। कारण है कि इसकी जीडीपी बढ़कर 4.58 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी। यह ब्रिटेन से थोड़ा ही ज्यादा है। 2028 तक इसके जापान को भी पीछे छोड़ने की उम्मीद है। हालांकि यह अंतर बहुत कम है। विनिमय दर में उतार-चढ़ाव और विकास के रुझानों के प्रति संवेदनशील है।
भारत के अभी भी सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बने रहने का अनुमान है। 2030 तक इसकी जीडीपी के 6.17 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
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