सोने की कीमतों में गिरावट: विशेषज्ञों की भविष्यवाणी और बाजार की स्थिति
नई दिल्ली: वैश्विक बाजारों के दबाव के कारण सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है, और अगले महीने तक इसमें सुस्ती बनी रह सकती है। बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों पर अनिश्चितता, मजबूत डॉलर, अमेरिका में रोजगार के सकारात्मक आंकड़े और वैश्विक स्तर पर घटती जियो-पॉलिटिकल टेंशन सोने के लिए शॉर्ट-टर्म में चुनौतियां उत्पन्न कर रहे हैं।
कमोडिटी विश्लेषकों के अनुसार, सोना हाल ही में अपने 7 महीने के सबसे निचले स्तर से थोड़ा संभला है, लेकिन इसका समग्र रुख अभी भी कमजोर है। अमेरिका में महंगाई के ताजा आंकड़े उम्मीद के अनुसार आए हैं, जिससे सरकारी बांड की यील्ड में कमी आई है, जो सोने को मिलने वाले सपोर्ट को कम कर रहा है। मजबूत डॉलर और अमेरिका में नौकरियों के बेहतर आंकड़ों के कारण यह चिंता बनी हुई है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है, जो सोने की कीमतों को दबा रहा है।
बाजार के महत्वपूर्ण स्तर
1. अंतरराष्ट्रीय बाजार- वर्तमान में हाजिर सोना यानी स्पॉट गोल्ड अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 4022 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। यदि कीमतें 3950 डॉलर के नीचे गिरती हैं, तो यह 3800 से 3400 डॉलर तक जा सकती हैं। इसके विपरीत, यदि सोना 4200 डॉलर के पार निकलता है, तो यह 4600 से 4800 डॉलर तक पहुंच सकता है।
2. भारतीय वायदा बाजार- भारत के एमसीएक्स बाजार में सोना फिलहाल 1 लाख 43 हजार 127 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है। यदि यह 1 लाख 37 हजार 500 के नीचे गिरता है, तो सोना 1 लाख 34 हजार से 1 लाख 25 हजार 500 तक जा सकता है। लेकिन अगर यह 1 लाख 45 हजार 500 का स्तर पार करता है, तो कीमतें वापस 1 लाख 52 हजार से 1 लाख 60 हजार 500 की ओर बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाजिर सोने में इस हफ्ते 3.5% से अधिक और पिछले एक महीने में लगभग 12% की गिरावट आई है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो सोना लगातार चौथे हफ्ते और चौथे महीने में भी नुकसान दर्ज कर सकता है। हालांकि, गोल्ड ईटीएफ यानी डिजिटल सोने से निवेशकों की बिकवाली अब थोड़ी धीमी हुई है, जो दर्शाता है कि लोगों का विश्वास धीरे-धीरे वापस आ रहा है, लेकिन यह पिछले साल जितना मजबूत नहीं है।