Crude Oil Price: पेट्रोल-डीजल पर अब मिलेगी राहत? अमेरिका ने रूसी तेल पर छूट एक महीने के लिए बढ़ाई
नई दिल्ली: सरकारी तेल कंपनियों ने पांच दिन में आज दूसरी बार पेट्रोल और डीजल की कीमत में बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी से पहले तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडर पर रोजाना 750 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था। इस बीच कच्चे तेल को लेकर राहत की खबर आई है। अमेरिका ने रूसी तेल को खरीदने में मिली छूट को एक महीने के लिए आगे बढ़ा दिया है। साथ ही कच्चे तेल की कीमत में आज दो फीसदी गिरावट आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि मिडिल ईस्ट के लीडर्स के अनुरोध पर उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को रोकने का फैसला किया है।

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि 30 दिन का अस्थाई जनरल लाइसेंस जारी किया जाएगा। इससे वे देश समुद्र में मौजूद रूसी तेल खरीद सकेंगे जिनको तेल की सबसे ज्यादा जरूरत है। इससे क्रूड मार्केट में स्थिरता आएगी और यह सुनिश्चित होगा कि हर उस देश को तेल मिले जिसको सबसे ज्यादा जरूरत है। साथ ही उन्होंने कहा कि इससे चीन सस्ते तेल का भंडार नहीं बना पाएगा।
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के कारण कच्चे तेल की कीमत में काफी उछाल आई है। इसकी वजह यह है कि दुनिया का 20 फीसदी कच्चा तेल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। अमेरिका ने मार्च में पहली बार सप्लाई बढ़ाने के लिए भारत समेत कई देशों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी थी। अप्रैल में फिर इस छूट को बढ़ाया गया था। डेटा फर्म Kpler के मुताबिक भारत में मार्च में रूस से रोजाना करीब 2 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीदा जबकि अप्रैल में यह खरीदारी 1.6 मिलियन बैरल रही।
मार्च में भारत के लिए ऑयल बास्केट की एवरेज कीमत $113.49 और अप्रैल में $114.48 प्रति बैरल रही। मई में अब तक यह औसतन $106.69 रही। अभी ब्रेंट क्रूड 1.54 फीसदी की गिरावट के साथ 110.4 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। इस बीच इंडियन बास्केट 1.30 फीसदी तेजी के साथ 110.7 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि 30 दिन का अस्थाई जनरल लाइसेंस जारी किया जाएगा। इससे वे देश समुद्र में मौजूद रूसी तेल खरीद सकेंगे जिनको तेल की सबसे ज्यादा जरूरत है। इससे क्रूड मार्केट में स्थिरता आएगी और यह सुनिश्चित होगा कि हर उस देश को तेल मिले जिसको सबसे ज्यादा जरूरत है। साथ ही उन्होंने कहा कि इससे चीन सस्ते तेल का भंडार नहीं बना पाएगा।
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के कारण कच्चे तेल की कीमत में काफी उछाल आई है। इसकी वजह यह है कि दुनिया का 20 फीसदी कच्चा तेल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। अमेरिका ने मार्च में पहली बार सप्लाई बढ़ाने के लिए भारत समेत कई देशों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी थी। अप्रैल में फिर इस छूट को बढ़ाया गया था। डेटा फर्म Kpler के मुताबिक भारत में मार्च में रूस से रोजाना करीब 2 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीदा जबकि अप्रैल में यह खरीदारी 1.6 मिलियन बैरल रही।
मार्च में भारत के लिए ऑयल बास्केट की एवरेज कीमत $113.49 और अप्रैल में $114.48 प्रति बैरल रही। मई में अब तक यह औसतन $106.69 रही। अभी ब्रेंट क्रूड 1.54 फीसदी की गिरावट के साथ 110.4 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। इस बीच इंडियन बास्केट 1.30 फीसदी तेजी के साथ 110.7 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
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