शेयर बाजार में बड़ी मंदी की आहट: दिग्गजों ने दी चेतावनी, निवेशकों के लिए साल 2027 रहेगा बेहद मुश्किल

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दुनिया भर के शेयर बाजारों में इन दिनों जहां एक तरफ तेजी का दौर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ दिग्गज निवेशक आने वाले दिनों को लेकर गंभीर चिंता जताने लगे हैं। दुनिया के जाने-माने हेज फंड मैनेजर पॉल ट्यूडर जोन्स (Paul Tudor Jones) ने शेयर बाजार के निवेशकों को एक बड़ी चेतावनी दी है। उनके मुताबिक, आने वाला साल यानी 2027 शेयर बाजारों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण और खतरनाक

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साबित हो सकता है। जोन्स का मानना है कि मौजूदा आर्थिक और वित्तीय हालात साल 2000 में आए 'डॉट कॉम बुलबुला' (Dot-Com Bubble) फूटने से ठीक पहले जैसी स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं।

आईपीओ की बाढ़ और नई शेयर आपूर्ति से बढ़ सकता है दबाव

पॉल ट्यूडर जोन्स के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों के दौरान शेयर बाजारों में आई तेजी को मुख्य रूप से कंपनियों द्वारा किए गए शेयर बायबैक (Share Buyback) और विलय-अधिग्रहण (M&A) गतिविधियों ने समर्थन दिया था, जिससे बाजार में शेयरों की उपलब्धता कम होने में मदद मिली थी।

लेकिन अब यह ट्रेंड तेजी से बदल रहा है।

वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर की दिग्गज कंपनियां जैसे OpenAI और Anthropic अपने बड़े आईपीओ लाने की तैयारी में जुटी हैं। इसके अलावा, हाल ही में स्पेसएक्स (SpaceX) का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ भी आ चुका है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर और अपने विस्तार के लिए भारी-भरकम पूंजी जुटाने वास्ते जब ये बड़ी कंपनियां बाजार में नए शेयर जारी करेंगी, तो इससे बाजार में शेयरों की आपूर्ति अत्यधिक बढ़ जाएगी। इस अतिरिक्त आपूर्ति के कारण शेयरों की कीमतों पर भारी दबाव पड़ सकता है।

1999 जैसी खतरनाक परिस्थितियों की हो रही है पुनरावृत्ति

जोन्स ने मौजूदा बाजार की तुलना साल 1999 से की है। उन्होंने कहा कि आज के समय में भी कंपनियों के परफॉर्मेंस के बीच एक बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। जो कंपनियां AI तकनीक का तेजी से लाभ उठा रही हैं, वे लगातार आगे निकल रही हैं, जबकि बाकी कंपनियां पिछड़ रही हैं। 26 साल पहले भी कुछ ऐसे ही हालात थे जब बाजार उस बड़े झटके को सहन नहीं कर सका था। बाजार में यह बढ़ता अंतर और नई शेयर आपूर्ति निवेशकों के लिए एक बहुत बड़ा जोखिम पैदा कर रही है।

अमेरिका का बढ़ता कर्ज और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ाएंगी मुश्किलें

इसके अलावा, अमेरिका का बढ़ता राजकोषीय घाटा भी निवेशकों के लिए चिंता का बड़ा सबब बना हुआ है। अमेरिकी कर्ज 40 लाख करोड़ डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। जोन्स का अनुमान है कि जैसे-जैसे बाजार पर दबाव बढ़ेगा, सरकार को घाटे पर नियंत्रण पाने के लिए कड़े कदम उठाने पड़ेंगे।

इसके साथ ही, उन्होंने कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को लेकर भी बड़ी चेतावनी जारी की है। उनका अनुमान है कि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 20 से 25 डॉलर प्रति बैरल तक की अतिरिक्त तेजी आ सकती है।

यदि ऐसा होता है, तो यह महंगाई को बढ़ावा देगा और वैश्विक शेयर बाजारों पर अतिरिक्त दबाव का काम करेगा। इन्हीं सभी वजहों से उन्होंने आने वाले समय में सतर्क रहने और अपनी निवेश रणनीतियों को संभलकर तैयार करने की सलाह दी है।