India-US Trade Deal: भारत टेढ़ी खीर, तीन दिन में अमेरिका को आ गया समझ, ट्रेड डील पर अंदर की बात आई सामने
नई दिल्ली: व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल का अमेरिका दौरा खत्म हो गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने नई दिल्ली को टेढ़ी खीर (हार्ड नट टू क्रैक) बताया है। यह प्रतिनिधिमंडल भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले चरण पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका गया था। इसकी घोषणा सबसे पहले डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल फरवरी में की थी।

प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते के तहत, अमेरिका ने भारत पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है। पिछले साल अगस्त में ट्रंप ने भारत पर 25% का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था। साथ ही रूसी तेल की खरीद के कारण भारत पर एक्स्ट्रा 25% टैरिफ थोपा था।
टैरिफ पॉलिसी को ऐसे लगा था झटका
इस फैसले के बाद भारत बदलते ग्लोबल टैरिफ फ्रेमवर्क के भीतर अपने हितों की रक्षा के लिए समझौते के कुछ पहलुओं पर फिर से विचार करने और उनमें संशोधन करने की सोच रहा है।
भारत ने चबवा दिए लोहे के चनेवाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन की अगुवाई में 12 सदस्यों वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने ब्रेंडन लिंच की अगुवाई वाले अमेरिकी पक्ष के साथ विस्तार से चर्चा की। यह बातचीत बुधवार को तीन दिनों के बाद समाप्त हो गई। इसका मुख्य उद्देश्य समझौते के अहम प्रावधानों को अंतिम रूप देना था।
खबरों के मुताबिक, जेमिसन ग्रीर ने बुधवार को अमेरिकी कांग्रेस की 'वेज एंड मीन्स कमेटी' से कहा, 'भारत टेढ़ी खीर है... उन्होंने बहुत लंबे समय से अपने कृषि बाजारों को सुरक्षित रखा है।'
उन्होंने आगे कहा, 'इस समझौते के हिस्से के तौर पर वे इनमें से बहुत सी चीजों को सुरक्षित रखना चाहते हैं। हालांकि, कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिन पर मुझे लगता है कि हम आपसी सहमति बना सकते हैं। DDG (डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स) इसका एक अच्छा उदाहरण है।'
उनका यह बयान सांसदों की ओर से डीडीजी, सोयाबीन मील और इथेनॉल के निर्यात के संबंध में पूछे गए सवालों के जवाब में आई। उन्होंने बताया कि इस सप्ताह भारतीय वार्ताकारों के साथ हुई चर्चा में इन खास वस्तुओं को भी शामिल किया गया था।
फरवरी में जारी हुआ था मसौदा
ग्रीर ने कहा, 'भारतीय व्यापार वार्ताकार इस सप्ताह शहर में हैं। इसलिए हम इस सप्ताह इन मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं। इनमें वे विशिष्ट वस्तुएं भी शामिल हैं जिनके बारे में आपने बात की, जैसे कि डीडीजी।'
भारत और अमेरिका ने इससे पहले 2 फरवरी को प्रस्तावित व्यापार समझौते की रूपरेखा तैयार की थी। इसके बाद 7 फरवरी को समझौते का मसौदा जारी किया गया। इस व्यवस्था के तहत नई दिल्ली अमेरिकी बाजारों तक बेहतर पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है। साथ ही दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते के तहत, अमेरिका ने भारत पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है। पिछले साल अगस्त में ट्रंप ने भारत पर 25% का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था। साथ ही रूसी तेल की खरीद के कारण भारत पर एक्स्ट्रा 25% टैरिफ थोपा था।
टैरिफ पॉलिसी को ऐसे लगा था झटका
- 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने ट्रंप की टैरिफ नीतियों को झटका दिया था।
- सर्वोच्च अदालत ने डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को रद्द कर दिया था।
- डोनाल्ड ट्रंप ने इन्हें लगाने के लिए इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का इस्तेमाल किया था।
इस फैसले के बाद भारत बदलते ग्लोबल टैरिफ फ्रेमवर्क के भीतर अपने हितों की रक्षा के लिए समझौते के कुछ पहलुओं पर फिर से विचार करने और उनमें संशोधन करने की सोच रहा है।
भारत ने चबवा दिए लोहे के चनेवाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन की अगुवाई में 12 सदस्यों वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने ब्रेंडन लिंच की अगुवाई वाले अमेरिकी पक्ष के साथ विस्तार से चर्चा की। यह बातचीत बुधवार को तीन दिनों के बाद समाप्त हो गई। इसका मुख्य उद्देश्य समझौते के अहम प्रावधानों को अंतिम रूप देना था।
खबरों के मुताबिक, जेमिसन ग्रीर ने बुधवार को अमेरिकी कांग्रेस की 'वेज एंड मीन्स कमेटी' से कहा, 'भारत टेढ़ी खीर है... उन्होंने बहुत लंबे समय से अपने कृषि बाजारों को सुरक्षित रखा है।'
उन्होंने आगे कहा, 'इस समझौते के हिस्से के तौर पर वे इनमें से बहुत सी चीजों को सुरक्षित रखना चाहते हैं। हालांकि, कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिन पर मुझे लगता है कि हम आपसी सहमति बना सकते हैं। DDG (डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स) इसका एक अच्छा उदाहरण है।'
उनका यह बयान सांसदों की ओर से डीडीजी, सोयाबीन मील और इथेनॉल के निर्यात के संबंध में पूछे गए सवालों के जवाब में आई। उन्होंने बताया कि इस सप्ताह भारतीय वार्ताकारों के साथ हुई चर्चा में इन खास वस्तुओं को भी शामिल किया गया था।
फरवरी में जारी हुआ था मसौदा
ग्रीर ने कहा, 'भारतीय व्यापार वार्ताकार इस सप्ताह शहर में हैं। इसलिए हम इस सप्ताह इन मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं। इनमें वे विशिष्ट वस्तुएं भी शामिल हैं जिनके बारे में आपने बात की, जैसे कि डीडीजी।'
भारत और अमेरिका ने इससे पहले 2 फरवरी को प्रस्तावित व्यापार समझौते की रूपरेखा तैयार की थी। इसके बाद 7 फरवरी को समझौते का मसौदा जारी किया गया। इस व्यवस्था के तहत नई दिल्ली अमेरिकी बाजारों तक बेहतर पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है। साथ ही दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
Next Story