Trump Tariffs: ट्रंप के टैरिफ की वापसी जल्द, भारत की बढ़ी टेंशन, संकेतों से समझिए माहौल
नई दिल्ली: अमेरिका टैरिफ की वापसी करने वाला है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इसके साफ संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि टैरिफ पॉलिसी के मामले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को शायद एक झटका लगा है। लेकिन, कुछ ही महीनों में टैरिफ वापस आ जाएंगे। हाल में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि ये ड्यूटीज गैर-कानूनी हैं। इसके बाद पिछले महीने से अमेरिका ने टैरिफ वसूलना बंद कर दिया था। इससे पहले अमेरिका ने भारत पर टैरिफ 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया था। रूसी तेल खरीदने पर लगने वाले 25 फीसदी एक्स्ट्रा टैरिफ (पेनल्टी) को भी हटा दिया गया था।

टैरिफ का हथियार की तरह किया गया इस्तेमाल
टैरिफ को लेकर ट्रंप की पॉलिसी काफी अनिश्चित रही है। इसका एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया है। ताजा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका ने उस अस्थायी प्रतिबंध छूट को आगे न बढ़ाने का फैसला किया है, जिसने भारत समेत कई देशों को कुछ सीमित शर्तों के तहत रूसी और ईरानी तेल खरीदना जारी रखने की अनुमति दी थी। अमेरिका का यह फैसला प्रतिबंधों को और सख्ती से लागू करने की दिशा में जान-बूझकर उठाया गया कदम है। इसके साथ ही अमेरिका की एक नई चेतावनी भी आई है - 'अगर आप ईरान से तेल खरीदते हैं तो आपको इसके नतीजे भुगतने होंगे।'
भारत के लिए क्यों मायने रखता है अमेरिका का फैसला?
भारत की टेंशन
ट्रंप प्रशासन ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए यह धमकी दी है कि जो भी देश भविष्य में भी ईरानी तेल खरीदना जारी रखेगा, उस पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे। यह चेतावनी सीधे तौर पर चीन को टारगेट करके दी गई प्रतीत होती है। वह ईरानी क्रूड का बड़ा खरीदार रहा है।
भारत के लिए टेंशन की बात यह है कि ट्रंप टैरिफ के दायरे को इसी तरह बढ़ाकर रूसी तेल के लिए भी कर सकते हैं। अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत रूस से तेल खरीदता रहा है।
अमेरिका में पूरी तरह बन गया है माहौल
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, वॉशिंगटन में वॉल स्ट्रीट जर्नल के एक इवेंट में बेसेंट ने कहा, 'टैरिफ पॉलिसी के मामले में सुप्रीम कोर्ट से हमें एक झटका लगा। लेकिन, हम सेक्शन 301 के तहत स्टडीज लागू करेंगे या करवाएंगे। इसलिए जुलाई की शुरुआत तक टैरिफ वापस उसी पुराने लेवल पर आ सकते हैं।'
बेसेंट ने कहा कि सेक्शन 301 के तहत टैरिफ लगाने के अधिकार को कोर्ट में परखा जा चुका है। अब कारोबारी लीडर कैपिटल खर्चों को लेकर योजना बनाना और फैसले लेना शुरू कर सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की काट ढूंढ रहे हैं ट्रंप
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि ड्यूटीज लगाने के लिए ट्रंप की ओर से अपनी इमरजेंसी शक्तियों का इस्तेमाल करना असंवैधानिक है। इस फैसले के बाद ट्रंप टैरिफ पॉलिसी को बहाल करने के लिए अलग-अलग अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
अमेरिकी सरकार ने इस प्रोग्राम के तहत टैरिफ के तौर पर 130 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम वसूली थी। यह प्रोग्राम इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (आईईईपीए) का इस्तेमाल करके लागू किया गया था। अमेरिका की एक ट्रेड कोर्ट के जज ने फेडरल सरकार को आदेश दिया था कि जिन कंपनियों ने टैरिफ चुकाए हैं, उन्हें वह रकम वापस (रिफंड) करे।
चेतावनी पर चेतावनी
गुरुवार को बेसेंट ने देशों को ईरानी तेल खरीदने के खिलाफ चेतावनी भी दी। व्हाइट हाउस में उन्होंने कहा, 'हमने देशों से कहा है कि अगर आप ईरानी तेल खरीद रहे हैं या ईरानी पैसा आपके बैंकों में जमा है तो अब हम कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं।'
अमेरिका ने कहा कि वह उन प्रतिबंधों में दी गई छूट (सैंक्शन्स वेवर) को आगे नहीं बढ़ाएगा, जिसके तहत भारत जैसे देशों को रूसी या ईरानी तेल खरीदने की इजाजत मिली हुई थी।
ट्रंप ने देशों को ईरान को हथियार सप्लाई करने के खिलाफ भी चेतावनी दी थी। इस महीने की शुरुआत में ट्रंप ने कहा था, 'जो देश ईरान को मिलिट्री हथियार सप्लाई करेगा, अमेरिका को बेचे जाने वाले उसके सभी सामानों पर तुरंत 50 फीसदी का टैरिफ लगा दिया जाएगा।'
टैरिफ का हथियार की तरह किया गया इस्तेमाल
टैरिफ को लेकर ट्रंप की पॉलिसी काफी अनिश्चित रही है। इसका एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया है। ताजा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका ने उस अस्थायी प्रतिबंध छूट को आगे न बढ़ाने का फैसला किया है, जिसने भारत समेत कई देशों को कुछ सीमित शर्तों के तहत रूसी और ईरानी तेल खरीदना जारी रखने की अनुमति दी थी। अमेरिका का यह फैसला प्रतिबंधों को और सख्ती से लागू करने की दिशा में जान-बूझकर उठाया गया कदम है। इसके साथ ही अमेरिका की एक नई चेतावनी भी आई है - 'अगर आप ईरान से तेल खरीदते हैं तो आपको इसके नतीजे भुगतने होंगे।'
भारत के लिए क्यों मायने रखता है अमेरिका का फैसला?
- भारत के लिए इस छूट की समय सीमा खत्म होने से ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी का एक रास्ता बंद हो गया है।
- यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से रियायती रूसी कच्चे तेल का वह बड़ा खरीदार रहा है।
- भारतीय रिफाइनरियों को अब उस अस्थायी सुरक्षा के बिना खरीदारी करनी होगी जो इस लाइसेंस से मिली थी।
- अगर उनके तेल मिश्रण में ईरानी तेल शामिल रहता है तो उन्हें 'सेकेंडरी सैंक्शन'के अतिरिक्त जोखिम का भी सामना करना पड़ सकता है।
- आने वाले कुछ हफ्ते यह तय करेंगे कि भारत और अन्य खरीदारों के पास अपनी रणनीति तय करने के लिए कितनी गुंजाइश बचती है।
भारत की टेंशन
ट्रंप प्रशासन ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए यह धमकी दी है कि जो भी देश भविष्य में भी ईरानी तेल खरीदना जारी रखेगा, उस पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे। यह चेतावनी सीधे तौर पर चीन को टारगेट करके दी गई प्रतीत होती है। वह ईरानी क्रूड का बड़ा खरीदार रहा है।
भारत के लिए टेंशन की बात यह है कि ट्रंप टैरिफ के दायरे को इसी तरह बढ़ाकर रूसी तेल के लिए भी कर सकते हैं। अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत रूस से तेल खरीदता रहा है।
अमेरिका में पूरी तरह बन गया है माहौल
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, वॉशिंगटन में वॉल स्ट्रीट जर्नल के एक इवेंट में बेसेंट ने कहा, 'टैरिफ पॉलिसी के मामले में सुप्रीम कोर्ट से हमें एक झटका लगा। लेकिन, हम सेक्शन 301 के तहत स्टडीज लागू करेंगे या करवाएंगे। इसलिए जुलाई की शुरुआत तक टैरिफ वापस उसी पुराने लेवल पर आ सकते हैं।'
बेसेंट ने कहा कि सेक्शन 301 के तहत टैरिफ लगाने के अधिकार को कोर्ट में परखा जा चुका है। अब कारोबारी लीडर कैपिटल खर्चों को लेकर योजना बनाना और फैसले लेना शुरू कर सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की काट ढूंढ रहे हैं ट्रंप
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि ड्यूटीज लगाने के लिए ट्रंप की ओर से अपनी इमरजेंसी शक्तियों का इस्तेमाल करना असंवैधानिक है। इस फैसले के बाद ट्रंप टैरिफ पॉलिसी को बहाल करने के लिए अलग-अलग अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
अमेरिकी सरकार ने इस प्रोग्राम के तहत टैरिफ के तौर पर 130 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम वसूली थी। यह प्रोग्राम इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (आईईईपीए) का इस्तेमाल करके लागू किया गया था। अमेरिका की एक ट्रेड कोर्ट के जज ने फेडरल सरकार को आदेश दिया था कि जिन कंपनियों ने टैरिफ चुकाए हैं, उन्हें वह रकम वापस (रिफंड) करे।
चेतावनी पर चेतावनी
गुरुवार को बेसेंट ने देशों को ईरानी तेल खरीदने के खिलाफ चेतावनी भी दी। व्हाइट हाउस में उन्होंने कहा, 'हमने देशों से कहा है कि अगर आप ईरानी तेल खरीद रहे हैं या ईरानी पैसा आपके बैंकों में जमा है तो अब हम कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं।'
अमेरिका ने कहा कि वह उन प्रतिबंधों में दी गई छूट (सैंक्शन्स वेवर) को आगे नहीं बढ़ाएगा, जिसके तहत भारत जैसे देशों को रूसी या ईरानी तेल खरीदने की इजाजत मिली हुई थी।
ट्रंप ने देशों को ईरान को हथियार सप्लाई करने के खिलाफ भी चेतावनी दी थी। इस महीने की शुरुआत में ट्रंप ने कहा था, 'जो देश ईरान को मिलिट्री हथियार सप्लाई करेगा, अमेरिका को बेचे जाने वाले उसके सभी सामानों पर तुरंत 50 फीसदी का टैरिफ लगा दिया जाएगा।'
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