Mobile Phone GST Rate: मोबाइल फोन पर जीएसटी की दर घटाए सरकार, इन्होंने की है मांग
नई दिल्ली: मोबाइल फोन बनाने वालों ने सरकार से ऐसी मांग की है, जिससे आपके स्मार्टफोन सस्ते हो जाएंगे। जी हां, भारत में मोबाइल फोन या स्मार्ट फोन बनाने वालों की संस्था है India Cellular and Electronics Association (ICEA)। इन्होंने भारत भारत सरकार को पत्र लिख कर मांग की है कि मोबाइल फोन पर जीएसटी की दर 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी जाए।
बढ़ती लागत और घटती बिक्री से परेशान
इस समय दुनिया भर के बाजारों में मेमोरी चिप एवं स्मार्टफोन में काम आने वाले कुछ साजो-सामान की कीमतें बढ़ रही है। घरेलू बाजार में देखें तो बीते कुछ महीने से स्मार्टफोन की बिक्री भी सुस्त पड़ी है। इससे मोबाइल फोन बनाने वालों पर दोहरी मार पड़ी है। मोबाइल फोन बनाने वालों का कहना है कि ऐसे प्रतिस्पर्धी माहौल में इनपुट कॉस्ट के हिसाब से प्रोडक्ट के दाम में बढ़ोतरी को कर सकते नहीं। इसलिए सरकार से ही अपनी गुहार लगाई है।
सरकार से क्या मांग की है?
इंडिया सेलुलर और इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) ने बीते 2 सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र भेजा है। इसमें बताया गया है कि भारत अब मात्रा या वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है। यही नहीं, FY 2025-26 में तो मोबाइल फोन देश का सबसे बड़ा एक्पोर्ट प्रोडक्ट बन गया है। उनका कहना है कि जिस हिसाब से मोबाइल फोन इंडस्ट्री की इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी हुई है, उस वजह से तैयार उत्पाद की कीमत ज्यादा हो गई है। लेकिन देश में मोबाइल फोन की बिक्री घटी है। पहले जितनी अवधि में लोग पुराने फोन को बदल लेते थे, वह समय अब लंबा हो गया है। यही नहीं, लोग अब महंगे स्मार्टफोन के बजाय सस्ते फोन पर शिफ्ट हो रहे हैं।
जीएसटी की दरें कम हो
ICEA के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने वित्त मंत्री को लिखे पत्र में कहा है "यह असंतुलन अगले उत्पादन वृद्धि के चरण को सीमित करेगा जब तक कि भारत अपने घरेलू बाजार में गति वापस नहीं लाता। इसलिए ICEA सरकार से जीएसटी घटाने के लिए हस्तक्षेप की मांग करती है।" उन्होंने सरकार से मांग की है कि मोबाइल फोन पर इस समय जो जीएसटी की दर 18 फीसदी लग रही है, उसे घटा कर 5 फीसदी कर दिया जाए।
टैक्स घटाने का यह फायदा
मोहिंद्रू का कहना है कि मोबाइल फोन पर टैक्स की दर कम होने का फायदा ही होगा। पहला फायदा तो यह होगा कि लोग टैक्स बचाने के लिए ग्रे मार्केट से खरीदारी नहीं करेंगे। दूसरा, कि प्रोडक्ट का दाम और कम हो सकेगा। उल्लेखनीय है कि महंगे टैक्स से बचने के लिए लोग बिना बिल के या ग्रे मार्केट से सामान खरीद लेते हैं।
बढ़ती लागत और घटती बिक्री से परेशान
सरकार से क्या मांग की है?
इंडिया सेलुलर और इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) ने बीते 2 सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र भेजा है। इसमें बताया गया है कि भारत अब मात्रा या वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है। यही नहीं, FY 2025-26 में तो मोबाइल फोन देश का सबसे बड़ा एक्पोर्ट प्रोडक्ट बन गया है। उनका कहना है कि जिस हिसाब से मोबाइल फोन इंडस्ट्री की इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी हुई है, उस वजह से तैयार उत्पाद की कीमत ज्यादा हो गई है। लेकिन देश में मोबाइल फोन की बिक्री घटी है। पहले जितनी अवधि में लोग पुराने फोन को बदल लेते थे, वह समय अब लंबा हो गया है। यही नहीं, लोग अब महंगे स्मार्टफोन के बजाय सस्ते फोन पर शिफ्ट हो रहे हैं।
जीएसटी की दरें कम हो
ICEA के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने वित्त मंत्री को लिखे पत्र में कहा है "यह असंतुलन अगले उत्पादन वृद्धि के चरण को सीमित करेगा जब तक कि भारत अपने घरेलू बाजार में गति वापस नहीं लाता। इसलिए ICEA सरकार से जीएसटी घटाने के लिए हस्तक्षेप की मांग करती है।" उन्होंने सरकार से मांग की है कि मोबाइल फोन पर इस समय जो जीएसटी की दर 18 फीसदी लग रही है, उसे घटा कर 5 फीसदी कर दिया जाए।
टैक्स घटाने का यह फायदा
मोहिंद्रू का कहना है कि मोबाइल फोन पर टैक्स की दर कम होने का फायदा ही होगा। पहला फायदा तो यह होगा कि लोग टैक्स बचाने के लिए ग्रे मार्केट से खरीदारी नहीं करेंगे। दूसरा, कि प्रोडक्ट का दाम और कम हो सकेगा। उल्लेखनीय है कि महंगे टैक्स से बचने के लिए लोग बिना बिल के या ग्रे मार्केट से सामान खरीद लेते हैं।
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