India-Flagged Vessels Meaning : समंदर में 'झंडे' की बहुत है वैल्यू, भारतीय फ्लैग वाले जहाज का मतलब, संकट में परफॉर्मेंस देख लीजिए
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तनाव फिर बढ़ा है। धौंस और धमकियों का नया सिलसिला चला है। इसने माहौल को गरम कर दिया है। इस संकट ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर ग्लोबल शिपिंग के कई पहलुओं से रूबरू कराया है। इनमें से एक है जहाज पर लहराने वाला झंडा। जिस पर आमतौर पर कम ही ध्यान दिया जाता है। लेकिन, यह बहुत अहम है। ईटी ने इस पूरे मसले को समझाया है। आइए, यहां हर पहलू के बारे में जानते हैं।

जहाजों की फ्लैगिंंग क्या होती है?किसी जहाज की फ्लैगिंग का मतलब है कि वह किसी देश में रजिस्टर्ड है। वह उस देश में लागू समुद्री नियमों का पालन करता है। इससे उस देश को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन की जांच करने और सजा देने का अधिकार मिल जाता है। नियम हर देश में अलग-अलग हो सकते हैं। इससे जहाज के मालिक अपनी जरूरतों के हिसाब से सबसे सही देश का चुनाव करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।
भारतीय फ्लैग वाले जहाज का क्या मतलब है?डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग में रजिस्टर्ड किसी भी कमर्शियल जहाज को देश का राष्ट्रीय झंडा फहराने की अनुमति होती है। इन जहाजों का संचालन 'मर्चेंट शिपिंग एक्ट' के तहत होता है। इससे उन्हें खुले समुद्र में भी भारत के अधिकार क्षेत्र में एक संप्रभु इकाई के तौर पर काम करने का अधिकार मिल जाता है।
इन पर भारतीय अधिकारियों की ओर से टैक्स लगाया जाता है। ये देश के समुद्री सुरक्षा, श्रम और पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन करते हैं। ये जहाज फ्लैगिंग के लिए भारत के समुद्री क्षेत्र में आते हैं। जहाज की मालिक कंपनी का भारत में ही रजिस्टर्ड होना जरूरी है।
ऐसे जहाजों को क्या फायदे मिलते हैं?भारत अपनी नौसेना और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए अपने फ्लैग वाले जहाजों के हितों की रक्षा करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पनामा और सेंट किट्स जैसे देशों की तुलना में भारत पर नियमों के पालन का ज्यादा बोझ पड़ता है। कारण है कि वे देश 'फ्लैग ऑफ कन्वीनियंस' (FoC) की सुविधा देते हैं।
वर्टेक्स मरीन सर्विसेज के डायरेक्टर राजीव कुमार यादव के अनुसार, FoC की सुविधा होने पर जहाज दुनिया में कहीं से भी महज 3-4 दिनों के भीतर फ्लैग करवा सकते हैं।
भारत में फ्लैग करवाने के फायदों का आकलन हर मामले के आधार पर अलग-अलग किया जा सकता है। भारत के बंदरगाहों पर आने वाले भारतीय फ्लैग वाले जहाजों को कई अतिरिक्त फायदे मिलते हैं। जैसे कि बंदरगाह शुल्क और टैक्स में छूट। साथ ही सरकारी माल ढुलाई और सार्वजनिक क्षेत्र के चार्टरिंग अनुबंधों में उन्हें अतिरिक्त प्राथमिकता दी जाती है।
ईरान संकट में भारतीय फ्लैग वाले जहाजों का प्रदर्शन कैसा रहा? दूसरे देशों के फ्लैग वाले जहाजों का कैसा हाल?होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में दो दर्जन से ज्यादा भारतीय जहाज फंस गए थे। उस क्षेत्र को 'अत्यधिक जोखिम वाला क्षेत्र' घोषित कर दिया गया था। भारतीय नौसेना ने कई तेल टैंकरों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की। लेकिन, कुछ जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में ही मौजूद हैं।
अच्छी बात यह है कि इक्का-दुक्का मामला छोड़कर भारतीय फ्लैग वाले किसी भी जहाज पर कोई सीधा हमला नहीं हुआ है। इसका मुख्य श्रेय भारत की ओर से इस संकट के दौरान अपनाए गए संतुलित नजरिये को जाता है।
क्या कोई देश टैरिफ या मंजिल तय करके अपने फ्लैग वाले जहाज पर कंट्रोल कर सकता है?नहीं, भारतीय फ्लैग होने का मतलब यह नहीं है कि सरकार यह तय कर सके कि कोई जहाज कहां जा रहा है या वह कितना चार्ज कर रहा है। सरकार जहाज पर अपने सिविल, क्रिमिनल और रेगुलेटरी नियमों को लागू करती है। यह इंटरनेशनल सेफ्टी नियमों, पर्यावरण मानकों और क्रू के काम करने की स्थितियों का पालन करना जरूरी बनाती है।
भारतीय फ्लैग वाले जहाजों के लिए विकास के क्या अनुमान हैं?भारतीय फ्लैग वाले जहाजों के बेड़े का कुल वजन (ग्रॉस टनेज - जीटी) इस मार्च में 1.42 करोड़ जीटी तक पहुंच गया। वित्त वर्ष 2025-26 में 15 लाख GT के 92 जहाज इस बेड़े में और शामिल होंगे। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से सरकार के प्रयासों के कारण हुई है। 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' का लक्ष्य भारतीय फ्लैग वाले जहाजों के बेड़े की वैश्विक हिस्सेदारी को काफी बढ़ाना है। साथ ही 2047 तक भारतीय फ्लैग वाले जहाजों के इस्तेमाल को लगभग 7% से बढ़ाकर 30-40% तक पहुंचाना है।
जहाजों की फ्लैगिंंग क्या होती है?किसी जहाज की फ्लैगिंग का मतलब है कि वह किसी देश में रजिस्टर्ड है। वह उस देश में लागू समुद्री नियमों का पालन करता है। इससे उस देश को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन की जांच करने और सजा देने का अधिकार मिल जाता है। नियम हर देश में अलग-अलग हो सकते हैं। इससे जहाज के मालिक अपनी जरूरतों के हिसाब से सबसे सही देश का चुनाव करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।
भारतीय फ्लैग वाले जहाज का क्या मतलब है?डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग में रजिस्टर्ड किसी भी कमर्शियल जहाज को देश का राष्ट्रीय झंडा फहराने की अनुमति होती है। इन जहाजों का संचालन 'मर्चेंट शिपिंग एक्ट' के तहत होता है। इससे उन्हें खुले समुद्र में भी भारत के अधिकार क्षेत्र में एक संप्रभु इकाई के तौर पर काम करने का अधिकार मिल जाता है।
इन पर भारतीय अधिकारियों की ओर से टैक्स लगाया जाता है। ये देश के समुद्री सुरक्षा, श्रम और पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन करते हैं। ये जहाज फ्लैगिंग के लिए भारत के समुद्री क्षेत्र में आते हैं। जहाज की मालिक कंपनी का भारत में ही रजिस्टर्ड होना जरूरी है।
ऐसे जहाजों को क्या फायदे मिलते हैं?भारत अपनी नौसेना और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए अपने फ्लैग वाले जहाजों के हितों की रक्षा करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पनामा और सेंट किट्स जैसे देशों की तुलना में भारत पर नियमों के पालन का ज्यादा बोझ पड़ता है। कारण है कि वे देश 'फ्लैग ऑफ कन्वीनियंस' (FoC) की सुविधा देते हैं।
वर्टेक्स मरीन सर्विसेज के डायरेक्टर राजीव कुमार यादव के अनुसार, FoC की सुविधा होने पर जहाज दुनिया में कहीं से भी महज 3-4 दिनों के भीतर फ्लैग करवा सकते हैं।
भारत में फ्लैग करवाने के फायदों का आकलन हर मामले के आधार पर अलग-अलग किया जा सकता है। भारत के बंदरगाहों पर आने वाले भारतीय फ्लैग वाले जहाजों को कई अतिरिक्त फायदे मिलते हैं। जैसे कि बंदरगाह शुल्क और टैक्स में छूट। साथ ही सरकारी माल ढुलाई और सार्वजनिक क्षेत्र के चार्टरिंग अनुबंधों में उन्हें अतिरिक्त प्राथमिकता दी जाती है।
ईरान संकट में भारतीय फ्लैग वाले जहाजों का प्रदर्शन कैसा रहा? दूसरे देशों के फ्लैग वाले जहाजों का कैसा हाल?होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में दो दर्जन से ज्यादा भारतीय जहाज फंस गए थे। उस क्षेत्र को 'अत्यधिक जोखिम वाला क्षेत्र' घोषित कर दिया गया था। भारतीय नौसेना ने कई तेल टैंकरों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की। लेकिन, कुछ जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में ही मौजूद हैं।
अच्छी बात यह है कि इक्का-दुक्का मामला छोड़कर भारतीय फ्लैग वाले किसी भी जहाज पर कोई सीधा हमला नहीं हुआ है। इसका मुख्य श्रेय भारत की ओर से इस संकट के दौरान अपनाए गए संतुलित नजरिये को जाता है।
क्या कोई देश टैरिफ या मंजिल तय करके अपने फ्लैग वाले जहाज पर कंट्रोल कर सकता है?नहीं, भारतीय फ्लैग होने का मतलब यह नहीं है कि सरकार यह तय कर सके कि कोई जहाज कहां जा रहा है या वह कितना चार्ज कर रहा है। सरकार जहाज पर अपने सिविल, क्रिमिनल और रेगुलेटरी नियमों को लागू करती है। यह इंटरनेशनल सेफ्टी नियमों, पर्यावरण मानकों और क्रू के काम करने की स्थितियों का पालन करना जरूरी बनाती है।
भारतीय फ्लैग वाले जहाजों के लिए विकास के क्या अनुमान हैं?भारतीय फ्लैग वाले जहाजों के बेड़े का कुल वजन (ग्रॉस टनेज - जीटी) इस मार्च में 1.42 करोड़ जीटी तक पहुंच गया। वित्त वर्ष 2025-26 में 15 लाख GT के 92 जहाज इस बेड़े में और शामिल होंगे। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से सरकार के प्रयासों के कारण हुई है। 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' का लक्ष्य भारतीय फ्लैग वाले जहाजों के बेड़े की वैश्विक हिस्सेदारी को काफी बढ़ाना है। साथ ही 2047 तक भारतीय फ्लैग वाले जहाजों के इस्तेमाल को लगभग 7% से बढ़ाकर 30-40% तक पहुंचाना है।
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