Petrol Diesel Price Hike: दूध, सब्जी, ग्रोसरी, दवा, कैब और बस की सवारी... पेट्रोल-डीजल महंगा होने से कहां-कहां कटेगी जेब?
नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल की कीमत आज से बढ़ गई है। इससे केवल पेट्रोल पंप पर ही आपको ज्यादा पैसे नहीं चुकाने पड़ेंगे बल्कि इसका आपकी जिंदगी पर व्यापक असर होगा। पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने से देश में महंगाई में उछाल आने की आशंका है क्योंकि इससे माल ढुलाई महंगी होगी। साथ ही बस का किराया महंगा हो सकता है और कैब या बाइक राइड के लिए भी आपको ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। घर में आने वाला ग्रॉसरी का सामान और फ्लाइट्स की टिकट भी महंगी हो सकती है।

सब्जी ढोने वाले ट्रक से लेकर आपके घर तक ग्रोसरी पहुंचाने वाली बाइक तक भारत की इकॉनमी काफी हद तक डीजल और पेट्रोल पर निर्भर है। सरकार भी इस बात को समझती है। यही वजह है कि उसने काफी इंतजार करने के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमत में 3 रुपये से ज्यादा का इजाफा किया है। ईरान युद्ध के बाद कच्चा तेल 50% महंगा हो चुका है लेकिन इसके अनुरूप देश में पेट्रोल-डीजल कीमत नहीं बढ़ी थी। इससे सरकारी कंपनियों को हर महीने 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था। कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने पेट्रोल-डीजल की महंगाई का भार आम आदमी पर डालने की वकालत की थी।
क्यों जरूरी है डीजल?अगर डीजल को भारत के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की रीढ़ कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। सब्जी, फल, ग्रॉसरी, दूध, पैकेज्ड फूड, दवा और रोजमर्रा की जरूरी चीजें ले जाने वाले अधिकांश ट्रक डीजल से चलते हैं। बस, ट्रैक्टर, जेनरेटर और कमर्शियल वीकल्स भी इस पर निर्भर हैं। साफ है कि जब डीजल की कीमत बढ़ती है तो ट्रांसपोर्टर्स को सामान भेजने के लिए ज्यादा खर्च करना पड़ता है और कंपनियां यह बोझ आखिरकार ग्राहकों पर ही डालती हैं। यही वजह है कि जब पेट्रोल-डीजल महंगा होता है तो महंगाई की आशंका बढ़ जाती है।
ईंधन की कीमत बढ़ने का पहला असर आपके किचन के बजट पर पड़ता है। सब्जी, फल, दूध, दही, पनीर, अनाज, खाद्य तेल और पैकेज्ड फूड की कीमत में तेजी आ सकती है। इस तरह का सामान जल्दी पहुंचाना पड़ता है और इनके लिए रेफ्रिजरेटेड वीकल्स या कोल्ड स्टोरेज सिस्टम की जरूरत होती है। इस तरह की गाड़ियों में ज्यादा तेल लगता है।
डीजल महंगा होने का असर
कैब किरायायानी टमाटर, प्याज, पत्ते वाली सब्जियां और फलों की कीमत में तेजी देखने को मिल सकती है। साथ ही डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स भी डिलीवरी फीस बढ़ा सकते हैं। कैब और बाइक एग्रीगेटर भी किराया बढ़ा सकते हैं। इसी तरह बस का किराया भी बढ़ सकता है। साथ ही किसानों के लिए भी लागत बढ़ेगी जिससे खाने-पीने की चीजें भी महंगी होंगी।
सब्जी ढोने वाले ट्रक से लेकर आपके घर तक ग्रोसरी पहुंचाने वाली बाइक तक भारत की इकॉनमी काफी हद तक डीजल और पेट्रोल पर निर्भर है। सरकार भी इस बात को समझती है। यही वजह है कि उसने काफी इंतजार करने के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमत में 3 रुपये से ज्यादा का इजाफा किया है। ईरान युद्ध के बाद कच्चा तेल 50% महंगा हो चुका है लेकिन इसके अनुरूप देश में पेट्रोल-डीजल कीमत नहीं बढ़ी थी। इससे सरकारी कंपनियों को हर महीने 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था। कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने पेट्रोल-डीजल की महंगाई का भार आम आदमी पर डालने की वकालत की थी।
क्यों जरूरी है डीजल?अगर डीजल को भारत के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की रीढ़ कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। सब्जी, फल, ग्रॉसरी, दूध, पैकेज्ड फूड, दवा और रोजमर्रा की जरूरी चीजें ले जाने वाले अधिकांश ट्रक डीजल से चलते हैं। बस, ट्रैक्टर, जेनरेटर और कमर्शियल वीकल्स भी इस पर निर्भर हैं। साफ है कि जब डीजल की कीमत बढ़ती है तो ट्रांसपोर्टर्स को सामान भेजने के लिए ज्यादा खर्च करना पड़ता है और कंपनियां यह बोझ आखिरकार ग्राहकों पर ही डालती हैं। यही वजह है कि जब पेट्रोल-डीजल महंगा होता है तो महंगाई की आशंका बढ़ जाती है।
ईंधन की कीमत बढ़ने का पहला असर आपके किचन के बजट पर पड़ता है। सब्जी, फल, दूध, दही, पनीर, अनाज, खाद्य तेल और पैकेज्ड फूड की कीमत में तेजी आ सकती है। इस तरह का सामान जल्दी पहुंचाना पड़ता है और इनके लिए रेफ्रिजरेटेड वीकल्स या कोल्ड स्टोरेज सिस्टम की जरूरत होती है। इस तरह की गाड़ियों में ज्यादा तेल लगता है।
डीजल महंगा होने का असर
- पेट्रोल-डीजल महंगा होने से आपका बजट बुरी तरह प्रभावित हो सकता है
- देश में खासकर डीजल को भारत के ट्रांसपोर्ट नेटर्क की रीढ़ माना जाता है
- अधिकांश ट्रक, ट्रैक्टर, जेनरेटर और कमर्शियल वीकल्स इस पर निर्भर हैं
- ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सब्जी, फल, सब्जी और दूसरे आइटम महंगे होंगे
- कैब और बाइक एग्रीगेटर भी किराया बढ़ा सकते हैं, किसानों की लागत बढ़ेगी
कैब किरायायानी टमाटर, प्याज, पत्ते वाली सब्जियां और फलों की कीमत में तेजी देखने को मिल सकती है। साथ ही डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स भी डिलीवरी फीस बढ़ा सकते हैं। कैब और बाइक एग्रीगेटर भी किराया बढ़ा सकते हैं। इसी तरह बस का किराया भी बढ़ सकता है। साथ ही किसानों के लिए भी लागत बढ़ेगी जिससे खाने-पीने की चीजें भी महंगी होंगी।
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