भारत में खाद्य तेल आयात में गिरावट: पीएम मोदी की अपील का असर

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खाद्य तेल की खपत में कमी की अपील का प्रभाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2026 में देशवासियों से खाद्य तेल की खपत को कम करने की अपील की थी, जिसका प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भू-राजनीतिक तनाव के चलते विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से की गई इस अपील के बाद, जून में भारत का वनस्पति तेल आयात सालाना आधार पर 29 प्रतिशत घटकर 11.46 लाख टन पर पहुँच गया है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, यह खाद्य तेल आयात का सबसे निचला स्तर है। भारत, जो कि खाने के तेल का सबसे बड़ा आयातक है, ने जून 2025 में 16.16 लाख टन तेल खरीदा था। तेल का वित्तीय वर्ष नवंबर से अक्टूबर तक चलता है। हालांकि, जून में गिरावट के बावजूद, 2025-26 तेल वर्ष (नवंबर 2025-जून 2026) के पहले आठ महीनों में कुल आयात बढ़कर 105.7 लाख टन हो गया, जो पिछले वर्ष 99.55 लाख टन था।


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प्रधानमंत्री की अपील और उसके परिणाम

मई 2026 में पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच देश को मजबूत बनाने के लिए नागरिकों से सहयोग की अपील की थी। हैदराबाद में एक कार्यक्रम में, उन्होंने देशवासियों से सात महत्वपूर्ण अपीलें कीं, जिनमें एक साल तक सोना खरीदने और विदेश यात्रा से बचने की सलाह शामिल थी। उन्होंने 'वर्क-फ़्रॉम-होम' के तरीके को फिर से अपनाने का भी आग्रह किया। पीएम मोदी ने नागरिकों से खाद्य तेल की खपत कम करने और किसानों को विदेशी रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित किया। SEA ने एक बयान में कहा कि हालाँकि मौजूदा ऑयल ईयर में कुल मिलाकर वनस्पति तेल का आयात बढ़ा है, लेकिन जून में आई भारी गिरावट ने कुल वृद्धि की गति को धीमा कर दिया है।