डेड इकॉनमी! कार सेल, UPI ट्रांजैक्शन और क्रूड-LNG इंपोर्ट में टूट गए सारे रिकॉर्ड, दिवाली अभी बाकी है

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अक्टूबर में इकॉनमी के कई मोर्चों पर नए रिकॉर्ड बन गए। इस दौरान देश में कारों की बिक्री पहली बार 5 लाख यूनिट के पार पहुंच गई। यूपीआई ट्रांजैक्शन भी 25 अरब के पार पहुंच गया। जीएसटी कलेक्शन भी पिछले साल के मुकाबले 23 फीसदी उछल गया। कच्चे तेल और एलएनजी का आयात भी रिकॉर्ड पर पहुंच गया।
देश में कारों की बिक्री अक्टूबर में 5 लाख यूनिट के पार पहुंच गई। यह पहला मौका है जब देश में किसी एक महीने में इतनी कारें बिकी हैं। नवरात्रि और दशहरे के दौरान भारी डिमांड के कारण ऐसा हुआ। इस दौरान देश में कारों की बिक्री करीब 14 फीसदी बढ़कर 5.30 लाख यूनिट रहने का अनुमान है। इससे पहले जुलाई में कारों की बिक्री 4.69 लाख यूनिट रही थी। मारुति, टाटा मोटर्स, महिंद्रा, हुंडई मोटर इंडिया और किया इंडिया ने अक्टूबर में रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की।
अक्टूबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन पहली बार 25 अरब के पार पहुंच गया। इसी तरह एवरेज डेली ट्रांजैक्शन भी पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। अक्टूबर में यूपीआई ने 25.47 अरब ट्रांजैक्शंस प्रोसेस किए जिनकी कुल वैल्यू 31.53 लाख करोड़ रुपये रही। सितंबर में यह आंकड़ा 24.07 अरब था जबकि वैल्यू 29.37 लाख करोड़ रुपये थी। इस तरह अक्तूबर में ट्रांजैक्शन वॉल्यू 5.8 फीसदी उछल गया जबकि वैल्यू में 7.4 फीसदी की तेजी आई।
अक्टूबर में देश में जीएसटी कलेक्शन पिछले साल के मुकाबले 23 प्रतिशत उछलकर 2.31 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। लगातार दूसरे महीने जीएसटी कलेक्शन दो लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। साथ ही यह दूसरा सबसे बड़ा मंथली कलेक्शन है। इसी साल अप्रैल में रिकॉर्ड करीब 2.43 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन हुआ था। डोमेस्टिक एक्टिविटीज और इंपोर्ट से आने वाले रेवेन्यू में मजबूत बढ़ोतरी के चलते जीएसटी कलेक्शन में उछाल आई है।
कच्चे तेल की कीमत में अक्टूबर में 14 फीसदी तेजी आई। इस दौरान भारत का क्रूड इंपोर्ट भी रोजाना 56 लाख बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जो एक साल पहले की तुलना में 14 फीसदी अधिक है। रूस टॉप सप्लायर बना हुआ है जबकि पश्चिम एशिया और अटलांटिक बेसिन से भी आयात में बढ़ोतरी हुई है। पश्चिम एशिया से सप्लाई में सुधार आया है। इससे रिफाइनर्स को ज्यादा विकल्प मिले हैं।
भारत का एलएनजी आयात भी अक्टूबर में 17.4% की तेजी के साथ रिकॉर्ड 27 लाख टन पहुंच गया। पावर, फर्टिलाइजर और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में ज्यादा डिमांड के कारण ऐसा हुआ है। देश में उत्पादन घटने से एलएनजी का आयात बढ़ा है। इससे भारत की आयात निर्भरता अब 50% से बढ़कर 52% हो गई है। साथ ही कंपनियां पावर सेक्टर के लिए गैस का स्टॉक बढ़ा रही हैं क्योंकि सर्दियों के दौरान सोलर एनर्जी घटने की संभावना है। फर्टिलाइजर सेक्टर को भी प्रोडक्शन के लिए ज्यादा फीडस्टॉक की जरूरत होगी।