Textile City: सूरत की साड़ी विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन भारत की "टेक्सटाइल सिटी' कहलाता है यह शहर

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नई दिल्ली: अंग्रेज जब भारत आए थे, उससे पहले भी यहां कपड़े की बुनाई (Textile Weaving) होती थी। लेकिन यह घरेलू स्तर पर होता था। कपास (Cotton) और रेशम (Silk) के धागे बनाए जाते थे। उन्हीं घागों से हथकरघा पर कपड़े की बुनाई (Weaving) होती थी। लेकिन अंग्रेजों के आने के बाद यहां आधुनिक कपड़ा मिल उत्तर प्रदेश के कानपुर में लगाई गई थी। इसलिए कभी कानपुर देश का टेक्सटाइल कैपिटल (Textile Capital) कहलाता था। लोग इसे मैनचेस्टर ऑफ दि ईस्ट (Manchester of the East) के नाम से भी पुकारते थे। लेकिन आज भारत की टेक्सटाइल सिटी के नाम से जाना जाता है दक्षिण भारत का कोयम्बटूर ( Coimbatore )।
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टेक्सटाइल सिटी क्यों कहलाता है? तमिलनाडु का एक प्रमुख शहर है कोयम्बटूर। इसे भारत की टेक्सटाइल सिटी इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह देश में कॉटन यार्न का सबसे बड़ा प्रोडक्शन हब है। वहां ढेरों टेक्सटाइल मिल्स, स्पिनिंग यूनिट्स, गारमेंट मैन्यूफैक्चरिंग सेंटर हैं। तभी तो आज यह शहर देश के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट हब में से एक बन गया है। इस शहर की जलवायु कपड़ा फैक्ट्री के लिए बिल्कुल मुफीद है। वहां टेक्सटाइड इंडस्ट्री के लिए कुशल लोग भी आसानी से मिल जाते हैं। साथ ही एक मजबूत औद्योगिक आधार इसे भारत के टेक्सटाइल सेक्टर के लिए एक अग्रणी केंद्र बनाते हैं।

हर घर में होता है कपड़े का कामकोयम्बटूर में ऐसा कहें कि हर घर में कपड़े का काम होता है। वहां हजारों स्पिनिंग मिल्स हैं। गली-मोहल्ले में वहां आपको पावर लूम्स और गारमेंट यूनिट्स दिख जाएंगी। वहां बहुत बड़ी मात्रा में कॉटन यार्न, निटवियर, फैब्रिक्स और होम टेक्सटाइल्स का उत्पादन होता है। इसे भारतीय बाजारों के साथ-साथ दुनिया भर के बाजारों में भेजा जाता है।

कपास के धागे का सबसे बड़ा उत्पादकआज की तारीख में कोयंबटूर भारत के शीर्ष कॉटन यार्न या कपास के धागे के उत्पादकों में से एक है। वहां से तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात और अन्य टेक्सटाइल हब को सूती धागे की सप्लाई होती है। वहां के धागे क्वालिटी में भी उम्दा होते हैं। इसलिए इससे बड़े गारमेंट उद्योग और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड फैक्ट्रियों को इससे बड़ा सपोर्ट मिलता है।