OPEC+ ने नहीं बढ़ाया तेल उत्पादन, कच्चा तेल उछलकर 100 डॉलर के करीब पहुंचा, भारत पर दिखेगा असर
नई दिल्ली: तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC+ ने अक्टूबर 2026 के लिए अपने तेल उत्पादन लक्ष्य में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। संडे 6 सितंबर को हुई वर्चुअल बैठक में ग्रुप के सात प्रमुख देशों ने सितंबर के उत्पादन स्तर को ही अक्टूबर के लिए जारी रखने पर सहमति जताई।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल निर्यात में रुकावट ने वैश्विक तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। इस फैसले के बाद इंटरनेशनल मार्केट में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं।

क्या लिया ओपेक देशों ने फैसला?
इराक: 44.31 लाख बैरल प्रतिदिन
कुवैत: 26.76 लाख बैरल प्रतिदिन
कजाकिस्तान: 16.28 लाख बैरल प्रतिदिन
अल्जीरिया:10.07 लाख बैरल प्रतिदिन
ओमान: 8.41 लाख बैरल प्रतिदिन
होर्मुज संकट के बीच लिया फैसलामुआवजा उत्पादन को छोड़कर इन सात देशों का संयुक्त अक्टूबर उत्पादन लक्ष्य करीब 3.101 करोड़ बैरल प्रतिदिन रहेगा। ओपेक प्लस ने साथ ही व्यापक उत्पादन समझौते का पालन करने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
ओपेक+ का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते तेल की आवाजाही प्रभावित हो रही है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण तेल शिपिंग रूट है।
सितंबर में बढ़ाया था उत्पादनइससे पहले अगस्त में OPEC+ ने सितंबर के लिए तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया था। इसके साथ समूह ने 2023 में लागू किए गए 16.5 लाख बैरल प्रतिदिन के अतिरिक्त उत्पादन कटौती को चरणबद्ध तरीके से वापस लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली थी।
हालांकि, OPEC+ के 21 सदस्य देशों में से ज्यादातर के लिए 2026 के अंत तक एक और उत्पादन कटौती लागू है। इन कटौतियों को वापस लेने से पहले समूह को सदस्य देशों की वास्तविक उत्पादन क्षमता का आकलन करना होगा। इसके बाद 2027 के लिए नए उत्पादन बेसलाइन तय किए जाएंगे। इन्हीं बेसलाइन के आधार पर अगले साल अलग-अलग देशों के उत्पादन कोटा तय होंगे।
भारत पर क्या असर?भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85% से अधिक हिस्सा आयात करता है। ऐसे में ओपेक+ की ओर से उत्पादन नीति में बदलाव न करने और सप्लाई को सीमित रखने से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी। इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा। इसका सीधा असर देश के व्यापार घाटे और चालू खाता घाटे (CAD) पर पड़ेगा। पेट्रोल, डीजल और माल ढुलाई महंगी होने से घरेलू स्तर पर महंगाई का दबाव भी बढ़ेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में उबालओपेक प्लस देशों के फैसले के बाद आज सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। सुबह 11:30 बजे ब्रेंट क्रूड 1.47% की तेजी के साथ 97.70 डॉलर पर था। वहीं WTI क्रूड भी 1.49% उछलकर 92.84 डॉलर पर पहुंच गया है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल निर्यात में रुकावट ने वैश्विक तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। इस फैसले के बाद इंटरनेशनल मार्केट में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं।
क्या लिया ओपेक देशों ने फैसला?
- OPEC के मुताबिक बैठक में सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने हिस्सा लिया।
- इन सातों देशों ने अक्टूबर के लिए सितंबर 2026 के निर्धारित उत्पादन स्तर को बनाए रखने का फैसला किया है।
- OPEC+ ने कहा है कि सातों देश हर महीने बैठक कर वैश्विक तेल बाजार की स्थिति और भविष्य के अनुमान की समीक्षा करते रहेंगे। अगली बैठक 4 अक्टूबर को होगी।
इराक: 44.31 लाख बैरल प्रतिदिन
कुवैत: 26.76 लाख बैरल प्रतिदिन
कजाकिस्तान: 16.28 लाख बैरल प्रतिदिन
अल्जीरिया:
ओमान: 8.41 लाख बैरल प्रतिदिन
होर्मुज संकट के बीच लिया फैसलामुआवजा उत्पादन को छोड़कर इन सात देशों का संयुक्त अक्टूबर उत्पादन लक्ष्य करीब 3.101 करोड़ बैरल प्रतिदिन रहेगा। ओपेक प्लस ने साथ ही व्यापक उत्पादन समझौते का पालन करने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
ओपेक+ का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते तेल की आवाजाही प्रभावित हो रही है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण तेल शिपिंग रूट है।
सितंबर में बढ़ाया था उत्पादनइससे पहले अगस्त में OPEC+ ने सितंबर के लिए तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया था। इसके साथ समूह ने 2023 में लागू किए गए 16.5 लाख बैरल प्रतिदिन के अतिरिक्त उत्पादन कटौती को चरणबद्ध तरीके से वापस लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली थी।
हालांकि, OPEC+ के 21 सदस्य देशों में से ज्यादातर के लिए 2026 के अंत तक एक और उत्पादन कटौती लागू है। इन कटौतियों को वापस लेने से पहले समूह को सदस्य देशों की वास्तविक उत्पादन क्षमता का आकलन करना होगा। इसके बाद 2027 के लिए नए उत्पादन बेसलाइन तय किए जाएंगे। इन्हीं बेसलाइन के आधार पर अगले साल अलग-अलग देशों के उत्पादन कोटा तय होंगे।
भारत पर क्या असर?भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85% से अधिक हिस्सा आयात करता है। ऐसे में ओपेक+ की ओर से उत्पादन नीति में बदलाव न करने और सप्लाई को सीमित रखने से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी। इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा। इसका सीधा असर देश के व्यापार घाटे और चालू खाता घाटे (CAD) पर पड़ेगा। पेट्रोल, डीजल और माल ढुलाई महंगी होने से घरेलू स्तर पर महंगाई का दबाव भी बढ़ेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में उबालओपेक प्लस देशों के फैसले के बाद आज सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। सुबह 11:30 बजे ब्रेंट क्रूड 1.47% की तेजी के साथ 97.70 डॉलर पर था। वहीं WTI क्रूड भी 1.49% उछलकर 92.84 डॉलर पर पहुंच गया है।
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