पाकिस्तान में मरना भी हुआ महंगा, कफन से लेकर कब्र तक के बढ़ गए दाम, कर्ज लेकर हो रहा अंतिम संस्कार

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नई दिल्ली: कर्ज और आर्थिक समस्या से जूझ रहे पाकिस्तान में अब लोगों को बेकाबू महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि वहां न केवल जीना बल्कि मरना भी महंगा हो गया है। कफन से लेकर दफनाने के लिए जमीन की कीमत में जबरदस्त इजाफा हुआ है। एक शव को दफनाने में कुल खर्च बढ़कर करीब 60 हजार पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया है।

पाकिस्तान के रावलपिंडी और अन्य शहरों से सामने आ रही खबरों के मुताबिक कफन-दफन और अंतिम विदाई की लागत इतनी बढ़ गई है कि गरीब और मिडिल क्लास परिवारों को इसके लिए भी भारी कर्ज लेना पड़ रहा है। सरकारी दावों में भले ही अर्थव्यवस्था में सुधार और स्थिरता की बात कही जा रही हो, लेकिन आम जनता की असल जिंदगी में यह राहत कहीं नजर नहीं आ रही है।
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आसमान पर पहुंचा अंतिम संस्कार का खर्चद एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार, रावलपिंडी में महंगाई ने अंतिम संस्कार से जुड़े हर छोटे-बड़े खर्च को आसमान पर पहुंचा दिया है। पहले जहां पड़ोसी और स्थानीय स्वयंसेवक बिना किसी शुल्क के कब्र खोदने का काम कर देते थे, वह परंपरा अब लगभग खत्म हो चुकी है। अब हर काम के लिए मोटी रकम चुकानी पड़ती है।

किस पर कितना खर्च (पाकिस्तानी रुपये में)?कफन का कपड़ा: 3000 से 4000
अंतिम संस्कार की सामग्री (गुलाब जल, कपूर, अगरबत्ती, फूल): 2000 से 2500
कब्र की जमीन, खुदाई और ईंटों की तैयारी: 40000 से 45000
शव को नहलाने की मजदूरी: 1000 से 1500
पक्की कब्र (ईंट-सीमेंट): करीब 15000 से शुरू
मार्बल फिनिशिंग: 25000 से 30000 या उससे अधिक

कब्रिस्तान में जगह की कमी
  • एक अंतिम संस्कार के लिए परिवारों को कम से कम 50 से 60 हजार पाकिस्तानी रुपये का इंतजाम करना पड़ रहा है।
  • कई जगहों पर तो कब्रिस्तान में जगह की इस कदर कमी हो गई है कि पुरानी कब्रों को हटाकर या उन्हीं के ऊपर दोबारा दफनाने की नौबत आ रही है।

क्या कम हुई महंगाई की रफ्तार?साल 2023 के आर्थिक संकट के दौरान पाकिस्तान में महंगाई दर लगभग 40% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। हालांकि, जून 2026 के ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता मुद्रास्फीति घटकर 11.1% पर आ गई है।