E20, E10 and Pure Petrol: इथेनॉल मिलाने पर भी E20 आखिर E10 या शुद्ध पेट्रोल से सस्ता क्यों नहीं है? सरकार ने दूर कर दी चिंता
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल के बारे में एक बार फिर से लोगों की चिंताओं को दूर किया है। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की ओर से जारी किए गए 'क्यू एंड ए (सवाल-जवाब)' में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि उसने 23 जून, 2026 को एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए 'इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम' के बारे में गलत जानकारी को दूर करने और तथ्यों के आधार पर स्पष्टीकरण देने के लिए पहले ही एक व्यापक बयान जारी किया था। ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों ने भी 4 जुलाई, 2026 को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस प्रोग्राम के बारे में स्पष्टीकरण दिया था। इन स्पष्टीकरणों के बावजूद, 'इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम' को लेकर कुछ चिंताएं जताई जाती रही हैं। इसमें एक सवाल यह भी पूछा जाता रहा है कि इथेनॉल मिलाने के बाद भी पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं है? सरकार ने अब इसके बारे में स्पष्ट जवाब दिया है।

सरकार ने बताया-शुद्ध पेट्रोल से महंगा क्यों इथेनॉल मिश्रित तेल
सरकार ने बताया-क्या है असली सवाल
उथल-पुथल का असर आपके फ्यूल टैंक पर नहीं: सरकार
हर लीटर इथेनॉल ब्लेंडिंग का मतलब है
इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम (2014-15) से अब तक हुई बचत
भारत कैसे बड़ी मात्रा में इथेनॉल का उत्पादन करे, यह थी बड़ी चुनौती
सरकार ने बताया-शुद्ध पेट्रोल से महंगा क्यों इथेनॉल मिश्रित तेल
- पीआईबी पर सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है-आज, सरकार इथेनॉल को अच्छी कीमतों पर खरीदती है ताकि भारतीय किसानों को सही दाम मिल सके। मक्के से बनने वाले इथेनॉल का ही उदाहरण लें। हमने धीरे-धीरे इसकी खरीद की कीमत बढ़ाई है और आज यह लगभग ₹71.86 प्रति लीटर है। इसमें GST, ट्रांसपोर्टेशन, स्टोरेज और डिपो हैंडलिंग का खर्च शामिल नहीं है।
- इसलिए, अगर इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमत लगभग US$70 प्रति बैरल है, तो शुद्ध पेट्रोल की तुलना में E20 का उत्पादन असल में महंगा पड़ता है।
- अगर क्रूड की कीमत US$120–130 प्रति बैरल तक बढ़ जाती है, तो स्थिति स्वाभाविक रूप से उलट जाती है और इथेनॉल और भी सस्ता हो जाता है।
सरकार ने बताया-क्या है असली सवाल
- सरकार के बयान में कहा गया है कि सवाल यह नहीं होना चाहिए कि 'E20 सस्ता क्यों नहीं है?' असली सवाल यह है कि 'भारत ने ग्लोबल क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव के पूरे असर से ग्राहकों को कैसे बचाया?'
- इसका जवाब आसान है। आज भारत में बिकने वाले हर लीटर पेट्रोल में लगभग 20% हिस्सा देश में बने इथेनॉल का होता है। उस इथेनॉल को लगभग 71 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर खरीदा जाता है। यह ऐसी कीमत है जो हर सुबह ब्रेंट क्रूड, जियोपॉलिटिकल झगड़ों या शिपिंग में रुकावटों के साथ बदलती नहीं है।
उथल-पुथल का असर आपके फ्यूल टैंक पर नहीं: सरकार
- दूसरे शब्दों में, आपके फ्यूल टैंक का पांचवां हिस्सा इंटरनेशनल ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रहता है। यही एक मुख्य कारण है कि दुनिया भर में अभूतपूर्व उथल-पुथल के बावजूद भारत में रिटेल फ्यूल की कीमतों में सबसे कम बढ़ोतरी देखी गई।
- इसलिए, इथेनॉल ब्लेंडिंग का मकसद किसी खास दिन पेट्रोल को सस्ता करना नहीं है। इसका मकसद इंपोर्टेड क्रूड ऑयल पर भारत की निर्भरता को कम करना है।
- नतीजतन, पिछले चार सालों में भारत ने बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और अपने पड़ोसी देशों की तुलना में फ्यूल की कीमतों में सबसे कम बढ़ोतरी दर्ज की।
हर लीटर इथेनॉल ब्लेंडिंग का मतलब है
- कम आयातित कच्चा तेल
- विदेशी मुद्रा का कम खर्च
- भारतीय किसानों की ज़्यादा आमदनी
- ग्राहकों के लिए कीमतों में ज़्यादा स्थिरता और
- मज़बूत राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा।
इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम (2014-15) से अब तक हुई बचत
- विदेशी मुद्रा में ₹1.97 लाख करोड़ से ज़्यादा की बचत की है।
- लगभग 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल की जगह ली है।
- करीब 952 लाख मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जन कम किया है।
- ₹1.66 लाख करोड़ से ज्यादा की रकम सीधे भारतीय किसानों तक पहुंचाई है।
- हमारे किसान अब सिर्फ़ 'अन्नदाता' नहीं रहे; वे 'ऊर्जादाता' बन गए हैं और भारत की ऊर्जा सुरक्षा में सीधे योगदान दे रहे हैं।
भारत कैसे बड़ी मात्रा में इथेनॉल का उत्पादन करे, यह थी बड़ी चुनौती
- सरकार ने बताया कि असली चुनौती यह थी कि भारत कैसे बड़ी मात्रा में इथेनॉल का उत्पादन कर सकता है। उस समय, हम लगभग पूरी तरह से गन्ने पर निर्भर थे, जो एक मौसमी फसल है। इससे सालाना लगभग 400 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन होता था। उत्पादन का यह स्तर ब्लेंडिंग (मिलावट) के मामूली लक्ष्यों के लिए भी काफी नहीं था।
- इस कमी को समझते हुए सरकार ने अपने नजरिए में बुनियादी बदलाव किया। मई 2018 में 'नेशनल पॉलिसी ऑन बायोफ्यूल्स' (जैव-ईंधन पर राष्ट्रीय नीति) शुरू करके, सरकार ने बड़े पैमाने पर इथेनॉल उत्पादन के लिए ज़रूरी इकोसिस्टम बनाना शुरू किया। यह सचमुच पूरी सरकार का एक मिशन बन गया।
- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय, भारतीय रेलवे और कई अन्य मंत्रालयों ने मिलकर काम किया। उन्होंने फीडस्टॉक बढ़ाने, बुनियादी ढांचा तैयार करने, टेक्नोलॉजी को सपोर्ट करने, लॉजिस्टिक्स को सही करने, मांग की निश्चितता बनाने और निवेश को बढ़ावा देने के लिए आपसी तालमेल के साथ काम किया।
- अगस्त 2021 में एक अहम कदम उठाया गया, जब भारत की तेल मार्केटिंग कंपनियों IOCL, BPCL और HPCL ने उन इलाकों में डेडिकेटेड इथेनॉल प्लांट (DEP) लगाने के लिए 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (रुचि की अभिव्यक्ति) जारी किए, जहां इथेनॉल की कमी थी।
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