714 स्विमिंग पूल जितना तेल होर्मुज में फंसा, भारत में क्या लगेगी पेट्रोल-डीजल में आग?
नई दिल्ली: ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की लड़ाई तेजी से समुद्र में लड़ी जा रही है, जिसमें दोनों पक्ष होर्मुज स्ट्रेट और उसके आस-पास तेल टैंकरों और दूसरे जहाजों को निशाना बना रहे हैं। इससे दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। इन हमलों के बीच फारस की खाड़ी में करीब 42 टैंकर फंसे हुए हैं। इनमें से 18 में तेल लदा हुआ है। बताया जा रहा है कि इनमें इतना तेल है कि यह ओलंपिक साइज वाले 714 स्विमिंग पूल भरे जा सकते हैं। भारत पर भी इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत भी अपना ज्यादातर तेल आयात करता है।

होर्मुज के आस-पास फसे तेल टैंकर
होर्मुज में कितना तेल फंसा हुआ है
कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल पारअमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें गुरुवार को भी बुधवार की तरह ही $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं, जबकि ऊर्जा की ऊंची कीमतों का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ने से भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों में कोई खास हलचल नहीं दिखी और वे लगभग सपाट खुले। गुरुवार को हुई ट्रेडिंग में, ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग $101 प्रति बैरल पर ट्रेड हुआ, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) लगभग $96 प्रति बैरल पर रहा।
भारत के लिए यह कितनी बड़ी चिंता
हाल के दिनों में कितने जहाजों पर हमले हुए हैं?5 सितंबर को CENTCOM ने बताया कि उसकी सेनाओं ने ईरान के तीन तेल टैंकरों पर हमले किए। एक हमला ईरान के मुख्य तेल-निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप के पास हुआ। दूसरा जास्क के पास और तीसरा हमला ओमान की खाड़ी में एक खाली टैंकर पर हुआ, जिसके क्रू को जहाज छोड़ने का आदेश दिया गया था।
लगातार हो रहे हमलों ने बढ़ा दी चिंता
ओमान ने क्या दी है बड़ी चेतावनी
होर्मुज को पर्यावरण के लिहाज से खतरे वाली जगहएक-दूसरे पर किए गए इन हमलों ने होर्मुज को पर्यावरण के लिहाज़ से एक संभावित खतरे वाली जगह बना दिया है। इस जलमार्ग से गुज़रने या इसके आस-पास इंतजार कर रहे टैंकरों में लाखों बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद होते है। ऐसे में एक सफल हमले से आग लग सकती है, जहाज डूब सकता है या तेल का भारी रिसाव हो सकता है।
होर्मुज के आस-पास फसे तेल टैंकर
- सोमवार तक के मरीनट्रैफिक डेटा से पता चलता है कि 42 टैंकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने का इंतज़ार कर रहे हैं, जबकि सैकड़ों अन्य जहाज ओमान की खाड़ी और खाड़ी क्षेत्र में इंतजार कर रहे हैं या धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं। इन टैंकरों में से 18 में तेल लदा हुआ है।
- हालांकि यह ठीक-ठीक पता नहीं है कि उनमें कितना कच्चा तेल (अगर है तो) लदा है, लेकिन इन जहाजों की कुल क्षमता का अनुमान 1.76 मिलियन क्यूबिक मीटर तेल और पेट्रोलियम उत्पाद है। ऐसा कार्गो जो कमर्शियल शिपिंग पर हमले जारी रहने की स्थिति में जोखिम में पड़ सकता है।
होर्मुज में कितना तेल फंसा हुआ है
- होर्मुज में फंसे 18 तेल टैंकरों में करीब 1.76 मिलियन क्यूबिक मीटर कच्चा तेल है, जो लगभग 11.1 मिलियन बैरल तेल के बराबर है। यह दुनिया की रोजाना तेल की मांग का लगभग 11 प्रतिशत है, जो करीब 714 ओलंपिक साइज के स्विमिंग पूल भरने के लिए काफी है।
- अब पर्यावरण को होने वाले नुकसान के बारे में सोचिए। अगर किसी बड़े टैंकर पर हमला होता है या वह डूब जाता है, तो खाड़ी में लाखों लीटर तेल फैल सकता है। इससे समुद्र तट, मछली पकड़ने के इलाके और समुद्री इकोसिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है।
- जमीन के उलट समुद्र में तेल बहुत बड़े इलाके में फैल सकता है। लहरों और हवाओं के साथ यह तेल रिसाव वाली जगह से बहुत दूर तक जा सकता है।
कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल पारअमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें गुरुवार को भी बुधवार की तरह ही $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं, जबकि ऊर्जा की ऊंची कीमतों का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ने से भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों में कोई खास हलचल नहीं दिखी और वे लगभग सपाट खुले। गुरुवार को हुई ट्रेडिंग में, ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग $101 प्रति बैरल पर ट्रेड हुआ, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) लगभग $96 प्रति बैरल पर रहा।
भारत के लिए यह कितनी बड़ी चिंता
- भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से आयातित ऊर्जा की लागत बढ़ सकती है। व्यापार संतुलन पर दबाव पड़ सकता है और ईंधन व परिवहन लागत से जुड़ी कंपनियों पर असर पड़ सकता है।
- अगर ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स की ज्यादा लागत का असर सामान और सेवाओं की कीमतों पर पड़ता है, तो इससे महंगाई का अनुमान भी मुश्किल हो सकता है।
- निवेशकों के लिए, महंगे कच्चे तेल, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का मिला-जुला असर भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेश का जोखिम उठाने की इच्छा को कम कर सकता है। विमानन, पेंट, टायर, रसायन और तेल का ज्यादा इस्तेमाल करने वाली दूसरी कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
हाल के दिनों में कितने जहाजों पर हमले हुए हैं?5 सितंबर को CENTCOM ने बताया कि उसकी सेनाओं ने ईरान के तीन तेल टैंकरों पर हमले किए। एक हमला ईरान के मुख्य तेल-निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप के पास हुआ। दूसरा जास्क के पास और तीसरा हमला ओमान की खाड़ी में एक खाली टैंकर पर हुआ, जिसके क्रू को जहाज छोड़ने का आदेश दिया गया था।
लगातार हो रहे हमलों ने बढ़ा दी चिंता
- इन हमलों से इस इलाके में तेल ले जाने वाले जहाजों पर होने वाले हमलों में तेजी आई है।
- युद्ध शुरू होने के बाद से कम से कम 75 जहाजों पर हमले हुए हैं, जिनमें कम से कम 21 नाविक मारे गए हैं। इन जहाजों में से दो मामलों में थोड़ा तेल रिसाव हुआ, जबकि छह मामलों में आग लग गई। ओमान के पास तेल का रिसाव फैल रहा है
- जून की शुरुआत में 'कैरोलीन बेजेंगी' (Caroline Bezengi) नाम के टैंकर के क्रू ने धमाके की आशंका जताई थी, जिसके बाद यह ओमान के तट से लगभग 22 नॉटिकल मील (41 किमी) दूर फंस गया और तब से इसमें से तेल रिस रहा है। रॉयटर्स समाचार एजेंसी का अनुमान है कि टैंकर में 8,00,000 बैरल तेल था।
- ओमान के पर्यावरण प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि इस रिसाव से रास मद्राका के पास लगभग 40 किमी (25 मील) के तटीय इलाके और मसीराह द्वीप पर असर पड़ सकता है।
- 3 अगस्त को, लाइबेरिया के झंडे वाले बल्क कैरियर 'मिनोअन पायनियर' (Minoan Pioneer) पर ओमान के पास किसी अज्ञात चीज़ से हमला हुआ और उसमें आग लग गई।
- 10 अगस्त की सैटेलाइट तस्वीरों में केशम द्वीप (Qeshm Island) के पास तेल की एक बड़ी परत (स्लिक) दिखाई दी, जबकि सिर्री द्वीप (Sirri Island) के पास तेल की एक और परत का पता चला। विशेषज्ञों का कहना है कि केशम द्वीप के पास दिखी तेल की परत शायद 'मिनोअन पायनियर' से आई है, लेकिन वे स्वतंत्र रूप से इसके स्रोत की पुष्टि नहीं कर सके।
होर्मुज को पर्यावरण के लिहाज से खतरे वाली जगहएक-दूसरे पर किए गए इन हमलों ने होर्मुज को पर्यावरण के लिहाज़ से एक संभावित खतरे वाली जगह बना दिया है। इस जलमार्ग से गुज़रने या इसके आस-पास इंतजार कर रहे टैंकरों में लाखों बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद होते है। ऐसे में एक सफल हमले से आग लग सकती है, जहाज डूब सकता है या तेल का भारी रिसाव हो सकता है।
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