महाराष्ट्र के इस जिले में पैदा होता है देश का 16% केला, क्यों कहलाता है बनाना कैपिटल ऑफ इंडिया?

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नई दिल्ली: भारत दुनिया में केले का सबसे बड़ा उत्पादक है। दुनिया का करीब 25 फीसदी केला भारत में ही होता है। देश में हर साल केले का करीब 34 मिलियन टन उत्पादन होता है। भारत के अलावा चीन, इंडोनेशिया, नाइजीरिया और ब्राजील भी केले के बड़े उत्पादक देश हैं। हालांकि एक्सपोर्ट के मामले में इक्वाडोर पहले नंबर पर है। केला भारत की कृषि अर्थव्यवस्था और खाद्य आपूर्ति में अहम भूमिका निभाता है। क्या आप जानते हैं कि किस इलाके को बनाना कैपिटल ऑफ इंडिया कहा जाता है?
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यह खिताब उत्तरी महाराष्ट्र के जलगांव जिले को मिला है। केले के लिए देश और दुनिया में मशहूर भुसावल इसी जिले में आता है। अनुकूल मौसम, उपजाऊ मिट्टी और खेती के आधुनिक तरीके जलगांव को केले की खेती के लिए आदर्श जगह बनाते हैं। महाराष्ट्र में केले की खेती के कुल रकबे का लगभग 69% जलगांव में है जबकि देश के कुल केला उत्पादन का इस जिले की हिस्सेदारी करीब 16% हिस्सा है।


भौगोलिक लाभ
केले की खेती जलगांव की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। हजारों किसान केले की खेती से जुड़े हैं। साथ ही इसके ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग, स्टोरेज और ट्रेडिंग से उद्योगों से हजारों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी है। जलगांव जिला उत्तर में सतपुड़ा और दक्षिण में अजंता पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित है। इससे इस क्षेत्र को एक अनोखा भौगोलिक लाभ मिलता है।

जिले में पाई जाने वाली उपजाऊ काली मिट्टी दक्कन के पठार की ज्वालामुखी बसाल्ट चट्टानों से बनी है। यह मिट्टी पोषक तत्वों से भरपूर है और इसमें नमी बनाए रखने की बेहतरीन क्षमता है। इसके अलावा, जलगांव की गर्म जलवायु, भरपूर धूप और सिंचाई इसे बड़े पैमाने पर केले की खेती के लिए आदर्श बनाती है।


कैसे बढ़ी केले की खेती?
केले की खेती में जलगांव जिले की सफलता का एक और मुख्य कारण यह है कि इसके किसानों ने बड़े पैमाने पर आधुनिक कृषि तकनीक को अपनाया है। इनमें टिश्यू कल्चर खेती, ड्रिप सिंचाई और क्रॉप मैनेजमेंट के वैज्ञानिक तरीके अपनाना शामिल है। इससे उत्पादकता और गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है। इसकी सफलता के पीछे एक और बड़ा कारण ड्रिप सिंचाई तकनीक भी है। इससे पानी बचाने के साथ-साथ सीधे पौधों की जड़ों तक पानी पहुंचाने में मदद मिलती है।