अनिल अग्रवाल की वेदांता को ₹4800000000 का लोन देकर फंस गया था चीनी बैंक, 48 लाख लीक फाइलों से खुला बड़ा राज
नई दिल्ली: चीन के सरकारी बैंक इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना (ICBC) ने अनिल अग्रवाल के वेदांता ग्रुप की एक विदेशी सब्सिडियरी को दिए गए 500 मिलियन डॉलर (करीब 480 करोड़ रुपये) के कर्ज को लेकर बाद में कई चिंताएं दर्ज की थीं। आंतरिक दस्तावेजों के मुताबिक, बैंक ने जटिल कॉरपोरेट स्ट्रक्चर, पैरेंट कंपनी की सीमित कैश पहुंच और कमजोर वित्तीय स्थिति समेत कई मुद्दों को लेकर कर्ज को अपनी आंतरिक वॉचलिस्ट में रखा था। हालांकि, बैंक का पूरा एक्सपोजर साल 2017 में चुका दिया गया था।

यह जानकारी इंडियन एक्सप्रेस ने इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) की चाइना कैपिटल जांच के तहत सामने आए ICBC के लंदन ब्रांच के 48 लाख लीक दस्तावेजों की समीक्षा के आधार पर दी है।
वेदांता की इस कंपनी को मिला था कर्जरिकॉर्ड के मुताबिक, ICBC ने साइप्रस में रजिस्टर्ड कंपनी 'वेल्टर ट्रेडिंग लिमिटेड' को दिए गए 500 मिलियन डॉलर के चार साल के सिंडिकेटेड लोन में हिस्सा लिया था। यह कंपनी वेदांता रिसोर्सेज पीएलसी की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी थी और वेदांता रिसोर्सेज ने इसकी गारंटी दी थी।
ICBC इसमें सीनियर लेंडर था। बैंक का करीब 65 मिलियन डॉलर का एक्सपोजर था, जिसमें लंदन ब्रांच का 29 मिलियन डॉलर, सिंगापुर ब्रांच का 20 मिलियन डॉलर और मुंबई ब्रांच का 15 मिलियन डॉलर हिस्सा था।
2015 के बाद बढ़ी बैंक की चिंताआंतरिक दस्तावेजों के अनुसार, साल 2015 के अंत तक वेदांता इस लोन की शर्तों का पालन कर रही थी और क्रेडिट सामान्य तरीके से चल रहा था। लेकिन कमोडिटी कीमतों में गिरावट और क्रेडिट रेटिंग में लगातार गिरावट के बाद बैंक की चिंता बढ़ने लगी।
फरवरी-मार्च 2016 में ICBC ने इस एक्सपोजर को अपनी आंतरिक वॉचलिस्ट में डाल दिया। बैंक के एक मेमो में कमोडिटी कीमतों में गिरावट, रेटिंग एजेंसियों की कई स्तर की डाउनग्रेडिंग और प्रमुख वित्तीय शर्तों में ढील देने के अनुरोध को चिंता की वजह बताया गया।
कर्ज का था दबावउस समय वेदांता पर करीब 1.3 अरब डॉलर का कर्ज था, जिसकी मियाद 2016 के मध्य में पूरी होनी थी। इसी वजह से फरवरी 2016 में S&P ने कंपनी की रेटिंग घटाई और उसे निगेटिव इम्प्लीकेशन के साथ क्रेडिटवॉट पर रखा।
बाद में ज्यादातर लेंडर्स ने कर्ज की शर्तों में बदलाव को मंजूरी दे दी। अप्रैल 2016 में S&P ने वेदांता को क्रेडिटवॉट से हटा दिया और कहा कि कंपनी ने पर्याप्त फंडिंग हासिल कर ली है। हालांकि, इसके बावजूद ICBC ने अपने एक्सपोजर को वॉचलिस्ट पर बनाए रखा।
हालांकि, इन चिंताओं के बावजूद लोन संबंध से बैंक को कोई क्रेडिट लॉस नहीं हुआ और साल 2017 में एक्सपोजर पूरी तरह चुका दिया गया। इसके बाद वेल्टर ट्रेडिंग को वॉचलिस्ट से हटा दिया गया।
वेदांता ने क्या कहा?वेदांता के प्रवक्ता ने कहा कि 500 मिलियन डॉलर की सिंडिकेटेड सुविधा साल 2013 में छह प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बैंकों के साथ तय की गई थी और बाद में इसे पूरी तरह चुका दिया गया।
कंपनी के मुताबिक, सामान्य कारोबारी प्रक्रिया के तहत मूल लेंडर्स सेकेंडरी मार्केट में अपना एक्सपोजर ट्रांसफर कर सकते हैं। वेदांता ने कहा कि ICBC का कोई एक्सपोजर ऐसी ट्रांसफर प्रक्रिया के जरिए आया हो सकता है और फिलहाल उसका बैंक के साथ कोई संबंध नहीं है। कंपनी ने अपने डिस्क्लोजर और गवर्नेंस मानकों को भी पारदर्शी बताया।
यह जानकारी इंडियन एक्सप्रेस ने इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) की चाइना कैपिटल जांच के तहत सामने आए ICBC के लंदन ब्रांच के 48 लाख लीक दस्तावेजों की समीक्षा के आधार पर दी है।
वेदांता की इस कंपनी को मिला था कर्जरिकॉर्ड के मुताबिक, ICBC ने साइप्रस में रजिस्टर्ड कंपनी 'वेल्टर ट्रेडिंग लिमिटेड' को दिए गए 500 मिलियन डॉलर के चार साल के सिंडिकेटेड लोन में हिस्सा लिया था। यह कंपनी वेदांता रिसोर्सेज पीएलसी की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी थी और वेदांता रिसोर्सेज ने इसकी गारंटी दी थी।
ICBC इसमें सीनियर लेंडर था। बैंक का करीब 65 मिलियन डॉलर का एक्सपोजर था, जिसमें लंदन ब्रांच का 29 मिलियन डॉलर, सिंगापुर ब्रांच का 20 मिलियन डॉलर और मुंबई ब्रांच का 15 मिलियन डॉलर हिस्सा था।
2015 के बाद बढ़ी बैंक की चिंताआंतरिक दस्तावेजों के अनुसार, साल 2015 के अंत तक वेदांता इस लोन की शर्तों का पालन कर रही थी और क्रेडिट सामान्य तरीके से चल रहा था। लेकिन कमोडिटी कीमतों में गिरावट और क्रेडिट रेटिंग में लगातार गिरावट के बाद बैंक की चिंता बढ़ने लगी।
फरवरी-मार्च 2016 में ICBC ने इस एक्सपोजर को अपनी आंतरिक वॉचलिस्ट में डाल दिया। बैंक के एक मेमो में कमोडिटी कीमतों में गिरावट, रेटिंग एजेंसियों की कई स्तर की डाउनग्रेडिंग और प्रमुख वित्तीय शर्तों में ढील देने के अनुरोध को चिंता की वजह बताया गया।
कर्ज का था दबावउस समय वेदांता पर करीब 1.3 अरब डॉलर का कर्ज था, जिसकी मियाद 2016 के मध्य में पूरी होनी थी। इसी वजह से फरवरी 2016 में S&P ने कंपनी की रेटिंग घटाई और उसे निगेटिव इम्प्लीकेशन के साथ क्रेडिटवॉट पर रखा।
बाद में ज्यादातर लेंडर्स ने कर्ज की शर्तों में बदलाव को मंजूरी दे दी। अप्रैल 2016 में S&P ने वेदांता को क्रेडिटवॉट से हटा दिया और कहा कि कंपनी ने पर्याप्त फंडिंग हासिल कर ली है। हालांकि, इसके बावजूद ICBC ने अपने एक्सपोजर को वॉचलिस्ट पर बनाए रखा।
हालांकि, इन चिंताओं के बावजूद लोन संबंध से बैंक को कोई क्रेडिट लॉस नहीं हुआ और साल 2017 में एक्सपोजर पूरी तरह चुका दिया गया। इसके बाद वेल्टर ट्रेडिंग को वॉचलिस्ट से हटा दिया गया।
वेदांता ने क्या कहा?वेदांता के प्रवक्ता ने कहा कि 500 मिलियन डॉलर की सिंडिकेटेड सुविधा साल 2013 में छह प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बैंकों के साथ तय की गई थी और बाद में इसे पूरी तरह चुका दिया गया।
कंपनी के मुताबिक, सामान्य कारोबारी प्रक्रिया के तहत मूल लेंडर्स सेकेंडरी मार्केट में अपना एक्सपोजर ट्रांसफर कर सकते हैं। वेदांता ने कहा कि ICBC का कोई एक्सपोजर ऐसी ट्रांसफर प्रक्रिया के जरिए आया हो सकता है और फिलहाल उसका बैंक के साथ कोई संबंध नहीं है। कंपनी ने अपने डिस्क्लोजर और गवर्नेंस मानकों को भी पारदर्शी बताया।
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