प्राइवेट कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: पेंशन राशि में 5 गुना तक इजाफा संभव, जानें नया अपडेट
एक औसत प्राइवेट कर्मचारी अपनी पूरी जिंदगी कड़ी मेहनत करता है ताकि उसका बुढ़ापा सुकून से कट सके। लेकिन मौजूदा समय में मिलने वाली 1,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन आज की महंगाई के दौर में ऊंट के मुंह में जीरे के समान लगती है। इसी समस्या को समझते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ अब पेंशन की इस राशि को बढ़ाने की दिशा में गंभीर विचार कर रहा है।
क्या है मौजूदा स्थिति और क्या हो सकता है बदलाव?
फिलहाल ईपीएस 95 (Employees' Pension Scheme 1995) के तहत रिटायर होने वाले कर्मचारियों को कम से कम 1,000 रुपये प्रति माह की पेंशन गारंटी के रूप में मिलती है। कर्मचारी संगठन और पेंशनर्स लंबे समय से इस राशि को बढ़ाकर 5,000 से 7,500 रुपये करने की मांग कर रहे हैं। ताजा चर्चाओं के अनुसार, सरकार और ईपीएफओ के बीच न्यूनतम पेंशन को सीधे 5,000 रुपये तक करने के प्रस्ताव पर विचार विमर्श चल रहा है। यदि इस पर अंतिम मुहर लग जाती है, तो यह पेंशनर्स की आय में पांच गुना की सीधी वृद्धि होगी।
आखिर क्यों जरूरी है यह बढ़ोतरी?
बढ़ती महंगाई के इस दौर में दवाइयों से लेकर राशन तक सब कुछ महंगा हो गया है। 1,000 रुपये में एक बुजुर्ग व्यक्ति के लिए अपने महीने भर के बुनियादी खर्च उठाना भी मुमकिन नहीं है। संसद की स्थायी समिति और कई श्रम संगठनों ने भी सिफारिश की है कि पेंशन की राशि ऐसी होनी चाहिए जिससे एक सम्मानजनक जीवन जिया जा सके। इसी दबाव और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के इरादे से सरकार इस दिशा में कदम बढ़ाने के संकेत दे रही है।
वेतन सीमा (Salary Limit) में भी बदलाव की आहट
पेंशन बढ़ाने के साथ-साथ एक और महत्वपूर्ण बदलाव जो देखने को मिल सकता है, वह है वेतन की सीमा में वृद्धि। वर्तमान में ईपीएफ योगदान के लिए अधिकतम वेतन सीमा 15,000 रुपये तय है। ऐसी खबरें हैं कि सरकार इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों का पीएफ और पेंशन फंड में योगदान बढ़ जाएगा, जिसका सीधा असर रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली मासिक पेंशन राशि पर पड़ेगा।
किसे मिलेगा इसका सबसे ज्यादा लाभ?
इस संभावित फैसले का सबसे बड़ा फायदा उन लाखों पेंशनभोगियों को होगा जो वर्तमान में न्यूनतम 1,000 रुपये की श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा, जो कर्मचारी आने वाले कुछ वर्षों में रिटायर होने वाले हैं, उनके लिए भी यह एक बड़ी राहत लेकर आएगा। ईपीएफओ अपनी भुगतान प्रणाली को भी अब पूरी तरह डिजिटल और केंद्रीकृत (Centralised Pension Payment System) बना रहा है, जिससे देशभर के किसी भी बैंक से पेंशन प्राप्त करना आसान हो जाएगा।
क्या है मौजूदा स्थिति और क्या हो सकता है बदलाव?
फिलहाल ईपीएस 95 (Employees' Pension Scheme 1995) के तहत रिटायर होने वाले कर्मचारियों को कम से कम 1,000 रुपये प्रति माह की पेंशन गारंटी के रूप में मिलती है। कर्मचारी संगठन और पेंशनर्स लंबे समय से इस राशि को बढ़ाकर 5,000 से 7,500 रुपये करने की मांग कर रहे हैं। ताजा चर्चाओं के अनुसार, सरकार और ईपीएफओ के बीच न्यूनतम पेंशन को सीधे 5,000 रुपये तक करने के प्रस्ताव पर विचार विमर्श चल रहा है। यदि इस पर अंतिम मुहर लग जाती है, तो यह पेंशनर्स की आय में पांच गुना की सीधी वृद्धि होगी।
आखिर क्यों जरूरी है यह बढ़ोतरी?
बढ़ती महंगाई के इस दौर में दवाइयों से लेकर राशन तक सब कुछ महंगा हो गया है। 1,000 रुपये में एक बुजुर्ग व्यक्ति के लिए अपने महीने भर के बुनियादी खर्च उठाना भी मुमकिन नहीं है। संसद की स्थायी समिति और कई श्रम संगठनों ने भी सिफारिश की है कि पेंशन की राशि ऐसी होनी चाहिए जिससे एक सम्मानजनक जीवन जिया जा सके। इसी दबाव और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के इरादे से सरकार इस दिशा में कदम बढ़ाने के संकेत दे रही है।
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वेतन सीमा (Salary Limit) में भी बदलाव की आहट
पेंशन बढ़ाने के साथ-साथ एक और महत्वपूर्ण बदलाव जो देखने को मिल सकता है, वह है वेतन की सीमा में वृद्धि। वर्तमान में ईपीएफ योगदान के लिए अधिकतम वेतन सीमा 15,000 रुपये तय है। ऐसी खबरें हैं कि सरकार इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों का पीएफ और पेंशन फंड में योगदान बढ़ जाएगा, जिसका सीधा असर रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली मासिक पेंशन राशि पर पड़ेगा।
किसे मिलेगा इसका सबसे ज्यादा लाभ?
इस संभावित फैसले का सबसे बड़ा फायदा उन लाखों पेंशनभोगियों को होगा जो वर्तमान में न्यूनतम 1,000 रुपये की श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा, जो कर्मचारी आने वाले कुछ वर्षों में रिटायर होने वाले हैं, उनके लिए भी यह एक बड़ी राहत लेकर आएगा। ईपीएफओ अपनी भुगतान प्रणाली को भी अब पूरी तरह डिजिटल और केंद्रीकृत (Centralised Pension Payment System) बना रहा है, जिससे देशभर के किसी भी बैंक से पेंशन प्राप्त करना आसान हो जाएगा।









