Crude Oil Price Crash: फिर 100 डॉलर से नीचे आया क्रूड ऑयल, क्या टल गया तेल संकट? जानें भारत पर कितना असर
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों के बीच सोमवार को इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें बुरी तरह गिर गईं। ये कीमतें गिरकर पिछले दो हफ्तों के सबसे निचले स्तर पर आ गईं। सोमवार को ब्रेंट क्रूड 6 फीसदी तक गिरकर प्रति बैरल 100 डॉलर से नीचे आ गया। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 6 फीसदी से ज्यादा गिरकर प्रति बैरल करीब 90 डॉलर पहुंच गया। भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे ब्रेंट क्रूड 5.60% की गिरावट के साथ प्रति बैरल 97.74 डॉलर पर था। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड 5.82% गिरकर 90.98 डॉलर पर कारोबार कर रहा था।

कारोबार के दौरान दोनों बेंचमार्क 7 मई के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए। पिछले हफ्ते भी अमेरिकी क्रूड में 8% और ब्रेंट में 5% से अधिक की गिरावट आई थी, जब ट्रंप ने कूटनीति को मौका देने के लिए ईरान पर होने वाले हवाई हमलों को टाल दिया था। हालांकि, 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से तेल की कीमतें अब भी 30% से अधिक ऊपर बनी हुई हैं। कच्चे तेल की कीमत में गिरावट भारत के लिए भी राहत की बात है।
115 डॉलर तक गया था भावईरान युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई थी। इस महीने की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर तक पहुंच गया था। वहीं युद्ध शुरू होने से पहले इसकी कीमत 60 से 70 डॉलर पर थी। 4 मई से लेकर 25 मई के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत में करीब 15 फीसदी की गिरावट आई है।
क्यों गिरा तेल का भाव?
क्या टल गया है संकट?बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भले ही दोनों देशों के बीच समझौता हो जाए, लेकिन होर्मुज के रास्ते तेल की आपूर्ति को पूरी तरह सामान्य होने और क्षतिग्रस्त ऊर्जा बुनियादी ढांचे को ठीक करने में कई महीने लग सकते हैं। दिग्गज ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) का कहना है कि तेल बाजार के लिए यह काफी कठिन समय है।
मॉर्गन स्टेनली के मुताबिक अब तक अमेरिका द्वारा बढ़ाए गए कच्चे तेल के निर्यात और चीन से सुस्त मांग के चलते बाजार को बहुत बड़ा झटका नहीं लगा है। लेकिन, अगर होर्मुज जलमार्ग जून के बाद भी बंद रहता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की किल्लत फिर से बढ़ सकती है और कीमतें दोबारा आसमान छू सकती हैं।
भारत पर क्या असर?कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर भारत में भी देखने को मिल सकता है। चूंकि भारतीय तेल कंपनियों को जबरदस्त घाटा हो रहा है। ऐसे में सस्ता तेल मिलने पर उनके घाटे में कमी आ सकती है। तेल कंपनियों ने घाटे को कम करने के लिए आज सोमवार को फिर से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए हैं। इस साल यह चौथी बढ़ोतरी है। अगर कच्चे तेल के दाम में कमी आती है तो शायद ही कंपनियों को आगे पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ानी पड़ें। ऐसे में आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
कारोबार के दौरान दोनों बेंचमार्क 7 मई के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए। पिछले हफ्ते भी अमेरिकी क्रूड में 8% और ब्रेंट में 5% से अधिक की गिरावट आई थी, जब ट्रंप ने कूटनीति को मौका देने के लिए ईरान पर होने वाले हवाई हमलों को टाल दिया था। हालांकि, 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से तेल की कीमतें अब भी 30% से अधिक ऊपर बनी हुई हैं। कच्चे तेल की कीमत में गिरावट भारत के लिए भी राहत की बात है।
115 डॉलर तक गया था भावईरान युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई थी। इस महीने की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर तक पहुंच गया था। वहीं युद्ध शुरू होने से पहले इसकी कीमत 60 से 70 डॉलर पर थी। 4 मई से लेकर 25 मई के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत में करीब 15 फीसदी की गिरावट आई है।
क्यों गिरा तेल का भाव?
- शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वाशिंगटन और तेहरान ने एक शांति समझौते के लिए सहमति पत्र (MoU) पर काफी हद तक बातचीत पूरी कर ली है।
- इस समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोला जा सकता है।
- युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के लगभग एक-तिहाई तेल और एलएनजी की आवाजाही इसी रास्ते से होती थी।
- वाशिंगटन और तेहरान के बीच शांति समझौते की खबर के बाद तेल के दाम में गिरावट आई।
क्या टल गया है संकट?बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भले ही दोनों देशों के बीच समझौता हो जाए, लेकिन होर्मुज के रास्ते तेल की आपूर्ति को पूरी तरह सामान्य होने और क्षतिग्रस्त ऊर्जा बुनियादी ढांचे को ठीक करने में कई महीने लग सकते हैं। दिग्गज ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) का कहना है कि तेल बाजार के लिए यह काफी कठिन समय है।
मॉर्गन स्टेनली के मुताबिक अब तक अमेरिका द्वारा बढ़ाए गए कच्चे तेल के निर्यात और चीन से सुस्त मांग के चलते बाजार को बहुत बड़ा झटका नहीं लगा है। लेकिन, अगर होर्मुज जलमार्ग जून के बाद भी बंद रहता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की किल्लत फिर से बढ़ सकती है और कीमतें दोबारा आसमान छू सकती हैं।
भारत पर क्या असर?कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर भारत में भी देखने को मिल सकता है। चूंकि भारतीय तेल कंपनियों को जबरदस्त घाटा हो रहा है। ऐसे में सस्ता तेल मिलने पर उनके घाटे में कमी आ सकती है। तेल कंपनियों ने घाटे को कम करने के लिए आज सोमवार को फिर से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए हैं। इस साल यह चौथी बढ़ोतरी है। अगर कच्चे तेल के दाम में कमी आती है तो शायद ही कंपनियों को आगे पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ानी पड़ें। ऐसे में आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
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