Household Gold: घर में रखा आपका सोना देश की तरक्की के लिए बना ब्रेक, CA नितिन कौशिक का दावा, कहा- यह कोई रॉकेट नहीं
नई दिल्ली: आपके घर में रखा सोना क्या देश की अर्थव्यवस्था में बड़ी रुकावट बन रहा है? सीए नितिन कौशिक का मानना कुछ ऐसा ही है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए यह बात कही है।
नितिन कौशिक ने पोस्ट में लिखा है, 'क्या हो अगर भारत के सभी 1.4 अरब नागरिक सिर्फ 1-1 ग्राम सोना देश को दान कर दें?' सीए कौशिक के मुताबिक अगर ऐसा होता है, तो यह कुल 1400 टन सोना बनता है। यह मात्रा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मौजूदा भौतिक स्वर्ण भंडार (880.52 टन) को भी आसानी से पीछे छोड़ देगी।
रुपये में मजूबती और भ्रमनितिन कौशिक ने पोस्ट में लिखा है कि लोगों को लगता है कि केंद्रीय बैंक के पास 1400 टन सोना जमा होने से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया जादुई रूप से मजबूत होकर फिर से 50 के स्तर पर आ जाएगा। लेकिन यह पूरी तरह से एक भ्रम है।
CA नितिन कौशिक ने स्पष्ट किया कि दुनिया भर की मुद्राएं अब दशकों पहले ही गोल्ड स्टैंडर्ड को छोड़ चुकी हैं। आज डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत (जो लगभग 95 के स्तर पर है) पूरी तरह से देश की संरचनात्मक आर्थिक वास्तविकताओं से तय होती है।
क्या सोना सिर्फ एक ढाल है?उन्होंने कहा कि वैश्विक मुद्रा बाजार इस बात से बिल्कुल प्रभावित नहीं होता कि किसी देश के केंद्रीय बैंक के लॉकर में कितना सोना बेकार (Dead Asset) पड़ा है। बाजार किसी भी देश की करेंसी की वैल्यू उसके बढ़ते व्यापार घाटे, महंगाई दर, विदेशी पूंजी के प्रवाह और विनिर्माण उत्पादकता को देखकर तय करता है।
कौशिक के मुताबिक सोना केवल चरम आर्थिक संकट या युद्ध के समय एक रक्षात्मक ढाल का काम करता है, यह किसी करेंसी की वैल्यू बढ़ाने वाला कोई रॉकेट नहीं है।
नितिन कौशिक ने पोस्ट में लिखा है, 'क्या हो अगर भारत के सभी 1.4 अरब नागरिक सिर्फ 1-1 ग्राम सोना देश को दान कर दें?' सीए कौशिक के मुताबिक अगर ऐसा होता है, तो यह कुल 1400 टन सोना बनता है। यह मात्रा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मौजूदा भौतिक स्वर्ण भंडार (880.52 टन) को भी आसानी से पीछे छोड़ देगी।
रुपये में मजूबती और भ्रमनितिन कौशिक ने पोस्ट में लिखा है कि लोगों को लगता है कि केंद्रीय बैंक के पास 1400 टन सोना जमा होने से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया जादुई रूप से मजबूत होकर फिर से 50 के स्तर पर आ जाएगा। लेकिन यह पूरी तरह से एक भ्रम है।
CA नितिन कौशिक ने स्पष्ट किया कि दुनिया भर की मुद्राएं अब दशकों पहले ही गोल्ड स्टैंडर्ड को छोड़ चुकी हैं। आज डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत (जो लगभग 95 के स्तर पर है) पूरी तरह से देश की संरचनात्मक आर्थिक वास्तविकताओं से तय होती है।
क्या सोना सिर्फ एक ढाल है?उन्होंने कहा कि वैश्विक मुद्रा बाजार इस बात से बिल्कुल प्रभावित नहीं होता कि किसी देश के केंद्रीय बैंक के लॉकर में कितना सोना बेकार (Dead Asset) पड़ा है। बाजार किसी भी देश की करेंसी की वैल्यू उसके बढ़ते व्यापार घाटे, महंगाई दर, विदेशी पूंजी के प्रवाह और विनिर्माण उत्पादकता को देखकर तय करता है।
कौशिक के मुताबिक सोना केवल चरम आर्थिक संकट या युद्ध के समय एक रक्षात्मक ढाल का काम करता है, यह किसी करेंसी की वैल्यू बढ़ाने वाला कोई रॉकेट नहीं है।
Next Story