Private Goods Train: हवाई जहाज या ट्रक की तरह अब मालगाड़ी भी किराये पर मिलेगी, भारत में हो गई शुरुआत
नई दिल्ली: किराये पर ट्रक लेकर या हवाई जहाज लेकर उसे ऑपरेट करने का काम काफी पहले से हो रहा है। लेकिन मालगाड़ी (Wagon) के क्षेत्र में लीजिंग सिस्टम भारत में नहीं था। अब वह भी शुरू हो रहा है। मतलब कि भारतीय रेल (Indian Railway) से लेकर कोई भी कंपनी किराये पर मालगाड़ी लेकर उसे ऑपरेट कर सकेगी।
किसने की है शुरुआतरेलवे के वैगन बनाने वाली कोलकाता की एक कंपनी है टैक्समेको रेल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड (Texmaco Rail & Engineering Limited)। इसी ने फ्रांस की लीजिंग कंपनी Touax Group और नॉर्थ अमेरिकी ग्रुप TrinityRail Global Inc. (“Trinity”) के साथ हाथ मिलाया है। यहां जारी एक बयान के मुताबिक जो Trinity Industries, Inc. की सहायक कंपनी है, ने घोषणा की है कि Trinity अब Touax Group और Texmaco Rail & Engineering Limited के साथ उनके विश्वस्तरीय रेलकार लीजिंग संयुक्त उद्यम Touax Texmaco Railcar Leasing Pvt. Ltd. (TTRL) में शामिल हो गई है।

प्राइवेट मालगाड़ी चलाने का रास्ता प्रशस्त
रेलवे के मैकेनिकल डिपार्टमेंट से रिटायर एक सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी ने बताया कि इसे भारतीय रेलवे में भी प्राइवेटाइजेशन की शुरुआत मान सकते हैं। अभी तक मालगाड़ी के डिब्बे रेलवे की संपत्ति होती थी। उसकी खरीद रेलवे की तरफ से होता है, उसका मेंटनेंस और रिपेयरिंग भी रेलवे की तरफ से ही किया जाता है। प्राइवेट लीजिंग कंपनी के आ जाने के बाद से रेलवे इन सब झंझटों से दूर हो जाएगी क्योंकि यह सब काम प्राइवेट कंपनी का ही होगा।
टैक्समेको का क्या कहना हैTexmaco Rail & Engineering Limited के चेयरमैन सरोज कुमार पोद्दार ने बताया “यह साझेदारी भारत के मालगाड़ी रेल इकोसिस्टम के लिए एक निर्णायक क्षण है। Touax की लीजिंग विशेषज्ञता, Trinity की वैश्विक रेल तकनीकी नेतृत्व क्षमता और Texmaco की निर्माण एवं बाजार ताकत को मिलाकर हम एक स्केलेबल, मजबूत और वैश्विक मानकों पर आधारित प्लेटफॉर्म बना रहे हैं। यह भारत के दीर्घकालिक लक्ष्य के अनुरूप है, जिसमें माल परिवहन में रेल की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।”
रेल ट्रांसपोर्ट के लिए फायदेमंदइस साझेदारी को भारत में रेल ट्रांसपोर्ट के लिए फायदेमंद बताया जा रहा है। दरअसल, यह डेवलपमेंट ऐसे समय में हुआ है जबकि भारत माल परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है। अभी अपने यहां कुल गुड्स ट्रांसपोर्ट में रेलवे की हिस्सेदारी 27% है। रेल मंत्रालय इसे बढ़ाकर 45% करना चाहता है। जाहिर है कि इस लक्ष्य को पाने के लिए बड़ी संख्या में माल डिब्बों की मांग होगी। इसलिए इसमें प्राइवेट इन्वेस्टमेंट की भी दरकार होगी।
किसने की है शुरुआतरेलवे के वैगन बनाने वाली कोलकाता की एक कंपनी है टैक्समेको रेल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड (Texmaco Rail & Engineering Limited)। इसी ने फ्रांस की लीजिंग कंपनी Touax Group और नॉर्थ अमेरिकी ग्रुप TrinityRail Global Inc. (“Trinity”) के साथ हाथ मिलाया है। यहां जारी एक बयान के मुताबिक जो Trinity Industries, Inc. की सहायक कंपनी है, ने घोषणा की है कि Trinity अब Touax Group और Texmaco Rail & Engineering Limited के साथ उनके विश्वस्तरीय रेलकार लीजिंग संयुक्त उद्यम Touax Texmaco Railcar Leasing Pvt. Ltd. (TTRL) में शामिल हो गई है।
प्राइवेट मालगाड़ी चलाने का रास्ता प्रशस्त
रेलवे के मैकेनिकल डिपार्टमेंट से रिटायर एक सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी ने बताया कि इसे भारतीय रेलवे में भी प्राइवेटाइजेशन की शुरुआत मान सकते हैं। अभी तक मालगाड़ी के डिब्बे रेलवे की संपत्ति होती थी। उसकी खरीद रेलवे की तरफ से होता है, उसका मेंटनेंस और रिपेयरिंग भी रेलवे की तरफ से ही किया जाता है। प्राइवेट लीजिंग कंपनी के आ जाने के बाद से रेलवे इन सब झंझटों से दूर हो जाएगी क्योंकि यह सब काम प्राइवेट कंपनी का ही होगा।
टैक्समेको का क्या कहना हैTexmaco Rail & Engineering Limited के चेयरमैन सरोज कुमार पोद्दार ने बताया “यह साझेदारी भारत के मालगाड़ी रेल इकोसिस्टम के लिए एक निर्णायक क्षण है। Touax की लीजिंग विशेषज्ञता, Trinity की वैश्विक रेल तकनीकी नेतृत्व क्षमता और Texmaco की निर्माण एवं बाजार ताकत को मिलाकर हम एक स्केलेबल, मजबूत और वैश्विक मानकों पर आधारित प्लेटफॉर्म बना रहे हैं। यह भारत के दीर्घकालिक लक्ष्य के अनुरूप है, जिसमें माल परिवहन में रेल की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।”
रेल ट्रांसपोर्ट के लिए फायदेमंदइस साझेदारी को भारत में रेल ट्रांसपोर्ट के लिए फायदेमंद बताया जा रहा है। दरअसल, यह डेवलपमेंट ऐसे समय में हुआ है जबकि भारत माल परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है। अभी अपने यहां कुल गुड्स ट्रांसपोर्ट में रेलवे की हिस्सेदारी 27% है। रेल मंत्रालय इसे बढ़ाकर 45% करना चाहता है। जाहिर है कि इस लक्ष्य को पाने के लिए बड़ी संख्या में माल डिब्बों की मांग होगी। इसलिए इसमें प्राइवेट इन्वेस्टमेंट की भी दरकार होगी।
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