Assembly Elections Poll Promise: सोना, साड़ी, बेरोजगारी भत्ता, लोन माफी... चुनावी वादों से सरकार पर पड़ेगा ₹1.7 लाख करोड़ का बोझ

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नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम में हाल में हुए विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों में बढ़चढ़कर चुनावी वादे किए थे। पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने दो-तिहाई बहुमत हासिल किया है। तमिलनाडु में थलपति विजय की पार्टी टीवीके सबसे बड़े पार्टी बनकर उभरी है और उसका सरकार बनाना तय माना जा रहा है। केरल में यूडीएफ की सत्ता में वापसी हुई है। जानकारों का कहना है कि इन दलों ने विधानसभा चुनावों में जो वादे किए हैं, उन्हें पूरा करने के लिए सरकारों पर 1.7 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
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तमिलनाडु में टीवीके ने 60 साल तक की महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये, 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली, साल में मुफ्त छह एलपीजी सिलेंडर, बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगो को हर महीने 3,000 रुपये की पेंशन, ग्रेजुएट बेरोजगारों को हर महीने 4,000 रुपये और कोऑपरेटिव क्रॉप लोन माफी का वादा किया है। साथ ही गरीब परिवारों को बेटी की शादी पर 8 ग्राम सोना और सिल्क की एक साड़ी देने का भी वादा थलपति विजय की पार्टी ने किया है। अगर पार्टी सत्ता में आने पर इन वादों का पूरा करती है तो इससे सरकारी खजाने पर सालाना 87,900 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।


बंगाल का हाल
पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने महिलाओं को कैश ट्रांसफर 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने का वादा गया है। साथ ही पार्टी ने किसानों और बेरोजगार युवाओं को 9,000 रुपये देने और धान का एमएसपी राष्ट्रीय स्तर से 30 फीसदी बढ़ाने का भी वादा किया है। अगर पार्टी इन वादों को पूरा करती है तो इससे राज्य के सरकारी खजाने पर सालाना 72,600 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। केरल के चुनावी वादे को पूरा करने से सरकार पर 8,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

जानकारों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में महिलाओं के लिए कैश ट्रांसफर दोगुना करने पर जो खर्च आएगा, वह राज्य की जीडीपी का 3.4 फीसदी तक हो सकता है। फाइनेंशियल ईयर 2027 में राज्य का राजकोषीय घाटा 2.9 फीसदी रहने का अनुमान है। इसी तरह तमिलनाडु के मामले में सभी चुनावी वादों पर आने वाला खर्च राज्य की जीडीपी का 2.2 फीसदी होगा। फाइनेंशियल ईयर 2027 में तमिलनाडु का राजकोषीय घाटा 3 फीसदी रहने का अनुमान है। चुनावी वादों को पूरा करने पर इन राज्यों की वित्तीय स्थिति गड़बड़ा सकती है।


क्या कहते हैं एक्सपर्ट?Emkay Global में लीड इकनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा ने कहा, 'राज्य की राजनीति अब पूरी तरह से आक्रामक पॉपुलिस्ट नीतियों पर टिकी हुई है। 2023 के बाद से इलेक्शन साइकिल्स के कारण राजकोषीय घाटे और जीडीपी रेश्यो में करीब 1 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है जबकि रेवेन्यू स्पेंडिंग स्थिर बना हुआ है और कैपेक्स ठहरा हुआ है। हमें लगता है कि 3% की सीलिंग अब निचली सीमा बन रही है।' आने वाले दिनों में इस रेश्यो के और बढ़ने की आशंका है। अगले साल पंजाब, गुजरात और उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं।