Rupee Valuation: 10 साल में सबसे कमजोर रुपया और महंगा होता तेल, भारत पर डबल अटैक, पूरा गणित समझ लीजिए

Newspoint
नई दिल्‍ली: 2025 में रुपया लगभग 5% टूटा है। तब से यह कमजोर होता जा रहा है। यहां तक कि इस साल इसने एक नया रिकॉर्ड निचला स्तर भी छू लिया है। हालांकि, भारतीय मुद्रा सिर्फ डॉलर के मुकाबले कमजोर नहीं पड़ी है। इसके बजाय दूसरी मुद्रओं के मुकाबले भी गिर रही है। अपने वैश्विक समकक्षों के मुकाबले में रुपया एक दशक से भी ज्‍यादा समय के अपने सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गया है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब मिडिल ईस्‍ट में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। साथ ही विदेशी निवेशकों का भारी आउटफ्लो करेंसी पर दबाव डाल रहा है।
Hero Image

आरबीआई की रिपोर्ट में खतरनाक संकेत
भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा बुलेटिन के आंकड़ों से पता चला है कि रुपये का 40-करेंसी रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (REER) गिरकर 92.72 पर आ गया है। यह एक पैमाना है जो देशों में महंगाई के हिसाब से एडजस्ट होता है। अब यह अपने लंबे समय के औसत 98.25 से काफी नीचे है। यह दिखाता है कि रुपया अपने सामान्य स्तरों से काफी नीचे है।

रॉयटर्स ने विश्लेषकों के हवाले से बताया कि देश में कम महंगाई ने भी हाल के महीनों में REER को नीचे खींच लिया है। साथ ही इस साल अब तक रुपये में लगभग 4.5% की गिरावट भी आई है। मार्च में करेंसी डॉलर के मुकाबले 95.21 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई थी।

जल्‍दी बेहतरी की संभावना कम
न्‍यूज एजेंसी ने बताया कि करेंसी के कम मूल्य पर होने के बावजूद इसमें जल्दी सुधार की संभावना कम है। BofA ग्लोबल रिसर्च के विश्लेषकों ने कहा कि डॉलर की मजबूत मांग के कारण करेंसी पर दबाव बना रह सकता है। यह मांग तेल के ज्‍यादा आयात और बाजार की अनिश्चित स्थितियों के दौरान विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली के कारण पैदा हुई है।

REER का ताजा आंकड़ा 2024 के आखिर के स्तरों से लगभग 15 अंक नीचे है, जो हाल के वर्षों में सबसे तेज गिरावटों में से एक है।

क्‍या बताता है कि कमजोर REER?
  • कमजोर REER भारतीय निर्यात को सस्ता और ज्‍यादा प्रतिस्पर्धी बनाता है।
  • वहीं दूसरी तरफ यह आयात की लागत को तेजी से बढ़ा देता है।
  • यह नए विदेशी निवेशकों के लिए प्रवेश करना भी आसान बना सकता है।
  • हालांकि, विदेशी करेंसी में बदलने पर यह मौजूदा निवेशों का मूल्य कम कर देता है।

छह ट्रेडिंग पार्टनर्स को लेने पर और तेज गिरावटरॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, रुपये का छह-करेंसी REER मार्च में गिरकर 89.61 पर आ गया था। यह अप्रैल 2015 में डेटा शुरू होने के बाद से सबसे निचला स्तर है। इसके लगभग 100 के औसत से यह काफी नीचे है।

छह प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के मुकाबले मापने पर यह गिरावट और भी तेज दिखती है। व्यापार मंत्रालय के डेटा के अनुसार, 2024-25 में भारत के छह सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार अमेरिका, चीन, संयुक्त अरब अमीरात, रूस, सऊदी अरब और सिंगापुर थे।

निवेश का मौका खुलाभारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने गुरुवार को ब्लूमबर्ग न्यूज को बताया, 'लंबे समय के निवेशकों के लिए रुपये का मौजूदा मूल्यांकन निवेश करने का एक आकर्षक मौका देता है।'

आरबीआई ने 2026-27 के लिए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94 की विनिमय दर मानी है। उसके अनुमानों से पता चलता है कि इस स्तर से 5% का बदलाव महंगाई को लगभग 40 बेसिस पॉइंट तक बढ़ा सकता है। विकास दर के लगभग 25 बेसिस पॉइंट तक बढ़ने की संभावना है।