Stock Market Crash: ₹10 लाख करोड़ स्वाहा! महीने के पहले दिन शेयर मार्केट लहूलुहान, जान लीजिए 5 मुख्य कारण

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नई दिल्ली: सितंबर में शेयर बाजार में भारी बिकवाली रही और निवेशकों को लाखों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। माना जा रहा था कि अक्टूबर का महीना निवेशकों के लिए खुशियां लेकर आएगा क्योंकि ऐतिहासिक रूप से यह महीना शेयर बाजार के लिए अच्छा रहा है। लेकिन महीने के पहले ही दिन निवेशकों को 10 लाख करोड़ रुपये का झटका लगा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 1.5% से ज्यादा की गिरावट आई। लगातार विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और अन्य कारणों से निवेशक डरे हुए थे।
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बीएसई सेंसेक्स करीब 1,100 अंक गिरकर 71,400 के नीचे आ गया, जबकि निफ्टी 50 में करीब 400 अंक की गिरावट आई और यह 22,300 के नीचे चला गया। इस भारी बिकवाली के कारण बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग 10 लाख करोड़ रुपये कम होकर 462 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया।

किन शेयरों में आई गिरावट?आज M&M, मारुति सुजुकी, टाटा स्टील, अडानी पोर्ट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, ITC, HUL और BEL के शेयरों में 3-4% की गिरावट आई और ये सेंसेक्स में सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयर रहे। वहीं ट्रेंट, L&T, पावर ग्रिड, बजाज फाइनेंस, एटरनल और टाइटन के शेयरों में 2% से ज्यादा गिरावट आई। इसके उलट, HDFC बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में लगभग 1% की बढ़त देखी गई।

ब्रॉडर मार्केट में भी भारी गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में लगभग 2% की गिरावट दर्ज की गई। दोपहर बाद बिकवाली तेज होने के साथ ही बाजार में उतार-चढ़ाव मापने वाला इंडिया VIX 12% से ज्यादा बढ़कर 15.15 पर पहुंच गया।

सभी सेक्टरों में गिरावटनिफ्टी ऑटो में 4% से ज्यादा की गिरावट आई और यह सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाला सेक्टर रहा। इसी तरह निफ्टी मेटल, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कई अन्य सेक्टरों में 2-3% की गिरावट आई। बाजार का रुख काफी नकारात्मक रहा। NSE पर 594 शेयरों में बढ़त और 2,789 शेयरों में गिरावट देखी गई, जबकि 99 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। बाजार में भारी गिरावट के मुख्य कारण ये रहे:

1) FII की बिकवालीNSE के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने बुधवार को सिर्फ एक सेशन में 10,148 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे। इससे पहले मंगलवार को भी FII ने 10,743 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे थे। इस हफ्ते बुधवार तक FII की कुल बिकवाली 26,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। FII की इतनी भारी बिकवाली से निवेशकों का भरोसा कमजोर होता है।

2) बॉन्ड यील्ड में तेजीबॉन्ड यील्ड में भी तेजी जारी रही। अमेरिका में बेंचमार्क 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.31% हो गई, जो 2007 के बाद का उच्चतम स्तर है। सितंबर तिमाही के दौरान इसमें 87 बेसिस पॉइंट से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई थी, जो 1994 के बाद से सबसे बड़ी तिमाही बढ़ोतरी थी। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से आम तौर पर डेट मार्केट निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं।

3) रुपये में गिरावटअमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ने से डॉलर इंडेक्स तीन महीने से ज्यादा के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इस कारण रुपये में गिरावट आई। हालांकि आरबीआई के दखल से नुकसान कुछ सीमित रहा। रॉयटर्स के मुताबिक सरकारी बैंकों द्वारा डॉलर बेचे जाने के कारण रुपया 0.16% गिरकर 95.9850 प्रति डॉलर पर आ गया। रुपये के 95.60–96.20 की रेंज में रहने की उम्मीद है।

4) ऑटो शेयरों में गिरावटसेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट की एक वजह ऑटो सेक्टर के बड़े शेयरों में आई कमी भी रही। M&M और मारुति सुजुकी के शेयर फिलहाल बाजार में सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल हैं। हालांकि ज्यादातर ऑटो कंपनियों ने सितंबर 2025 की तुलना में ऑटो बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज की, लेकिन आंकड़े ज्यादातर उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। सितंबर 2025 के लो बेस वाले आंकड़ों की वजह यह थी कि कई ग्राहकों ने सरकार के GST सुधारों से पहले अपनी खरीदारी टाल दी थी।

5) अहम टेक्निकल लेवलबेंचमार्क इंडेक्स के अहम टेक्निकल लेवल तोड़ने के बाद बाजार में तेज गिरावट और बढ़ गई। निफ्टी इंडेक्स का पहला सपोर्ट लेवल 22,500 पर है। टेक्निकल एनालिस्ट ने चेतावनी दी थी कि अगर यह लेवल टूटता है, तो बेंचमार्क इंडेक्स के 22,400 तक गिरने की संभावना बन जाएगी। इंडेक्स दूसरे सपोर्ट लेवल से भी नीचे गिर गया है।

आठवें हफ्ते गिरावट की ओरभारतीय शेयर बाजार लगातार आठवें हफ्ते गिरावट दर्ज करने की राह पर है। ऐसा 2001 के डॉट-कॉम क्रैश के बाद पहली बार हो रहा है। कोरोना काल और 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस में भी ऐसा नहीं हुआ था। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने बताया कि पिछले दो ट्रेडिंग दिनों में FII की लगातार बिकवाली और तेज हो गई। उन्होंने चेतावनी दी कि FII की बिकवाली आगे भी जारी रह सकती है।