जीरो एग्जिट, प्योर ग्रोथ: जियो का आने वाला IPO बाकी सबसे अलग क्यों है?
पिछले कुछ सालों में भारत में आए सबसे बड़े IPO में एक जैसी बात देखने को मिली है। वो मुख्य रूप से एग्जिट इवेंट थे यानी मौजूदा निवेशकों के लिए अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकलने का जरिया।
जब लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन यानी LIC पब्लिक हुई तो सरकार ने अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेच दिया। जब हुंडई ने 27,870 करोड़ रुपये का रिकॉर्डतोड़ ऑफर पेश किया तो उसकी दक्षिण कोरियाई पैरेंट कंपनी ने ऑफर फॉर सेल1 के जरिए सारा कैश हासिल कर लिया। पेटीएम का मामला मिला-जुला रहा, उसके शुरुआती तौर पर प्लान किए गए 16,600 करोड़ रुपये के ड्राफ्ट का आधा हिस्सा नए इश्यू और अपने शेयर बेचकर बाहर निकलने2 की चाह रखने वाले मौजूदा निवेशकों के बीच बराबर-बराबर बांटा गया।

रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी, जियो प्लेटफॉर्म्स, मार्केट में अपनी एंट्री के लिए बिल्कुल अलग रास्ता अपना रही है। टेलीकॉम और डिजिटल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ने अपनी पेशकश को पूरी तरह से फ्रेश इश्यू यानी नए शेयर जारी करने के तौर पर तैयार किया है। मौजूदा शेयरधारकों में से कोई भी अपना हिस्सा नहीं बेच रहा है।
सार्वजनिक बेंचमार्क तय करनापिछले 6 साल से जियो प्लेटफॉर्म्स की वैल्यू प्राइवेट डील्स के जरिए तय की जा रही थी। इसकी शुरुआत 2020 में फंड जुटाने से हुई, जब मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियों और इन्वेस्टमेंट फंड्स को अपने डिजिटल बिजनेस में शामिल किया। अब पब्लिक लिस्टिंग से मार्केट को इसकी वैल्यू तय करने का मौका मिलेगा।
ऐसी उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं कि कंपनी की वैल्यूएशन 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। उस लेवल पर जियो प्लेटफॉर्म्स 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की वैल्यूएशन पर लिस्ट होने वाली पहली भारतीय कंपनी बन सकती है और मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से देश की टॉप चार लिस्टेड कंपनियों में शामिल हो सकती है।
नए इश्यू की प्रक्रियाकंपनी की फाइलिंग्स के अनुसार, प्रस्तावित IPO में 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 27 करोड़ तक नए शेयर्स जारी किए जाएंगे, जिसमें ऑफर फॉर सेल3 बिल्कुल शामिल नहीं होगा और इस IPO को पूरी तरह फ्रेश रखकर जनता से जुटाया गया हर एक रुपया कंपनी के भीतर ही रहेगा ना कि बाहर निकलने वाले प्रमोटर्स की जेब में जाएगा।
रिलायंस के तय लक्ष्यों के अनुसार, इस फंड को जुटाने का मुख्य मकसद एक बेहतर बैलेंस शीट बनाना है। कंपनी इस पैसे का अधिकतर हिस्सा अपने टेलीकॉम बिजनेस, रिलायंस जियो इन्फोकॉम जिसके चेयरमैन आकाश अंबानी4 हैं, पर लिए गए 27,500 करोड़ रुपये तक के कर्ज को समय से पहले चुकाने में इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। बाकी बचे पैसे का इस्तेमाल कंपनी के सामान्य कामकाज के लिए किया जाएगा।
कम से कम डाइल्यूशन, ज्यादा से ज्यादा रिटेंशनआंकड़ों से पता चलता है कि नए शेयर जारी करने का मौजूदा ओनरशिप लिमिट पर बहुत कम असर पड़ेगा। कुल आउटस्टैंडिंग शेयरों की संख्या 8,93,90,30,830 से बढ़कर 9,20,90,30,830 हो जाएगी जिसका मतलब है कि इक्विटी में लगभग 2.9% की मामूली कमी आएगी। पिछली फाइलिंग के अनुसार, इश्यू5 से पहले पैरेंट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो प्लेटफॉर्म्स में 66.43 प्रतिशत की बड़ी हिस्सेदारी है।
रिटेल और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए, जियो और पिछली बड़ी लिस्टिंग के बीच का यह अंतर दिखाता है कि कंपनियां कैपिटल मार्केट का इस्तेमाल किस तरह करती हैं, जहां एक तरफ 'ऑफर फॉर सेल' में पैसा शुरुआती निवेशकों या पैरेंट कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए कंपनी से बाहर चला जाता है, वहीं जियो द्वारा प्रस्तावित पूरी तरह से फ्रेश इश्यू में सारा पैसा सीधा कंपनी के भीतर कर्ज चुकाने, वित्तीय स्थिति मजबूत करने और मार्केट में अगले चरण अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी के काम में लगता है।
References:
Chittorgarh: Hyundai IPO record details (https://www.chittorgarh.com/article/why-jio-ipo-could-be-indias-biggest-ipo-ever/664/) Chittorgarh: Paytm IPO review (https://www.chittorgarh.com/ipo_review/paytm-ipo/3171/) ICICI Direct: Everything to know about Jio Platforms IPO (https://www.icicidirect.com/research/equity/finace/everything-to-know-about-jio-platforms-ipo ) PL India: Jio Platforms IPO dilution and debt details (https://www.plindia.com/news/jio-platforms-ipo-of-27-crore-fresh-shares-to-help-repay-reliance-jio-debt/) 5paisa: Jio Platforms pre-issue holding (https://www.5paisa.com/blog/jio-platforms-ipo-2026-dates-issue-size-drhp)
जब लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन यानी LIC पब्लिक हुई तो सरकार ने अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेच दिया। जब हुंडई ने 27,870 करोड़ रुपये का रिकॉर्डतोड़ ऑफर पेश किया तो उसकी दक्षिण कोरियाई पैरेंट कंपनी ने ऑफर फॉर सेल1 के जरिए सारा कैश हासिल कर लिया। पेटीएम का मामला मिला-जुला रहा, उसके शुरुआती तौर पर प्लान किए गए 16,600 करोड़ रुपये के ड्राफ्ट का आधा हिस्सा नए इश्यू और अपने शेयर बेचकर बाहर निकलने2 की चाह रखने वाले मौजूदा निवेशकों के बीच बराबर-बराबर बांटा गया।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी, जियो प्लेटफॉर्म्स, मार्केट में अपनी एंट्री के लिए बिल्कुल अलग रास्ता अपना रही है। टेलीकॉम और डिजिटल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ने अपनी पेशकश को पूरी तरह से फ्रेश इश्यू यानी नए शेयर जारी करने के तौर पर तैयार किया है। मौजूदा शेयरधारकों में से कोई भी अपना हिस्सा नहीं बेच रहा है।
सार्वजनिक बेंचमार्क तय करनापिछले 6 साल से जियो प्लेटफॉर्म्स की वैल्यू प्राइवेट डील्स के जरिए तय की जा रही थी। इसकी शुरुआत 2020 में फंड जुटाने से हुई, जब मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियों और इन्वेस्टमेंट फंड्स को अपने डिजिटल बिजनेस में शामिल किया। अब पब्लिक लिस्टिंग से मार्केट को इसकी वैल्यू तय करने का मौका मिलेगा।
ऐसी उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं कि कंपनी की वैल्यूएशन 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। उस लेवल पर जियो प्लेटफॉर्म्स 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की वैल्यूएशन पर लिस्ट होने वाली पहली भारतीय कंपनी बन सकती है और मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से देश की टॉप चार लिस्टेड कंपनियों में शामिल हो सकती है।
नए इश्यू की प्रक्रियाकंपनी की फाइलिंग्स के अनुसार, प्रस्तावित IPO में 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 27 करोड़ तक नए शेयर्स जारी किए जाएंगे, जिसमें ऑफर फॉर सेल3 बिल्कुल शामिल नहीं होगा और इस IPO को पूरी तरह फ्रेश रखकर जनता से जुटाया गया हर एक रुपया कंपनी के भीतर ही रहेगा ना कि बाहर निकलने वाले प्रमोटर्स की जेब में जाएगा।
रिलायंस के तय लक्ष्यों के अनुसार, इस फंड को जुटाने का मुख्य मकसद एक बेहतर बैलेंस शीट बनाना है। कंपनी इस पैसे का अधिकतर हिस्सा अपने टेलीकॉम बिजनेस, रिलायंस जियो इन्फोकॉम जिसके चेयरमैन आकाश अंबानी4 हैं, पर लिए गए 27,500 करोड़ रुपये तक के कर्ज को समय से पहले चुकाने में इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। बाकी बचे पैसे का इस्तेमाल कंपनी के सामान्य कामकाज के लिए किया जाएगा।
कम से कम डाइल्यूशन, ज्यादा से ज्यादा रिटेंशनआंकड़ों से पता चलता है कि नए शेयर जारी करने का मौजूदा ओनरशिप लिमिट पर बहुत कम असर पड़ेगा। कुल आउटस्टैंडिंग शेयरों की संख्या 8,93,90,30,830 से बढ़कर 9,20,90,30,830 हो जाएगी जिसका मतलब है कि इक्विटी में लगभग 2.9% की मामूली कमी आएगी। पिछली फाइलिंग के अनुसार, इश्यू5 से पहले पैरेंट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो प्लेटफॉर्म्स में 66.43 प्रतिशत की बड़ी हिस्सेदारी है।
रिटेल और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए, जियो और पिछली बड़ी लिस्टिंग के बीच का यह अंतर दिखाता है कि कंपनियां कैपिटल मार्केट का इस्तेमाल किस तरह करती हैं, जहां एक तरफ 'ऑफर फॉर सेल' में पैसा शुरुआती निवेशकों या पैरेंट कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए कंपनी से बाहर चला जाता है, वहीं जियो द्वारा प्रस्तावित पूरी तरह से फ्रेश इश्यू में सारा पैसा सीधा कंपनी के भीतर कर्ज चुकाने, वित्तीय स्थिति मजबूत करने और मार्केट में अगले चरण अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी के काम में लगता है।
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