'इंजन, पैसेंजर कोच' बेचकर रेलवे ने कमाए 27 करोड़, यार्ड भी खाली हो गए, 5000 मीट्रिक टन था कबाड़

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नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने कबाड़ बेचकर अपने खजाने में बड़ा इजाफा किया है। दरअसल, पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने कबाड़ बेचकर करीब 27 करोड़ रुपये हासिल किए हैं। इस सफाई अभियान से रेलवे यार्ड में काफी जगह भी खाली हो गई। यानी रेलवे को इससे कमाई के साथ-साथ उसके यार्ड और बाकी जगहें भी खाली होने का फायदा मिला है। इन कबाड़ में बेकार इलेक्ट्रिक इंजन और पैसेंजर कोच भी शामिल हैं।



रेलवे ने बेच दिए बेकार इंजन-पैसेंजर कोचटाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रेलवे के 'जीरो स्क्रैप अभियान' के तहत चालू वित्त वर्ष में लगभग 5,000 मीट्रिक टन कबाड़ (स्क्रैप) की नीलामी कर 26.96 करोड़ रुपये का भारी राजस्व हासिल किया है। इस अभियान के दौरान जिन प्रमुख चीजों को हटाया गया, उनमें दो बेकार हो चुके WAG-5 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव, दो बेकार पैसेंजर कोच, एक टावर वैगन, रतलाम लोकोमोटिव केयर सेंटर के खराब उपकरण और रास्ते में पड़ा कबाड़ शामिल हैं।
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कबाड़ बेचने से रेलवे के यार्ड में जगह हो गई खालीइस वित्तीय लाभ के अलावा, इस बड़े सफाई अभियान से रेलवे यार्ड और मरम्मत केंद्रों में काफी जगह खाली हुई है, जो कामकाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। रतलाम मंडल के पीआरओ मुकेश कुमार ने बताया, 'मंडल रेल प्रबंधक अश्विनी कुमार और वरिष्ठ मंडल सामग्री प्रबंधक अमीर यादव के मार्गदर्शन में चलाए गए इस अभियान का उद्देश्य बेकार सामग्री को व्यवस्थित तरीके से हटाना, रेलवे परिसर में जगह का बेहतर उपयोग करना और बेकार हो चुकी संपत्तियों से ज्यादा से ज्यादा राजस्व जुटाना है।'



रेलवे ने 500 करोड़ का कबाड़ बेचने का रखा है लक्ष्य
  • पश्चिम रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 16 अक्टूबर तक लगभग ₹320 करोड़ की स्क्रैप बिक्री दर्ज की है, जो इसके ₹248.97 करोड़ के आनुपातिक लक्ष्य से 28% से अधिक है।
  • अपने 'मिशन जीरो स्क्रैप' पहल के तहत, रेलवे जोन का उद्देश्य बेकार हो चुकी सामग्रियों से राजस्व जुटाना है और इसने इस वर्ष के लिए कुल ₹500 करोड़ से अधिक की स्क्रैप बिक्री का लक्ष्य रखा है।