दूध की कीमतों में बढ़ोतरी: क्या है इसके पीछे का कारण?

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महंगाई का नया असर

नई दिल्ली: देशभर में महंगाई का प्रभाव एक बार फिर से बढ़ता नजर आ रहा है। दिल्ली-NCR सहित कई अन्य शहरों में अब लोगों को दूध खरीदने के लिए अधिक पैसे खर्च करने होंगे। प्रमुख डेयरी कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने का निर्णय लिया है। अमूल के बाद, मदर डेयरी ने भी दूध की कीमतों में वृद्धि की है। दोनों कंपनियों ने विभिन्न श्रेणियों में दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है। ये नई दरें आज, 14 मई से लागू हो गई हैं। गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन की घोषणा के तुरंत बाद मदर डेयरी ने भी अपनी नई कीमतें जारी कीं। आइए, आपके शहर में दूध की ताजा कीमतों पर एक नजर डालते हैं।


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दिल्ली में दूध की नई दरें

दिल्ली में ताजा कीमतें


दिल्ली में अमूल फुल क्रीम दूध की कीमत 72 रुपये प्रति लीटर है, जबकि मदर डेयरी का फुल क्रीम दूध भी इसी कीमत पर उपलब्ध है। दोनों कंपनियों के टोन्ड दूध की कीमत 60 रुपये प्रति लीटर है। गाय के दूध की कीमत 62 रुपये प्रति लीटर है। डबल टोन्ड दूध की कीमतें भी बढ़ गई हैं, अब अमूल और मदर डेयरी के डबल टोन्ड दूध की कीमत 54 रुपये प्रति लीटर है।


मुंबई में दूध की ताजा दरें

मुंबई में दूध की ताजा दरें


मुंबई में अमूल गोल्ड की कीमत 70 से बढ़कर 72 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि अमूल ताजा दूध अब 60 रुपये प्रति लीटर में उपलब्ध है। मदर डेयरी का फुल क्रीम दूध भी 72 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। कोलकाता में अमूल गोल्ड दूध की कीमत 71 से बढ़कर 72 रुपये प्रति लीटर हो गई है, और अमूल ताजा दूध 60 रुपये प्रति लीटर में मिल रहा है। मदर डेयरी के टोन्ड दूध की कीमत भी बढ़कर 60 रुपये प्रति लीटर हो गई है।


मदर डेयरी की नई कीमतें

मदर डेयरी ने भी कीमतें बढ़ाई


अमूल के बाद, मदर डेयरी ने भी दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है। मदर डेयरी की नई कीमतें गुरुवार से लागू होंगी। कंपनी ने बताया कि पिछले एक साल में किसानों को दिए जाने वाले खरीद मूल्य में वृद्धि के बावजूद इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया था। कंपनी ने कहा कि बढ़ती लागत के कारण यह वृद्धि आवश्यक हो गई थी।


कीमतों में वृद्धि का कारण

वकीमतें क्यों बढ़ा रहे हैं?


डेयरी कंपनियों ने दूध से बने उत्पादों की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण बढ़ती इनपुट लागत को बताया है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में किसानों से खरीद की कीमतें लगातार बढ़ी हैं, जिससे इनपुट लागत में वृद्धि हुई है और मुनाफे का मार्जिन कम हो गया है। ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण उत्पन्न पश्चिम एशिया संकट भी कंपनियों पर दबाव डाल रहा है। कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रही है। चूंकि भारत काफी हद तक कच्चे तेल पर निर्भर है, इसलिए वह अब अधिक दरों पर कच्चा तेल आयात कर रहा है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा है।