West Asia Conflict Impact: इतना सन्नाटा क्यों है भाई! भारत के बड़े शहरों में होटल के कमरे खाली, युद्ध ने ऐसे बिगाड़ा काम

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नई दिल्‍ली: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से भारत के कई सेक्‍टरों पर सीधा असर पड़ा है। होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्‍टर भी इससे अछूता नहीं है। बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे जीसीसी शहरों में होटलों की ऑक्यूपेंसी गंभीर रूप से प्र‍भावित हुई है। कारण है कि भारत आने वाले ज्‍यादातर विदेशी यात्री दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे एविएशन हब से होकर आते हैं। जीसीसी यानी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर ऐसे केंद्र होते हैं जिन्हें बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां (एमएनसी) अपने देश से बाहर दूसरे देशों में स्थापित करती हैं। इनमें हैदराबाद, बेंगलुरु, पुणे, दिल्‍ली-एनसीआर जैसे शहर शामिल हैं।
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28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमले किए। ईरान ने भी पलटवार किया। उसने कई खाड़ी देशों में अमेरिकी अड्डे को निशाना बनाया। इससे यह संकट पूरे क्षेत्र में फैल गया। इसने हवाई यातायात को भी प्रभावित किया।

होटल ऑक्‍यूपेंसी में गिरावटशैले होटल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ श्वेतांक सिंह ने बिजनेस टुडे को बताया, 'पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से होटल बिजनेस पर असर पड़ा है। विदेशी पर्यटकों के आने में कमी आई है। इसका असर बड़े शहरों के बड़े होटलों की ऑक्यूपेंसी पर पड़ा है।'

सिंह ने कहा, 'मिडिल ईस्ट के रास्ते यात्रा करने वाले लोगों की संख्या बहुत ज्‍यादा है। अगर मैं अपने पोर्टफोलियो को देखूं तो 40% बिजनेस विदेशी पर्यटकों से आता है। बड़े शहरों के बड़े होटलों का हिस्सा हमारे पोर्टफोलियो में लगभग 60% है। साफ तौर पर इसका असर दिख रहा है।'

उन्होंने आगे कहा, 'ये यात्री होटल के अंदर ज्‍यादा खर्च करते हैं। ज्‍यादा समय तक रुकते हैं। वे अपने साथ एक पूरा ग्रुप लेकर चलते हैं।'

हालात सामान्‍य होने पर दांवसिंह ने बताया, 'हालांकि, लक्‍जरी रिजॉर्ट का बिजनेस अच्छा चल रहा है। लेकिन, कुल मिलाकर हमें जितना फायदा हुआ है, उससे ज्‍यादा नुकसान हुआ है। मार्च में ऑक्यूपेंसी 10% तक गिर गई है। जीसीसी से जुड़ी यात्राओं की वजह से बेंगलुरु और हैदराबाद पर इसका बहुत गहरा असर पड़ा है।'

शैले होटल्स को उम्मीद है कि अगर हालात सामान्य हो जाते हैं तो वित्त वर्ष 2026-27 में उन्हें डबल डिजिट में ग्रोथ मिलेगी।

सतर्कता बरत रहे हैं यात्रीईजमायट्रिप के सीईओ और को-फाउंडर रिकांत पिट्टी ने कहा:
  • अंतरराष्ट्रीय यात्रियों का रवैया अब ज्‍यादा सतर्क हो गया है।
  • ये यात्री बुकिंग के लिए कम समय ले रहे हैं।
  • फ्लेक्सिबल स्‍कीमों को ज्‍यादा पसंद कर रहे हैं।

प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी पर असर सीमितहालांकि, प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी अनुभवों की बुनियादी मांग अभी भी बनी हुई है। इस पर भू-राजनीतिक हालात की वजह से कुछ हद तक असर पड़ा है।

पिट्टी ने आगे कहा, 'मार्च के महीने में हमने बड़े शहरों के लक्जरी होटलों की बुकिंग में अचानक आई भारी गिरावट के बजाय कुछ हद तक बदलाव या रीकैलिब्रेशन देखा है। हालांकि, पश्चिम एशिया में हो रहे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों की वजह से अंतरराष्ट्रीय यात्रा के कुछ खास हिस्सों पर असर पड़ा है। लेकिन, घरेलू यात्रियों और बिजनेस ट्रैवल्‍स के सहारे कुल मांग काफी हद तक स्थिर बनी हुई है।'

एयरफेयर में बढ़ोतरी का भी इम्‍पैक्‍टहवाई किराए में हुई भारी बढ़ोतरी का भी मांग पर असर पड़ रहा है। पिट्टी ने कहा, 'फ्यूल सरचार्ज और ऑपरेशनल खर्चों में बढ़ोतरी की वजह से हवाई किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। घरेलू रूट्स पर किराए में लगभग 5-10% की बढ़ोतरी हुई है। जबकि कम दूरी वाले अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर किराए में लगभग 20-30% की बढ़ोतरी हुई है।'