5 लाख से ज्यादा LPG कनेक्शन PNG में बदले, 5kg वाले सिलेंडर और बिजली पर सरकार का बड़ा अपडेट

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नई दिल्ली: देश में पेट्रोल और गैस की किल्लत के बीच सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि पिछले पांच हफ्तों में देशभर में 4 लाख से अधिक एलपीजी कनेक्शनों को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) में बदला गया है। इसके अलावा हर दिन करीब 1 लाख 5 किलोग्राम वाले सिलेंडर वितरित किए जा रहे हैं।

मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि घरेलू एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और डिस्ट्रीब्यूटर्स के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में एलपीजी उत्पादन बढ़ाकर अब लगभग 60% घरेलू जरूरत को पूरा किया जा रहा है, जबकि कच्चे तेल का भंडार भी पर्याप्त है। उन्होंने बताया कि सरकार एनर्जी सेक्टर में भी विस्तार कर रही है।
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पश्चिम एशिया युद्ध के कारण हुई परेशानी
  • पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते एलपीजी सप्लाई प्रभावित हुई थी, जिसके बाद सरकार ने पीएनजी को बढ़ावा देने का फैसला किया।
  • जिन इलाकों में पाइप्ड गैस नेटवर्क उपलब्ध है, वहां पीएनजी कनेक्शन अनिवार्य कर दिया गया है।
  • अगर कोई उपभोक्ता तीन महीने के भीतर पीएनजी नहीं अपनाता, तो उसकी एलपीजी सप्लाई बंद की जा सकती है।
  • सरकार ने इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है, जहां उपभोक्ता एलपीजी छोड़ने की इच्छा जता सकते हैं। एलपीजी सिलेंडर घर से वापस लिए जाएंगे और सिक्योरिटी डिपॉजिट भी लौटाया जाएगा।


घरेलू और परिवहन क्षेत्रों को प्राथमिकतासरकार ने घरेलू और परिवहन क्षेत्रों के लिए गैस सप्लाई को प्राथमिकता दी है, जबकि उद्योगों को फिलहाल औसत खपत का करीब 80% ही गैस मिल रही है। सप्लाई को स्थिर रखने के लिए अतिरिक्त एलएनजी कार्गो भी मंगाए जा रहे हैं। जिन क्षेत्रों में तकनीकी रूप से पीएनजी संभव नहीं है, वहां एलपीजी सप्लाई जारी रखने की अनुमति दी गई है।

इंडक्शन के लिए मिलेगी भरपूर बिजलीएलपीजी की दिक्कत के बीच सरकार इंडक्शन कुकटॉप इस्तेमाल करने पर जोर दे रही है। इसके लिए एनर्जी सेक्टर में विस्तार करने की तैयारी हो रही है। संयुक्त सचिव ने बताया कि ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत बनाने और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बिजली मंत्रालय ने अप्रैल से जून 2026 के बीच 22,361 मेगावाट नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ने की योजना बनाई है।
  • इस योजना में सबसे बड़ा योगदान सौर ऊर्जा का रहेगा, जिसमें 10,000 मेगावाट क्षमता जोड़ी जाएगी।
  • इसके अलावा 3,500 मेगावाट थर्मल, 2,500 मेगावाट पवन ऊर्जा और 3,461 मेगावाट हाइब्रिड परियोजनाएं शामिल हैं।
  • ऊर्जा भंडारण को मजबूत करने के लिए 1,900 मेगावाट बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और 250 मेगावाट पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट भी जोड़े जाएंगे। वहीं, जलविद्युत क्षेत्र में 750 मेगावाट की बढ़ोतरी होगी।