ATF Hike: महंगी होगी हवाई यात्रा? एयर इंडिया और इंडिगो उड़ानों की संख्या घटाने की तैयारी में, तीन महीने तक रहेगा टोटा
नई दिल्ली: ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई है। इस कारण विमान ईंधन यानी एटीएफ भी काफी महंगा हो गया है। इसका असर एयरलाइन कंपनियों पर पड़ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एयर इंडिया और इंडिगो 1 जून से घरेलू उड़ानों की संख्या में कटौती करने की तैयारी में है। यह कटौती 90 दिन तक रह सकती है। सूत्रों का कहना है कि एटीएफ की कीमत बढ़ने के साथ-साथ गर्मियों में डिमांड में भी कमी आई है। इससे आने वाले दिनों में हवाई यात्रा और महंगी हो सकती है।

इंडिगो देश की सबसे बड़ी एयरलाइन है। इंडिगो और एयर इंडिया की भारत के एविएशन मार्केट में 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एयर इंडिया घरेलू ऑपरेशंस में 15 फीसदी तक कमी कर सकती है जबकि इंडिगो अपनी उड़ानों की संख्या में 5 से 7 फीसदी तक की कटौती कर सकती है। एयर इंडिया के सूत्र ने कहा कि एयरलाइन हर हफ्ते औसतर 3,800 फ्लाइट्स ऑपरेट करती है। घरेलू उड़ानों के लिए एटीएफ की कीमत 80,000 रुपये प्रति किलोलीटर थी जो अब एक लाख रुपये से ऊपर पहुंच चुकी है। ऐसी स्थिति में फ्लाइट्स ऑपरेट करना फायदे का सौदा नहीं है।
कंपनियों की समस्या
एयर इंडिया का घाटासूत्र ने कहा कि कंपनी किसी भी रूट से पूरी तरह नहीं हटेगी लेकिन फ्लाइट्स की संख्या घटाएगी। जून से अगस्त के दौरान यह कटौती रहेगी। मुंबई से अहमदाबाद, नागपुर, पटना और भोपाल के बीच फ्लाइट्स की संख्या कम की जा सकती है। इसी तरह दिल्ली से हैदराबाद, बेंगलुरु और कोलकाता के लिए उड़ानों की संख्या में कटौती की जा सकती है। फ्लाइट्स की संख्या में गिरावट से मांग बढ़ सकती है। ऐसा हुआ तो इससे किराया बढ़ना तय है।
टाटा ग्रुप का हिस्सा बन चुकी एयर इंडिया का घाटा फाइनेंशियल ईयर 2026 में 26,000 करोड़ रुपये पहुंच गया जो पिछले साल 10,859 करोड़ रुपये था। एयर इंडिया में सिंगापुर एयरलाइन्स की 25.1 फीसदी हिस्सेदारी है। इस बीच टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने टाटा ग्रुप के नए बिजनेसेज का घाटा कम करने के लिए तीन साल का एक प्लान पेश किया है। इनमें एयर इंडिया, टाटा डिजिटल और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं।
इंडिगो देश की सबसे बड़ी एयरलाइन है। इंडिगो और एयर इंडिया की भारत के एविएशन मार्केट में 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एयर इंडिया घरेलू ऑपरेशंस में 15 फीसदी तक कमी कर सकती है जबकि इंडिगो अपनी उड़ानों की संख्या में 5 से 7 फीसदी तक की कटौती कर सकती है। एयर इंडिया के सूत्र ने कहा कि एयरलाइन हर हफ्ते औसतर 3,800 फ्लाइट्स ऑपरेट करती है। घरेलू उड़ानों के लिए एटीएफ की कीमत 80,000 रुपये प्रति किलोलीटर थी जो अब एक लाख रुपये से ऊपर पहुंच चुकी है। ऐसी स्थिति में फ्लाइट्स ऑपरेट करना फायदे का सौदा नहीं है।
कंपनियों की समस्या
- एयर इंडिया और इंडिगो घरेलू उड़ानों में कटौती करने की तैयारी में
- 1 जून से 31 अगस्त तक कई रूट्स पर फ्लाइट्स में होगी कटौती
- एटीएफ की महंगाई और डिमांड में कमी से कंपनियां हुईं परेशान
- एयर इंडिया घरेलू ऑपरेशंस में 15 फीसदी तक कमी कर सकती है
- इंडिगो भी उड़ानों की संख्या में 5 से 7% तक कटौती कर सकती है
एयर इंडिया का घाटासूत्र ने कहा कि कंपनी किसी भी रूट से पूरी तरह नहीं हटेगी लेकिन फ्लाइट्स की संख्या घटाएगी। जून से अगस्त के दौरान यह कटौती रहेगी। मुंबई से अहमदाबाद, नागपुर, पटना और भोपाल के बीच फ्लाइट्स की संख्या कम की जा सकती है। इसी तरह दिल्ली से हैदराबाद, बेंगलुरु और कोलकाता के लिए उड़ानों की संख्या में कटौती की जा सकती है। फ्लाइट्स की संख्या में गिरावट से मांग बढ़ सकती है। ऐसा हुआ तो इससे किराया बढ़ना तय है।
टाटा ग्रुप का हिस्सा बन चुकी एयर इंडिया का घाटा फाइनेंशियल ईयर 2026 में 26,000 करोड़ रुपये पहुंच गया जो पिछले साल 10,859 करोड़ रुपये था। एयर इंडिया में सिंगापुर एयरलाइन्स की 25.1 फीसदी हिस्सेदारी है। इस बीच टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने टाटा ग्रुप के नए बिजनेसेज का घाटा कम करने के लिए तीन साल का एक प्लान पेश किया है। इनमें एयर इंडिया, टाटा डिजिटल और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं।
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