Nippon India Growth Fund: 10 हजार की SIP से बने 26 करोड़, जानें निवेश का पूरा गणित
अगर आपमें शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से डरे बिना लंबी अवधि के लिए निवेश करने का साहस है, तो म्यूचुअल फंड आपके लिए खजाने की खान साबित हो सकता है। निप्पॉन इंडिया ग्रोथ मिड-कैप फंड ने निवेश की दुनिया में एक ऐसी मिसाल कायम की है जिसे सुनकर बड़े से बड़े निवेशक भी हैरान रह जाते हैं। मात्र 10,000 रुपये की मासिक एसआईपी (SIP) ने इस फंड में 30 साल के भीतर 26 करोड़ रुपये का विशाल फंड बना दिया है।
यह फंड उन निवेशकों के लिए एक जीता-जागता उदाहरण है जो बाजार में अनुशासित और धैर्यवान रहते हैं। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि कैसे कंपाउंडिंग की जादुई ताकत ने एक छोटे से निवेश को करोड़ों के साम्राज्य में बदल दिया और इस मिड-कैप फंड में जोखिम और मुनाफे का सटीक संतुलन क्या है।
30 साल का बेमिसाल सफर
निप्पॉन इंडिया ग्रोथ मिड-कैप फंड को निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड की सबसे पुरानी और भरोसेमंद योजनाओं में से एक माना जाता है। इसे 8 अक्टूबर 1995 को लॉन्च किया गया था और हाल ही में इसने सफलता के 30 साल पूरे किए हैं। इन तीन दशकों में बाजार ने कई ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव देखे हैं, जिसमें कई वैश्विक मंदी भी शामिल हैं, लेकिन इस फंड ने कभी भी अनुशासित निवेशकों का भरोसा नहीं खोया।
10,000 रुपये की SIP से कितनी कमाई हुई
कंपाउंडिंग की शक्ति को समझने के लिए निप्पॉन इंडिया ग्रोथ फंड के आंकड़े किसी चमत्कार से कम नहीं हैं। यदि आपने एक साल पहले 10,000 रुपये की मासिक एसआईपी शुरू की होती, तो आपका कुल निवेश 1.20 लाख रुपये बढ़कर 1,24,722 रुपये हो गया होता। 5 साल के पड़ाव पर आपका 6 लाख रुपये का निवेश लगभग 9,67,978 रुपये तक पहुंच जाता। 10 साल की अवधि में 12 लाख रुपये का निवेश 34.18 लाख रुपये से अधिक हो गया होता।
असली रफ़्तार 20 साल के बाद देखी गई, जब 24 लाख रुपये का निवेश 1.64 करोड़ रुपये बन गया। 30 साल के शिखर तक आपका कुल निवेश केवल 36 लाख रुपये था, लेकिन फंड की वैल्यू 24.96 करोड़ रुपये (लगभग 25 करोड़) तक पहुंच गई थी। अक्टूबर 1995 से जनवरी 2026 तक के पूरे सफर को देखें, तो 36.30 लाख रुपये का कुल निवेश अब 26.17 करोड़ रुपये की भारी रकम बन चुका है, जो 22.26 प्रतिशत का औसत वार्षिक रिटर्न दर्शाता है।
एकमुश्त निवेश (Lump-sum) में भी बंपर मुनाफा
सिर्फ किस्तों में ही नहीं, अगर किसी ने 30 साल पहले इस फंड की क्षमता पर भरोसा करते हुए 1 लाख रुपये एकमुश्त निवेश किए होते, तो आज उसकी वैल्यू अविश्वसनीय होती। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, लॉन्च के समय निवेश किए गए मात्र 1 लाख रुपये आज लगभग 4 करोड़ रुपये के फंड में तब्दील हो चुके हैं। इसी तरह, 2 लाख रुपये का निवेश आज 8 करोड़ रुपये का मालिक बना देता।
जोखिम को समझना भी है जरूरी
म्यूचुअल फंड में निवेश पूरी तरह से शेयर बाजार के जोखिमों के अधीन है, इसलिए सावधानी बरतना बहुत महत्वपूर्ण है। निप्पॉन इंडिया ग्रोथ फंड को 'रिस्क-ओ-मीटर' पर 'वेरी हाई रिस्क' श्रेणी में रखा गया है। क्योंकि यह एक मिड-कैप फंड है, इसलिए यह लार्ज-कैप फंडों की तुलना में अधिक अस्थिर होता है। जब बाजार गिरता है, तो मिड-कैप शेयरों में बड़ी गिरावट की संभावना अधिक होती है, हालांकि रिकवरी के दौरान ये फंड तेजी से वापसी भी करते हैं।
डिस्क्लेमर: म्यूचुअल फंड निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले सभी योजना दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं है। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
यह फंड उन निवेशकों के लिए एक जीता-जागता उदाहरण है जो बाजार में अनुशासित और धैर्यवान रहते हैं। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि कैसे कंपाउंडिंग की जादुई ताकत ने एक छोटे से निवेश को करोड़ों के साम्राज्य में बदल दिया और इस मिड-कैप फंड में जोखिम और मुनाफे का सटीक संतुलन क्या है।
30 साल का बेमिसाल सफर
निप्पॉन इंडिया ग्रोथ मिड-कैप फंड को निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड की सबसे पुरानी और भरोसेमंद योजनाओं में से एक माना जाता है। इसे 8 अक्टूबर 1995 को लॉन्च किया गया था और हाल ही में इसने सफलता के 30 साल पूरे किए हैं। इन तीन दशकों में बाजार ने कई ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव देखे हैं, जिसमें कई वैश्विक मंदी भी शामिल हैं, लेकिन इस फंड ने कभी भी अनुशासित निवेशकों का भरोसा नहीं खोया।You may also like
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10,000 रुपये की SIP से कितनी कमाई हुई
कंपाउंडिंग की शक्ति को समझने के लिए निप्पॉन इंडिया ग्रोथ फंड के आंकड़े किसी चमत्कार से कम नहीं हैं। यदि आपने एक साल पहले 10,000 रुपये की मासिक एसआईपी शुरू की होती, तो आपका कुल निवेश 1.20 लाख रुपये बढ़कर 1,24,722 रुपये हो गया होता। 5 साल के पड़ाव पर आपका 6 लाख रुपये का निवेश लगभग 9,67,978 रुपये तक पहुंच जाता। 10 साल की अवधि में 12 लाख रुपये का निवेश 34.18 लाख रुपये से अधिक हो गया होता। असली रफ़्तार 20 साल के बाद देखी गई, जब 24 लाख रुपये का निवेश 1.64 करोड़ रुपये बन गया। 30 साल के शिखर तक आपका कुल निवेश केवल 36 लाख रुपये था, लेकिन फंड की वैल्यू 24.96 करोड़ रुपये (लगभग 25 करोड़) तक पहुंच गई थी। अक्टूबर 1995 से जनवरी 2026 तक के पूरे सफर को देखें, तो 36.30 लाख रुपये का कुल निवेश अब 26.17 करोड़ रुपये की भारी रकम बन चुका है, जो 22.26 प्रतिशत का औसत वार्षिक रिटर्न दर्शाता है।
एकमुश्त निवेश (Lump-sum) में भी बंपर मुनाफा
सिर्फ किस्तों में ही नहीं, अगर किसी ने 30 साल पहले इस फंड की क्षमता पर भरोसा करते हुए 1 लाख रुपये एकमुश्त निवेश किए होते, तो आज उसकी वैल्यू अविश्वसनीय होती। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, लॉन्च के समय निवेश किए गए मात्र 1 लाख रुपये आज लगभग 4 करोड़ रुपये के फंड में तब्दील हो चुके हैं। इसी तरह, 2 लाख रुपये का निवेश आज 8 करोड़ रुपये का मालिक बना देता। जोखिम को समझना भी है जरूरी
म्यूचुअल फंड में निवेश पूरी तरह से शेयर बाजार के जोखिमों के अधीन है, इसलिए सावधानी बरतना बहुत महत्वपूर्ण है। निप्पॉन इंडिया ग्रोथ फंड को 'रिस्क-ओ-मीटर' पर 'वेरी हाई रिस्क' श्रेणी में रखा गया है। क्योंकि यह एक मिड-कैप फंड है, इसलिए यह लार्ज-कैप फंडों की तुलना में अधिक अस्थिर होता है। जब बाजार गिरता है, तो मिड-कैप शेयरों में बड़ी गिरावट की संभावना अधिक होती है, हालांकि रिकवरी के दौरान ये फंड तेजी से वापसी भी करते हैं। डिस्क्लेमर: म्यूचुअल फंड निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले सभी योजना दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं है। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।









