20 साल में तिगुना हो गई चीन की रफ्तार, उससे आधे पर अटके हैं हम, जापान और अमेरिका तो पीछे खिसक गए
नई दिल्ली: चीन दुनिया की दूसरी बड़ी इकॉनमी है। पिछले कुछ दशकों से वह ग्लोबल इकॉनमी का इंजन बना हुआ है। उसने पिछले 20 साल में मैन्युफैक्चरिंग में गजब की प्रोग्रेस की है। 2005 में ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में चीन की हिस्सेदारी 9 फीसदी थी। ईयू, अमेरिका और जापान उससे आगे थे। लेकिन आज ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में चीन की हिस्सेदारी 27 फीसदी पहुंच चुकी है। दुनिया के बाजार चीन से आने वाले सस्ते माल से भरे पड़े हैं।

ब्यूरो ऑफ इकनॉमिक एनालिसिस और वर्ल्ड बैंक के मुताबिक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में चीन की हिस्सेदारी पिछले 20 साल में तिगुनी हो चुकी है। 2005 में ईयू की ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में सबसे ज्यादा 24 फीसदी हिस्सेदारी थी लेकिन 2025 में यह घटकर 17 फीसदी रह गई। इस दौरान अमेरिका की हिस्सेदारी 22 फीसदी से घटकर 17 फीसदी रह गई। हालांकि वह दूसरे नंबर पर बना हुआ है जबकि यूरोप पहले से तीसरे नंबर पर बना हुआ है।
भारत का हाल
20 साल पहले जापान की ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में 13 फीसदी हिस्सेदारी थी लेकिन 2025 में यह 5 फीसदी रह गई। इसके साथ ही जापान तीसरे से चौथे नंबर पर खिसक चुका है। 2005 में चीन 9 फीसदी हिस्सेदारी के साथ चौथे नंबर पर था और अब वह पहले नंबर पर आ चुका है। साउथ कोरिया तीन फीसदी हिस्सेदारी के साथ पांचवें नंबर पर बना हुआ है।
इस दौरान भारत की हिस्सेदारी 2 फीसदी से बढ़कर 3 फीसदी हो चुकी है लेकिन वह अब भी छठे नंबर पर है। 2005 में भी भारत इसी नंबर पर था। इस बीच मैक्सिको भी 2 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सातवीं पोजीशन पर है। रूस की स्थिति में भी 20 साल में कोई बदलाव नहीं आया है। 2005 में वह दो फीसदी हिस्सेदारी की साथ आठवें नंबर पर था और आज भी उसी स्थिति में है।
ब्यूरो ऑफ इकनॉमिक एनालिसिस और वर्ल्ड बैंक के मुताबिक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में चीन की हिस्सेदारी पिछले 20 साल में तिगुनी हो चुकी है। 2005 में ईयू की ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में सबसे ज्यादा 24 फीसदी हिस्सेदारी थी लेकिन 2025 में यह घटकर 17 फीसदी रह गई। इस दौरान अमेरिका की हिस्सेदारी 22 फीसदी से घटकर 17 फीसदी रह गई। हालांकि वह दूसरे नंबर पर बना हुआ है जबकि यूरोप पहले से तीसरे नंबर पर बना हुआ है।
भारत का हाल
20 साल पहले जापान की ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में 13 फीसदी हिस्सेदारी थी लेकिन 2025 में यह 5 फीसदी रह गई। इसके साथ ही जापान तीसरे से चौथे नंबर पर खिसक चुका है। 2005 में चीन 9 फीसदी हिस्सेदारी के साथ चौथे नंबर पर था और अब वह पहले नंबर पर आ चुका है। साउथ कोरिया तीन फीसदी हिस्सेदारी के साथ पांचवें नंबर पर बना हुआ है।
इस दौरान भारत की हिस्सेदारी 2 फीसदी से बढ़कर 3 फीसदी हो चुकी है लेकिन वह अब भी छठे नंबर पर है। 2005 में भी भारत इसी नंबर पर था। इस बीच मैक्सिको भी 2 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सातवीं पोजीशन पर है। रूस
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