Air India Cuts Fuel Surcharge: एयर इंडिया ने दी राहत, फ्यूल सरचार्ज 39% तक घटाए, इसका मतलब समझिए

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नई दिल्ली: एयर इंडिया की इंटरनेशनल फ्लाइटों से सफर करने वाले लोगों के लिए खुशखबरी है। एयर इंडिया ने महंगे एटीएफ की वजह से 10 अप्रैल से जो फ्यूल सरचार्ज बढ़ाए थे, उसमें 39 फीसदी के रूप में 80 डॉलर तक की कमी कर दी है। उम्मीद है इंडिगो भी जल्द इसमें कमी करेगी। आने वाले समय में इसका फायदा यात्रियों को भी मिलना शुरू होगा। हालांकि, एयर इंडिया ने 130 डॉलर के दायरे में आने वाले देश सिंगापुर, अफ्रीका, मिडिल-ईस्ट और चीन समेत अन्य देशों के लिए फ्यूल सरचार्ज में कोई कटौती नहीं की है।
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फ्यूल सरचार्ज में कटौती का मतलब
  • एयर इंडिया की ओर से फ्यूल सरचार्ज में 39% तक की कटौती का सीधा मतलब यह है कि अब यात्रियों के लिए हवाई टिकट सस्ते हो जाएंगे।
  • दरअसल, हवाई किराये का एक बड़ा हिस्सा 'फ्यूल सरचार्ज' होता है, जो विमान ईंधन (ATF) की वैश्विक कीमतों के आधार पर तय होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम कम होने की वजह से एयरलाइन ने इस चार्ज को घटाया है।
  • इससे डोमेस्टिक (घरेलू) और इंटरनेशनल (अंतरराष्ट्रीय) दोनों रूटों पर टिकट की कुल कीमतों में कमी आएगी।
  • हवाई सफर करने वाले यात्रियों की जेब पर आर्थिक बोझ कम होगा।

एयर इंडिया ने क्‍या बताया है?अधिकारियों ने बताया कि महंगे एटीएफ की वजह से एयर इंडिया ने आठ अप्रैल से सार्क देश, पश्चिम एशिया, मिडिल-ईस्ट, चीन, साउथ-ईस्ट एशिया, सिंगापुर, अफ्रीका के लिए प्रति टिकट 24 डॉलर से 130 डॉलर तक फ्यूल सरचार्ज लगाना शुरू किया था।

वहीं, 10 अप्रैल से ब्रिटेन, फ्रैंकफर्ट, पेरिस, एम्सटर्डम, कोपनहेगन और विएना समेत यूरोप के अन्य देशों को जाने वाली फ्लाइटों में 205 यूएस डॉलर प्रति टिकट का फ्यूल सरचार्ज लगाना शुरू किया था।

इसी दिन से नॉर्थ अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया आने-जाने वाले यात्रियों पर 280 डॉलर फ्यूल सरचार्ज लगा दिया था। इसमें शिकागो, न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को, टोरंटो और वैंक्योर आदि शहरों को जाने वाली फ्लाइट शामिल थी।

फ्यूल सरचार्ज के इस ग्राफ में एयर इंडिया ने एक जुलाई से अब 280 डॉलर की जगह 200 और 205 डॉलर की जगह 125 डॉलर सरचार्ज कर दिया है। हालांकि, इसमें दो हजार किलोमीटर तक की घरेलू उड़ानों पर आठ अप्रैल से लगाया गया 299 रुपये से 899 रुपये तक के फ्यूल सरचार्ज को अभी कम नहीं किया गया है। यह आने वाले समय में कम किया जा सकता है।