केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग में संभावित बदलाव

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महत्वपूर्ण बदलाव की ओर बढ़ते कदम

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए आने वाले समय में महत्वपूर्ण परिवर्तन संभव है। आठवें वेतन आयोग से पहले, कर्मचारी संगठनों ने एक महत्वपूर्ण मसौदा सरकार को प्रस्तुत किया है। इस दस्तावेज में वेतन, पेंशन और भत्तों के संबंध में कई महत्वपूर्ण सुझाव शामिल हैं। महंगाई में वृद्धि और बदलती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ये प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय सरकार को लेना है, लेकिन इन सिफारिशों ने उम्मीदों को बढ़ा दिया है।


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न्यूनतम वेतन में वृद्धि की मांग

मसौदे में सबसे महत्वपूर्ण मांग न्यूनतम मूल वेतन को 18,000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की है। इसके लिए 3.83 का फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित किया गया है। यदि यह लागू होता है, तो सभी स्तरों पर वेतन में महत्वपूर्ण वृद्धि देखने को मिल सकती है। इसके साथ ही, नई वेतन संरचना को 1 जनवरी 2026 से बिना किसी देरी के लागू करने की सिफारिश की गई है।


वार्षिक वेतन वृद्धि और संरचना में बदलाव

वर्तमान व्यवस्था की तुलना में हर साल 6 प्रतिशत वेतन वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों की आय को महंगाई के अनुरूप बनाए रखना है। इसके अलावा, मौजूदा 18 वेतन स्तरों को घटाकर केवल 7 स्तर करने की सिफारिश की गई है, जिससे प्रमोशन की प्रक्रिया सरल होगी और कर्मचारियों को करियर में ठहराव की समस्या कम होगी।


पेंशन व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता

पेंशन के संबंध में भी महत्वपूर्ण बदलावों की सिफारिश की गई है। सबसे प्रमुख मांग पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की है, विशेषकर उन कर्मचारियों के लिए जो 2004 के बाद सेवा में आए हैं। इसके अलावा, पेंशन को अंतिम वेतन का 67 प्रतिशत तय करने और पारिवारिक पेंशन को 50 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया गया है। हर पांच साल में पेंशन संशोधन की भी बात की गई है।


करियर विकास और सुविधाओं पर ध्यान

मसौदे में कर्मचारियों के करियर विकास को भी महत्व दिया गया है। इसमें 30 साल की सेवा के दौरान कम से कम पांच प्रमोशन या वित्तीय उन्नयन देने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही, बीमा कवर बढ़ाने, ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर बेहतर मुआवजा देने और लीव एनकैशमेंट की सीमा समाप्त करने की मांग की गई है।


भत्तों और सामाजिक सुरक्षा में सुधार

भत्तों में भी बदलाव की सिफारिश की गई है। हाउस रेंट अलाउंस को बढ़ाकर न्यूनतम स्तर पर 30 प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव है, विशेषकर महानगरों के लिए अधिक दरें सुझाई गई हैं। मातृत्व अवकाश को 240 दिन करने, पितृत्व अवकाश बढ़ाने और माता-पिता की देखभाल के लिए विशेष अवकाश देने की भी बात की गई है। ये सभी सुझाव कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में हैं।