Ethanol Stove: किरासन तेल वाला स्टोव भूल जाइए, अब एथेनॉल वाले स्टोव पर बनेगा खाना, गडकरी का नया प्लान
नई दिल्ली: कुछ दशक पहले तक देश के ग्रामीण इलाकों में किरासन तेल से चलने वाले स्टोव (Kerosine stove) पर खाना बनाना शान की बात थी। लेकिन जब से एलपीजी सिलेंडर (LPG Cylinder) आम हुआ, इसके दिन लद गए। लेकिन अब फिर से ऐसे स्टोव वापस आएंगे। लेकिन वे किरासन तेल के बदले एथेनॉल (Ethanol) से जलेंगे। जी हां, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एथेनॉल आधारित स्वदेशी कुकिंग स्टोव टेक्नोलॉजी का अनावरण किया है।

कॉमर्शियल एलपीजी से सस्ता
नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में गडकरी ने इस तकनीक का अनावरण किया। उन्होंने बताया कि इस स्वदेशी स्टोव (Ethanol Stove) पर खाना बनाने का खर्चा किसी कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के खर्चे की तुलना में कम होगा। इसी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने युवा भारतीयों की विज्ञान में रुचि को बढ़ावा देने के लिए 40 करोड़ रुपए की एक पहल की भी घोषणा की।
एथेनॉल और पानी का मिश्रणगडकरी ने बताया कि स्टोव की नई तकनीक में खाना पकाने के लिए उपयुक्त लौ उत्पन्न करने के लिए एथेनॉल और पानी के मिश्रण का उपयोग किया जाता है। मंत्री ने बताया, “पानी में 7 प्रतिशत एथेनॉल मिलाकर स्टोव से लौ उत्पन्न की जा सकती है, और यह खाना पकाने वाली गैस से सस्ती है। यह हमारे देश में ही विकसित की गई है।” यह घोषणा जीवाश्म ईंधन के टिकाऊ और किफायती विकल्प के रूप में एथेनॉल के लिए गडकरी के लंबे समय से चले आ रहे समर्थन के अनुरूप है।
एथेनॉल के उपयोग को दे रहे हैं बढ़ावानितिन गडकरी पिछले कई वर्षों से परिवहन और ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में यह तर्क देते हुए एथेनॉल के उपयोग को लगातार बढ़ावा दे रहे हैं कि यह आयातित कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता को कम करने में मदद कर सकता है। साथ ही घरेलू कृषि और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों का समर्थन भी कर सकता है। उल्लेखनीय है कि भारत इस समय अपने कच्चे तेल की आवश्यकताओं का लगभग 87 फीसदी आयात करता है। तभी तो सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को आक्रामक रूप से बढ़ाया है। साल 2014 में इसकी शुरुआत हुई थी। तब पेट्रोल में एथेनॉल 1.53 फीसदी मिलाया जाता था। यह साल 2025 में 20 फीसदी हो गया। इसे बढ़ा कर अब 30 फीसदी करने की तैयारी है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
कॉमर्शियल एलपीजी से सस्ता
नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में गडकरी ने इस तकनीक का अनावरण किया। उन्होंने बताया कि इस स्वदेशी स्टोव (Ethanol Stove) पर खाना बनाने का खर्चा किसी कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के खर्चे की तुलना में कम होगा। इसी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने युवा भारतीयों की विज्ञान में रुचि को बढ़ावा देने के लिए 40 करोड़ रुपए की एक पहल की भी घोषणा की।
एथेनॉल और पानी का मिश्रणगडकरी ने बताया कि स्टोव की नई तकनीक में खाना पकाने के लिए उपयुक्त लौ उत्पन्न करने के लिए एथेनॉल और पानी के मिश्रण का उपयोग किया जाता है। मंत्री ने बताया, “पानी में 7 प्रतिशत एथेनॉल मिलाकर स्टोव से लौ उत्पन्न की जा सकती है, और यह खाना पकाने वाली गैस से सस्ती है। यह हमारे देश में ही विकसित की गई है।” यह घोषणा जीवाश्म ईंधन के टिकाऊ और किफायती विकल्प के रूप में एथेनॉल के लिए गडकरी के लंबे समय से चले आ रहे समर्थन के अनुरूप है।
एथेनॉल के उपयोग को दे रहे हैं बढ़ावानितिन गडकरी पिछले कई वर्षों से परिवहन और ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में यह तर्क देते हुए एथेनॉल के उपयोग को लगातार बढ़ावा दे रहे हैं कि यह आयातित कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता को कम करने में मदद कर सकता है। साथ ही घरेलू कृषि और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों का समर्थन भी कर सकता है। उल्लेखनीय है कि भारत इस समय अपने कच्चे तेल की आवश्यकताओं का लगभग 87 फीसदी आयात करता है। तभी तो सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को आक्रामक रूप से बढ़ाया है। साल 2014 में इसकी शुरुआत हुई थी। तब पेट्रोल में एथेनॉल 1.53 फीसदी मिलाया जाता था। यह साल 2025 में 20 फीसदी हो गया। इसे बढ़ा कर अब 30 फीसदी करने की तैयारी है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
Next Story