Notice Period Rules: क्या कंपनी आपको जबरन रोक सकती है या रोक सकती है सैलरी? जानिए क्या कहते हैं नियम

नौकरी छोड़ते समय या इस्तीफा देने के बाद कर्मचारियों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या कंपनी उन्हें जबरन रोक सकती है। इसके अलावा कई बार कंपनियां नोटिस पीरियड पूरा न करने या किसी अन्य कारण से कर्मचारी की बची हुई सैलरी रोक लेती हैं। Notice Period Rules Salary Withheld Laws 2026 के अंतर्गत भारतीय कानून और रोजगार संविदा नियम इस संबंध में बहुत स्पष्ट प्रावधान करते हैं, जिससे कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को संतुलित किया जा सके।
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क्या कंपनी आपको नोटिस पीरियड के दौरान काम करने के लिए मजबूर कर सकती है

रोजगार समझौते यानी एम्पलॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट के तहत नोटिस पीरियड एक द्विपक्षीय शर्त होती है। Can Company Force Employee to Serve Notice Period के कानूनी पहलुओं के अनुसार, कोई भी कंपनी किसी कर्मचारी से जबरन काम नहीं करवा सकती, क्योंकि भारत का संविधान बंधुआ मजदूरी या किसी भी प्रकार की जबरन सेवा की सख्त मनाही करता है। हालांकि, यदि अनुबंध में नोटिस पीरियड का उल्लेख है और कर्मचारी उसे पूरा नहीं करना चाहता, तो उसे कंपनी की नीति के अनुसार नोटिस पीरियड के बदले निर्धारित राशि का भुगतान करना पड़ सकता है।


क्या इस्तीफा देने के बाद कंपनी रोक सकती है आपकी सैलरी

कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंता उनके द्वारा किए गए काम की सैलरी रुकने को लेकर होती है। Employee Rights Salary Withholding After Resignation के नियमों के तहत, कंपनी कर्मचारी द्वारा किए गए काम के बदले की सैलरी को बिना किसी वैध कारण के नहीं रोक सकती है। पेमेंट ऑफ वेजेस एक्ट के अनुसार, कर्मचारी द्वारा कंपनी में सेवा दिए गए दिनों का भुगतान पाना उसका कानूनी अधिकार है। यदि कंपनी नोटिस पीरियड न सर्व करने के एवज में कोई कटौती करना चाहती है, तो वह केवल एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार ही की जा सकती है।


नोटिस पीरियड पे-आउट और बायआउट के नियम

कई कंपनियों में नोटिस पीरियड के बदले पैसे देकर तुरंत रिलीव होने यानी बायआउट का विकल्प मौजूद होता है। Legal Action Notice Period Buyout Rules India के तहत यदि आपके अपॉइंटमेंट लेटर में बायआउट का विकल्प शामिल है, तो आप नोटिस पीरियड के दौरान जितने दिन काम नहीं कर रहे हैं, उतने दिनों की सैलरी के बराबर राशि का भुगतान करके कंपनी से तुरंत रिलीव हो सकते हैं। लेकिन अगर अनुबंध में स्पष्ट रूप से नोटिस सर्व करना ही अनिवार्य लिखा है, तो कंपनी बायआउट का विकल्प देने से मना भी कर सकती है।

सैलरी रोके जाने या प्रताड़ित करने पर क्या करें लीगल एक्शन

यदि कोई कंपनी बिना किसी कानूनी आधार के आपकी सैलरी रोक लेती है या रिलीविंग लेटर देने से मना करती है, तो आप कानूनी कदम उठा सकते हैं। Labour Law Rules for Salary Payment After Resignation के तहत आप सबसे पहले कंपनी के एचआर और लीगल डिपार्टमेंट को लिखित में ईमेल भेजें। यदि फिर भी समाधान नहीं होता, तो आप अपने क्षेत्र के श्रम आयुक्त यानी लेबर कमिश्नर के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं या एडवोकेट के जरिए कंपनी को लीगल नोटिस भेजकर बकाया सैलरी और हर्जाने की मांग कर सकते हैं।