भारत के द्विपक्षीय निवेश संधियों के लिए नया खाका तैयार, वित्त मंत्री का बयान

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निवेश संधियों के लिए नया खाका

(फाइल फोटो के साथ) नई दिल्ली, 5 अक्टूबर। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को जानकारी दी कि द्विपक्षीय निवेश संधियों के लिए एक नया ढांचा तैयार किया गया है, जिसे निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्रिमंडल से जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ साल से इस नए ढांचे पर काम चल रहा है, जिसका लक्ष्य 2016 में स्वीकृत ढांचे की कमियों को दूर करना और दोनों देशों के निवेशकों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करना है। सीतारमण ने ‘म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन’ में कहा कि नए ढांचे को अंतिम रूप देने के दौरान भी भारत ने निवेश संरक्षण समझौतों पर बातचीत जारी रखी है।


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सऊदी अरब के साथ समझौता

उन्होंने बताया कि सऊदी अरब के साथ हाल ही में हुआ समझौता 2016 के ढांचे से आगे बढ़ता है और इसमें दोनों देशों के निवेशकों के हितों की सुरक्षा पर अधिक स्पष्ट प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा, भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ओमान और कुछ मध्य एशियाई देशों के साथ भी इसी तरह के समझौते किए हैं। सीतारमण ने कहा, 'हमारे पास नया खाका है, जिसे जल्द ही मंजूरी मिल जाएगी।'


अन्य देशों के साथ बातचीत

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस बीच बातचीत की प्रक्रिया को रोका नहीं गया है। हम अन्य देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं और नए ढांचे में कई और प्रावधानों को शामिल किया जा रहा है। मंत्री ने बताया कि भारत कनाडा और रूस समेत कई देशों के साथ द्विपक्षीय निवेश संरक्षण समझौतों पर बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा, 'अगर सब कुछ सही दिशा में बढ़ता है, तो दिसंबर तक हमें कम से कम तीन और देशों के साथ समझौते कर लेने चाहिए।'


निवेश संरक्षण संधियों का महत्व

सीतारमण ने बताया कि 2016 का द्विपक्षीय निवेश समझौता पहले के ढांचे की जगह लिया था और यह भारत की निवेश संधियों पर हुई बातचीत का आधार बना। द्विपक्षीय निवेश संधि का उद्देश्य एक-दूसरे के क्षेत्र में निवेशकों द्वारा किए गए निवेश को बढ़ावा देना और उसकी सुरक्षा करना है। निवेश संरक्षण संधियों के तहत निवेशक किसी संप्रभु सरकार के खिलाफ मध्यस्थता का सहारा ले सकते हैं।


विदेशी निवेशकों की सुरक्षा

भारत से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (ओडीआई) में वृद्धि के साथ, घरेलू निवेशकों और विदेशों में निवेश करने वाली कंपनियों को पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। मौजूदा ढांचे के तहत, किसी विदेशी निवेशक को भारत के खिलाफ संधि के आधार पर मध्यस्थता शुरू करने से पहले पांच साल तक इंतजार करना पड़ता है। इसका मतलब है कि यदि किसी विदेशी निवेशक का भारत के साथ विवाद है, तो उसे समझौते के तहत दावा करने से पहले पांच साल तक घरेलू कानूनी उपायों का सहारा लेना होगा।


पिछले ढांचे की खामियां

पिछले कुछ वर्षों में इस पांच साल की अवधि का विरोध बढ़ा है और कई पक्ष इसे कम करने की मांग कर रहे हैं। सीतारमण ने कहा कि सरकार का मानना है कि पुराना ढांचा भारत के हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं करता है, इसलिए नया खाका तैयार किया जा रहा है।


भारत-अमेरिका व्यापार समझौता

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर वित्त मंत्री ने कहा कि इसे अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है और बातचीत 'कठिन' रही है। उन्होंने कहा, 'समझौते पर बातचीत अब भी जारी है, हालांकि हम यह मानना चाहेंगे कि दोनों पक्ष उस स्थिति तक पहुंच गए हैं, जहां से आगे कुछ देना या लेना बहुत, बहुत मुश्किल होगा।'


चीन के साथ व्यापार संबंध

चीन के साथ भारत के व्यापार संबंधों की तुलना करते हुए सीतारमण ने कहा कि व्यापार असंतुलन का पारंपरिक रूप से बातचीत के माध्यम से समाधान किया जाता रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए शुल्क का उपयोग तेजी से एक साधन के रूप में किया जा रहा है।