आईपीओ लिस्टिंग के समय स्टॉक एक्सचेंज में क्यों बजाई जाती है घंटी

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कारोबारी दुनिया और शेयर बाजार (Stock Market) में जब भी किसी बड़ी कंपनी का आईपीओ (IPO) आता है और उसकी शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री यानी लिस्टिंग होती है, तो एक बेहद खास रस्म पूरी की जाती है। आपने अक्सर टीवी या सोशल मीडिया पर देखा होगा कि लिस्टिंग के खास मौके पर कंपनी के प्रमोटर्स, अधिकारी और एक्सचेंज के मुख्य लोग एक पारंपरिक घंटी या बेल (Listing Bell) बजाते हैं। इस शानदार पल को देखने वाले हर निवेशक के मन में यह उत्सुकता जरूर होती है कि आखिर स्टॉक एक्सचेंज में यह घंटी बजाने की शुरुआत कब, कहां और कैसे हुई थी।

रिलायंस जियो (JIO IPO) जैसी बड़ी कंपनियों के संभावित आईपीओ के चर्चा में आने के साथ ही यह परंपरा फिर से सुर्खियों में आ गई है, तो आइए जानते हैं इसके पीछे का पूरा इतिहास और इसका क्या खास महत्व होता है।

स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग बेल बजाने की शुरुआत का दिलचस्प इतिहास

शेयर बाजार में घंटी बजाने की यह अनूठी परंपरा रातों-रात शुरू नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे सदियों पुराना एक दिलचस्प इतिहास जुड़ा हुआ है। शुरुआती दौर में जब आधुनिक तकनीक, कंप्यूटर और डिजिटल ट्रेडिंग सिस्टम नहीं हुआ करते थे, तब लंदन स्टॉक एक्सचेंज और न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NYSE) जैसे बड़े बाजारों में ट्रेडिंग की शुरुआत और समाप्ति की घोषणा करने के लिए लकड़ी के हथौड़े या बड़ी घंटियों का इस्तेमाल किया जाता था।

साल 1870 के आसपास न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में पहली बार औपचारिक रूप से पीतल की बड़ी घंटी को ट्रेडिंग फ्लोर पर लगाया गया, ताकि बाजार खुलने और बंद होने का स्पष्ट संकेत सभी दलालों तक पहुंचाया जा सके। समय के साथ जैसे-जैसे पेपरलेस ट्रेडिंग और इलेक्ट्रॉनिक शेयर बाजार की शुरुआत हुई, तब इस पुरानी घंटी को ट्रेडिंग शुरू करने का एक औपचारिक और जश्न मनाने का जरिया बना दिया गया।

आईपीओ लिस्टिंग के दौरान घंटी बजाने को क्यों माना जाता है बेहद शुभ और खास?

जब कोई नई कंपनी अपने आईपीओ के जरिए पहली बार पब्लिक होती है और शेयर बाजार में कदम रखती है, तो उस दिन को कंपनी और उसके निवेशकों के लिए किसी बड़े त्योहार से कम नहीं माना जाता है।

एक्सचेंज द्वारा बजाई जाने वाली यह घंटी इस बात का प्रतीक होती है कि अब कंपनी के शेयरों की खरीद-फरोख्त आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी है और बाजार में कारोबार का नया अध्याय खुल रहा है। इसे सफलता, समृद्धि और एक नए सफर की शुरुआत का शंखनाद माना जाता है, जो कंपनी के फाउंडर्स और निवेशकों के अंदर एक नया उत्साह भर देता है। इस घंटी की गूंज के साथ ही कंपनी की मार्केट वैल्यू और उसकी वित्तीय यात्रा का एक नया सफर दुनिया के सामने आ जाता है, जिसे लेकर हर कोई बेहद रोमांचित रहता है।

भारत के शेयर बाजारों में कैसे निभाई जाती है यह परंपरा और इसका महत्व

भारत के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज जैसे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में भी पश्चिमी देशों की इस परंपरा को बहुत ही शानदार तरीके से अपनाया गया है। जब भी भारत में किसी बड़ी कंपनी का आईपीओ लिस्ट होता है, तो एक्सचेंज के शानदार ऑडिटोरियम या ट्रेडिंग हॉल में एक बड़ी सीरेमोनियल बेल रखी जाती है जिसे कंपनी के मालिक, सीईओ और प्रमुख निवेशक मिलकर बजाते हैं। यह पल मीडिया के कैमरों में कैद किया जाता है और देश-दुनिया के निवेशकों के बीच एक सकारात्मक संदेश जाता है कि कंपनी भारतीय अर्थव्यवस्था में अपना योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
जियो (JIO) जैसी दिग्गज और देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी के संभावित आईपीओ को लेकर भी निवेशकों में भारी उत्साह है और जब यह शेयर बाजार में उतरेगा, तो यह लिस्टिंग बेल सेरेमनी देश के वित्तीय इतिहास का एक सबसे बड़ा और ऐतिहासिक पल साबित होगी।