China WTO Panel Bid: चीन ने की थी मांग, भारत ने रोक दिया, अब आगे ऐसे बढ़ेगा ये मामला
नई दिल्ली: भारत ने विश्व व्यापार संगठन ( WTO ) में चीन के एक अनुरोध को रोक दिया है। उसने एक विवाद समाधान पैनल बनाने की अपील की थी। यह मामला नई दिल्ली की ओर से सोलर सेल, मॉड्यूल और इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सेक्टरों को दिए जा रहे समर्थन उपायों जुड़ा है। चीन ने इन उपायों को चुनौती दी है।
मामले की टाइमलाइन
जिनेवा स्थित एक अधिकारी ने बताया कि भारत ने 22 मई को हुई विवाद समाधान संस्था (DSB) की बैठक में पैनल बनाने के बीजिंग के पहले अनुरोध को खारिज कर दिया।

चीन ने भारत पर लगाए हैं ये आरोपचीन ने आरोप लगाया है कि कुछ तकनीकी उत्पादों पर भारत की ओर से लगाए गए आयात शुल्क और आयातित सामानों के मुकाबले घरेलू उत्पादों को प्राथमिकता देने वाले उपाय चीनी सामानों के साथ भेदभाव करते हैं। बीजिंग ने तर्क दिया कि ये उपाय WTO के कई प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं। इनमें शामिल हैं:
जनरल एग्रीमेंट ऑन टैरिफ एंड ट्रेड (GATT) 1994 एग्रीमेंट ऑन सब्सिडीज एंड काउंटरवेलिंग मेजर्स एग्रीमेंट ऑन ट्रेड-रिलेटेड इंवेस्टमेंट मेजर्स
भारत ने दिया है चीन को जवाब
भारत ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। कहा है कि उसके उपाय WTO के नियमों के अनुरूप हैं।
भारत ने यह भी कहा कि यह 'विडंबना' है कि एक 'जिम्मेदार और डायवर्सिफाइड सप्लाई चेन' की जरूरत को स्वीकार करने के बावजूद एक ऐसा देश जिसका ग्लोबल सोलर मॉड्यूल वैल्यू चेन पर 80 फीसदी से अधिक कंट्रोल होने का अनुमान है, ऐसे उपाय कर रहा है जो अन्य देशों में उद्योग के विकास में बाधा डाल सकते हैं।
अब आगे कैसे बढ़ेगा मामला?WTO के नियमों के तहत, जिस देश पर आरोप लगा है (प्रतिवादी देश), वह पैनल बनाने के पहले अनुरोध को रोक सकता है। हालांकि, अगर चीन अगली DSB बैठक में अपने अनुरोध को फिर से पेश करता है तो पैनल अपने आप बन जाएगा।
यह पैनल जांच करेगा कि क्या कुछ हाई-टेक गुड्स पर भारत के आयात शुल्क और सोलर उत्पादों के लिए प्रोत्साहन उपाय देश की WTO प्रतिबद्धताओं के अनुरूप हैं।
भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ाने की कोशिश
भारत ने सोलर सेक्टर में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के लिए कई उपाय शुरू किए हैं। इनमें सोलर सेल और मॉड्यूल पर आयात शुल्क, कुछ सरकारी-समर्थित परियोजनाओं के लिए स्थानीय खरीद की आवश्यकताएं, 'मॉडल और निर्माताओं की अनुमोदित सूची' (ALMM), और 'प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम' शामिल हैं।
चीन डाल रहा है अड़ंगे
चीन अलग से भी भारत के खिलाफ WTO में एक विवाद पर आगे बढ़ रहा है। यह ऑटोमोटिव और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टरों में भारत की ओर से उठाए गए उपायों से संबंधित है।
2025-26 में चीन अमेरिका को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर बन गया। इस दौरान द्विपक्षीय व्यापार 151.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। जबकि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया।
मामले की टाइमलाइन
- चीन ने इस महीने की शुरुआत में WTO की विवाद समाधान संस्था से संपर्क किया था।
- इस मामले में उसकी ओर से एक पैनल बनाने की मांग की गई थी।
- पिछले साल दिसंबर में चीन ने WTO में एक विवाद दायर किया था।
- विवाद पर द्विपक्षीय बातचीत से कोई आपसी सहमति वाला समाधान नहीं निकला था।
- इसी के बाद चीन ने पैनल बनाने की मांग करने के लिए कदम उठाया था।
जिनेवा स्थित एक अधिकारी ने बताया कि भारत ने 22 मई को हुई विवाद समाधान संस्था (DSB) की बैठक में पैनल बनाने के बीजिंग के पहले अनुरोध को खारिज कर दिया।
चीन ने भारत पर लगाए हैं ये आरोपचीन ने आरोप लगाया है कि कुछ तकनीकी उत्पादों पर भारत की ओर से लगाए गए आयात शुल्क और आयातित सामानों के मुकाबले घरेलू उत्पादों को प्राथमिकता देने वाले उपाय चीनी सामानों के साथ भेदभाव करते हैं। बीजिंग ने तर्क दिया कि ये उपाय WTO के कई प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं। इनमें शामिल हैं:
भारत ने दिया है चीन को जवाब
भारत ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। कहा है कि उसके उपाय WTO के नियमों के अनुरूप हैं।
भारत ने यह भी कहा कि यह 'विडंबना' है कि एक 'जिम्मेदार और डायवर्सिफाइड सप्लाई चेन' की जरूरत को स्वीकार करने के बावजूद एक ऐसा देश जिसका ग्लोबल सोलर मॉड्यूल वैल्यू चेन पर 80 फीसदी से अधिक कंट्रोल होने का अनुमान है, ऐसे उपाय कर रहा है जो अन्य देशों में उद्योग के विकास में बाधा डाल सकते हैं।
अब आगे कैसे बढ़ेगा मामला?WTO के नियमों के तहत, जिस देश पर आरोप लगा है (प्रतिवादी देश), वह पैनल बनाने के पहले अनुरोध को रोक सकता है। हालांकि, अगर चीन अगली DSB बैठक में अपने अनुरोध को फिर से पेश करता है तो पैनल अपने आप बन जाएगा।
यह पैनल जांच करेगा कि क्या कुछ हाई-टेक गुड्स पर भारत के आयात शुल्क और सोलर उत्पादों के लिए प्रोत्साहन उपाय देश की WTO प्रतिबद्धताओं के अनुरूप हैं।
भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ाने की कोशिश
चीन डाल रहा है अड़ंगे
चीन अलग से भी भारत के खिलाफ WTO में एक विवाद पर आगे बढ़ रहा है। यह ऑटोमोटिव और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टरों में भारत की ओर से उठाए गए उपायों से संबंधित है।
2025-26 में चीन अमेरिका को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर बन गया। इस दौरान द्विपक्षीय व्यापार 151.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। जबकि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया।
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