Coal Gasification: LNG संकट में भारत का संकटमोचन बना कोयला, इस तरकीब से बचाए ₹28000 करोड़, कभी कहा था डर्टी फ्यूल

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नई दिल्ली: कोयला... एक ऐसी चीज जिसका इंडस्ट्री ने ईंधन के रूप में इस्तेमाल काफी हद तक बंद कर दिया था, आज फिर से संकटमोचन बनकर उभरा है। ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण होर्मुज पर नाकाबंदी के चलते भारत को ईंधन आयात में काफी परेशानी हो रही है। ऐसे में खाड़ी देशों से क्रूड ऑयल और एलएनजी काफी कम मात्रा में आने से इंडस्ट्री भी संकट में है। इस परेशानी से निपटने के लिए सरकार ने फिर से कोयले के इस्तेमाल की इजाजत दे दी है।
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कोयला लंबे समय तक डर्टी फ्यूल यानी प्रदूषण फैलाने वाला ईंधन माना जाता रहा है। लेकिन अब ईंधन संकट के कारण इसे एक स्वच्छ ट्रांजिशन फ्यूल के रूप में देख रहा है। कोल गैसीफिकेशन (कोयला गैसीकरण) तकनीक के जरिए अब कोयला देश की बढ़ती औद्योगिक ऊर्जा मांग को पूरा करने की योजनाओं के केंद्र में आ गया है। ऐसे में भारतीय इंडस्ट्री ने अपनी निर्भरता एलएनजी से हटाकर कोयले पर बढ़ानी शुरू कर दी है। विशेषकर उन भारी उद्योगों में जहां तुरंत बिजली का इस्तेमाल (इलेक्ट्रीफिकेशन) करना बेहद मुश्किल है।


ये कंपनियां कर रहीं इस्तेमालजिंदल स्टील: एलएनजी की कमी के कारण कंपनी ने अपने स्टील निर्माण संयंत्रों के लिए कोयला गैसीकरण के जरिए बनने वाली सिंथेसिस गैस (Syngas) का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
अल्ट्राटेक: यह सीमेंट कंपनी अपने ऊर्जा मिश्रण में घरेलू कोयले की हिस्सेदारी को लगातार बढ़ा रही है।
महिंद्रा एंड महिंद्रा: कंपनी अपने पूरे इकोसिस्टम में जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) आधारित प्रक्रियाओं को बिजली से संचालित करने के रास्ते तलाश रही है।

सरकार की 37,500 करोड़ रुपये की योजनाउद्योगों के इन प्रयासों को बढ़ावा देने और विदेशों पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में 37,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना (Incentive Scheme) की घोषणा की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य एलएनजी, अमोनिया, मेथनॉल, उर्वरक और अन्य औद्योगिक कच्चे माल के आयात पर होने वाले 2.77 लाख करोड़ रुपये के भारी खर्च और निर्भरता को कम करना है।

कोयले का विशाल भंडार
  • भारत के पास दुनिया का एक सबसे बड़ा कोयला भंडार मौजूद है।
  • देश में अनुमानित 401 अरब टन कोयला और लगभग 47 अरब टन लिग्नाइट का भंडार है।
  • केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारत का यह कोयला भंडार अगले 200 वर्षों के लिए पर्याप्त है।
  • यही कारण है कि देश की दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता और मजबूती के लिए 'कोल गैसीफिकेशन' को एक मुख्य स्तंभ माना जा रहा है।

28000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचीसरकार ने कोयला गैसीकरण से काफी विदेशी मुद्रा की बचत की है। सरकार ने हाल ही में बताया था कि कोयला गैसीकरण से आयातित तेल, मेथनॉल और अमोनिया पर निर्भरता कम करके अब तक 28000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। सरकार इस कार्यक्रम के दूसरे चरण को शुरू करने की तैयारी कर रही है।

हाल ही में निवेशकों के साथ हुई एक बैठक में कोयला मंत्रालय ने कहा कि 2023-24 में शुरू किए गए योजना के पहले चरण में 85,000 करोड़ रुपये का निवेश जुटाया गया है और इससे सालाना 23 मिलियन टन कोयले का उपयोग संभव हो पाया है। जबकि दूसरे चरण के लिए प्रस्ताव का मसौदा जल्द ही जारी होने की संभावना है, अधिकारियों ने कहा कि अंतिम बोली दस्तावेज जुलाई में आने की उम्मीद है।