PM Modi Appeal: मोदी ही नहीं, इंदिरा गांधी ने भी की थी सोना न खरीदने की अपील, जानें अर्थव्यवस्था में सोने के 4 बड़े किस्से

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। राजनीतिक गलियारों में इसके अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं। राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि खुद जवाबदेही से बच निकलें। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब देश के किसी नेता ने लोगों से सोना नहीं खरीदने की अपील की है। इंदिरा गांधी से लेकर पी चिदंबरम तक इस तरह की अपील कर चुके हैं। कई ऐसे मौके आए जब देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए सोना महत्वपूर्ण बन गया। जानें ऐसे ही 4 किस्सों के बारे में:
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साल 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने नागरिकों से राष्ट्रीय रक्षा कोष में सोना और पैसा दान करने की अपील की थी। यह फंड उसी वर्ष सशस्त्र बलों के जवानों और उनके परिवारों के कल्याण और रक्षा प्रयासों के लिए स्थापित किया गया था। उस समय सरकार ने दान देने के तीन ठोस कारण भी बताए थे। इनमें नागरिकों और उनके बच्चों के भविष्य की रक्षा करना, भारत की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना और शांति की रक्षा करना शामिल था। उस समय इंदिरा गांधी ने 367 ग्राम सोने की ज्वेलरी दान की थी।
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6 जून 1967 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी लोगों से सोना न खरीदने की अपील की थी। उस समय भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव था। भारत को आजाद हुए 20 साल ही हुए थे और पाकिस्तान के साथ हुए 1965 के युद्ध से उबर चुका था। उस समय भारत भीषण सूखे का सामना कर रहा था, विदेशी मुद्रा भंडार लगभग शून्य था और संस्थाएं अभी भी शून्य से खड़ी की जा रही थीं। ऐसे में इंदिरा गांधी ने सार्वजनिक रूप से नागरिकों से किसी भी रूप में सोना न खरीदने की अपील की थी और अर्थव्यवस्था की रक्षा के लिए राष्ट्रीय अनुशासन का आह्वान किया था।
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देश के नेताओं ने सिर्फ सोना न खरीदने की ही अपील नहीं की, बल्कि केंद्रीय बैंक के पास मौजूद सोने ने देश को दिवालिया होने से भी बचाया है। बात 1991 की है। उस समय भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो गया था। भारत के पास कच्चा तेल और उर्वरकों जैसी जरूरी चीजों के आयात का पेमेंट करने के लिए मुश्किल से 3 हफ्ते का ही विदेशी मुद्रा भंडार बचा था। तब भारत ने पहली बार केंद्रीय बैंक में रखे 20 टन सोने को गिरवी रख 200 मिलियन डॉलर जुटाए थे। कुछ समय बाद भारत ने बैंक ऑफ इंग्लैंड को 47 टन सोना भेजा था। इस धनराशि से भारत को तत्काल बाहरी भुगतान दायित्वों को पूरा करने और दिवालियापन से बचने में मदद मिली।
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साल 2013 में यूपीए सरकार में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी लोगों से सोना नहीं खरीदने की अपील की थी। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, 'अगर मेरी कोई एक इच्छा है जिसे भारत की जनता पूरा कर सकती है, तो वह यह है कि वे सोना न खरीदें।' उस समय देश का चालू घाटा रिकॉर्ड 6.7% तक पहुंच गया था। इसके पीछे सोने के भारी आयात को एक प्रमुख कारण माना गया था। उस समय सरकार ने सोने के बेतहाशा आयात को कंट्रोल करने के लिए आयात शुल्क बढ़ाकर 8% कर दिया था।
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पीएम मोदी ने पिछले दो दिनों में देश के नागरिकों से सोना ना खरीदने, ईंधन बचाने समेत कई अपील की हैं। उन्होंने लोगों से एक साल तक गैरजरूरी सोने की खरीदारी से बचने का आग्रह किया, ताकि विदेशी मुद्रा के अनावश्यक बहिर्वाह को रोका जा सके। साथ ही उन्होंने पेट्रोल और डीजल के संयमित उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि तेल की बचत से देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी। पश्चिम एशिया संकट के कारण पैदा हुए वैश्विक तनाव के बीच पीएम मोदी ने यह अपील की।